यूपी में 15 जुलाई से शुरू होगा 'प्रोजेक्ट प्रवीण', रोज़गार के लिए तैयार किये जाएंगे सरकारी स्कूलों के छात्र, मिलेगा 300 घंटे का कौशल प्रशिक्षण
Gaon Connection | Jun 27, 2026, 17:23 IST
उत्तर प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में 'प्रोजेक्ट प्रवीण' के तहत 36,103 विद्यार्थियों को कौशल प्रशिक्षण देने का लक्ष्य तय किया है। 15 जुलाई 2026 से प्रशिक्षण शुरू होगा। आईटी, हेल्थकेयर, इलेक्ट्रॉनिक्स, एग्रीकल्चर समेत कई क्षेत्रों में अधिकतम 300 घंटे का प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रत्येक बैच में 35 प्रशिक्षणार्थी होंगे और समय-सीमा का पालन नहीं करने वाले प्रशिक्षण प्रदाताओं पर कार्रवाई होगी।
यूपी सरकार ने 'प्रोजेक्ट प्रवीण' के लिए जारी किया प्रशिक्षण लक्ष्य
उत्तर प्रदेश सरकार प्रदेश के सरकारी माध्यमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को स्कूली शिक्षा के साथ-साथ रोजगारपरक कौशल से जोड़ने की तैयारी में है। इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 'प्रोजेक्ट प्रवीण' के तहत अल्पकालीन कौशल प्रशिक्षण (एसटीटी) का लक्ष्य जारी कर दिया है। इस वर्ष प्रदेशभर में 36,103 विद्यार्थियों को विभिन्न तकनीकी और व्यावसायिक क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण की शुरुआत 15 जुलाई 2026 से होगी और प्रत्येक बैच में अधिकतम 35 प्रशिक्षणार्थियों को शामिल किया जाएगा, ताकि उन्हें बेहतर व्यावहारिक और प्रयोगात्मक प्रशिक्षण मिल सके।
उत्तर प्रदेश सरकार का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों को पढ़ाई के दौरान ही उद्योगों की ज़रूरतों के अनुरूप कौशल उपलब्ध कराना है, जिससे वे भविष्य में रोज़गार और स्वरोज़गार के बेहतर अवसर हासिल कर सकें। प्रशिक्षण के लिए आईटी-आईटीईएस, हेल्थकेयर, इलेक्ट्रॉनिक्स, अपैरल, ब्यूटी एंड वेलनेस, मैनेजमेंट, ग्रीन जॉब्स और एग्रीकल्चर जैसे प्रमुख सेक्टर्स को शामिल किया गया है। सभी पाठ्यक्रमों की अधिकतम अवधि 300 घंटे निर्धारित की गई है।
व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि योगी सरकार का उद्देश्य है कि प्रदेश का कोई भी युवा कौशल से वंचित न रहे। उन्होंने बताया कि 'प्रोजेक्ट प्रवीण' के माध्यम से राजकीय माध्यमिक विद्यालयों के विद्यार्थियों को पारंपरिक शिक्षा के साथ तकनीकी और व्यावसायिक प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
इसके लिए आगरा, बरेली, आज़मगढ़, ललितपुर, वाराणसी, रामपुर, शाहजहाँपुर, जालौन और सोनभद्र सहित प्रदेश के विभिन्न जनपदों के राजकीय विद्यालयों में सूचीबद्ध प्रशिक्षण प्रदाताओं को ज़िम्मेदारी सौंपी गई है। प्रशिक्षण की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए प्रत्येक बैच में अधिकतम 35 विद्यार्थियों की सीमा तय की गई है, जबकि सभी पाठ्यक्रमों की अवधि अधिकतम 300 घंटे होगी।
उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन के निदेशक पुलकित खरे द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार सभी प्रशिक्षण प्रदाताओं को केंद्रों की स्थापना, पंजीकरण और बैच गठन की प्रक्रिया पूरी कर 15 जुलाई 2026 तक हर हाल में प्रशिक्षण शुरू करना होगा। बैच शुरू होने के सात कार्य दिवसों के भीतर सभी छात्र-छात्राओं को अध्ययन सामग्री वितरित करनी होगी और उससे संबंधित तस्वीरें मिशन के पोर्टल पर अपलोड करनी होंगी। निर्देश में कहा गया है कि यदि कोई प्रशिक्षण प्रदाता निर्धारित समय-सीमा के भीतर कार्य शुरू नहीं करता है अथवा जनपद स्तर पर उसके विरुद्ध किसी प्रकार की शिकायत प्राप्त होती है, तो उसके ख़िलाफ़ नियमानुसार सख़्त विधिक कार्रवाई की जाएगी।
उत्तर प्रदेश सरकार का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों को पढ़ाई के दौरान ही उद्योगों की ज़रूरतों के अनुरूप कौशल उपलब्ध कराना है, जिससे वे भविष्य में रोज़गार और स्वरोज़गार के बेहतर अवसर हासिल कर सकें। प्रशिक्षण के लिए आईटी-आईटीईएस, हेल्थकेयर, इलेक्ट्रॉनिक्स, अपैरल, ब्यूटी एंड वेलनेस, मैनेजमेंट, ग्रीन जॉब्स और एग्रीकल्चर जैसे प्रमुख सेक्टर्स को शामिल किया गया है। सभी पाठ्यक्रमों की अधिकतम अवधि 300 घंटे निर्धारित की गई है।
राज्यभर के विद्यालयों में होगा प्रशिक्षण
इसके लिए आगरा, बरेली, आज़मगढ़, ललितपुर, वाराणसी, रामपुर, शाहजहाँपुर, जालौन और सोनभद्र सहित प्रदेश के विभिन्न जनपदों के राजकीय विद्यालयों में सूचीबद्ध प्रशिक्षण प्रदाताओं को ज़िम्मेदारी सौंपी गई है। प्रशिक्षण की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए प्रत्येक बैच में अधिकतम 35 विद्यार्थियों की सीमा तय की गई है, जबकि सभी पाठ्यक्रमों की अवधि अधिकतम 300 घंटे होगी।