हरियाणा में कैब सेवाओं के लिए बड़ा बदलाव, जानिए कब और किन गाड़ियों पर लगेगी रोक?
Preeti Nahar | May 19, 2026, 12:33 IST
दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण के बीच हरियाणा सरकार ने नई एग्रीगेटर नीति लागू करने का फैसला लिया है। इस नीति के तहत जनवरी 2026 से Ola, Uber, Rapido जैसी कैब एग्रीगेटर कंपनियाँ अपने फ्लीट में नई पेट्रोल और डीजल गाड़ियाँ शामिल नहीं कर सकेंगी। सरकार ने साफ किया है कि अब केवल इलेक्ट्रिक (EV), CNG और अन्य स्वच्छ ईंधन से चलने वाले वाहन ही फ्लीट में शामिल किए जाएंगे। नई नीति में यात्रियों की सुरक्षा, ड्राइवर बीमा, साइबर सिक्योरिटी और लाइसेंसिंग से जुड़े कई सख्त नियम भी जोड़े गए हैं।
Auto, cab unions want fare revision after fuel price hike
दिल्ली-एनसीआर में खराब होती एयर क्वालिटी और बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए हरियाणा सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार ने नई एग्रीगेटर लाइसेंस नीति को मंजूरी देते हुए फैसला लिया है कि जनवरी 2026 से NCR क्षेत्र में ऐप आधारित कैब और डिलीवरी कंपनियां नई पेट्रोल और डीजल गाड़ियां अपने बेड़े में शामिल नहीं कर पाएंगी। सरकार का मानना है कि इससे इलेक्ट्रिक और स्वच्छ ईंधन वाले वाहनों को बढ़ावा मिलेगा और दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण कम करने में मदद मिलेगी।
हरियाणा सरकार की नई नीति के अनुसार अब NCR क्षेत्र में Ola, Uber, Rapido जैसी कंपनियाँ केवल इलेक्ट्रिक, CNG या अन्य स्वच्छ ईंधन से चलने वाले वाहन ही अपने फ्लीट में शामिल कर सकेंगी। सरकार ने यह फैसला Commission for Air Quality Management (CAQM) के निर्देशों के आधार पर लिया है। CAQM ने पहले ही निर्देश दिया था कि जनवरी 2026 से दिल्ली-एनसीआर में कैब एग्रीगेटर, डिलीवरी और ई-कॉमर्स कंपनियां नई पेट्रोल और डीजल गाड़ियां शामिल नहीं करेंगी। सरकार का कहना है कि इस कदम से प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की संख्या धीरे-धीरे कम होगी और ग्रीन मोबिलिटी को बढ़ावा मिलेगा।
नई नीति का असर केवल टैक्सी सेवाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ऑटो रिक्शा और डिलीवरी सेक्टर पर भी पड़ेगा। अब NCR में नए ऑटो रिक्शा के रूप में केवल CNG या इलेक्ट्रिक ऑटो को ही अनुमति दी जाएगी। इसके अलावा डिलीवरी कंपनियों को भी धीरे-धीरे इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर शिफ्ट होना पड़ेगा। सरकार का मानना है कि इससे ट्रांसपोर्ट सेक्टर से होने वाले प्रदूषण में बड़ी कमी लाई जा सकेगी।
हरियाणा सरकार ने नई एग्रीगेटर नीति में कई सख्त प्रावधान जोड़े हैं। अब ऐप आधारित कंपनियों के लिए वैध लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा। यात्रियों और ड्राइवरों के लिए बीमा सुविधा देना जरूरी होगा। सरकार ने यात्रियों के लिए कम से कम ₹5 लाख का बीमा और ड्राइवरों के लिए हेल्थ व टर्म इंश्योरेंस अनिवार्य किया है। इसके साथ ही GPS, पैनिक बटन, साइबर सिक्योरिटी, ड्राइवर ट्रेनिंग और 24x7 शिकायत निवारण प्रणाली जैसी सुविधाएं भी जरूरी कर दी गई हैं।
सरकार के इस फैसले के बाद कई कैब और डिलीवरी ड्राइवरों ने चिंता जताई है। ड्राइवरों का कहना है कि इलेक्ट्रिक वाहन खरीदना काफी महंगा है और अभी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर भी पूरी तरह तैयार नहीं है। कई लोगों का मानना है कि लंबी दूरी के लिए EV अभी पूरी तरह व्यावहारिक नहीं हैं। सोशल मीडिया पर भी इस फैसले को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कुछ लोग इसे प्रदूषण कम करने की दिशा में बड़ा कदम बता रहे हैं, जबकि कई लोग सरकार से EV सब्सिडी और चार्जिंग नेटवर्क बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले के बाद दिल्ली-एनसीआर में इलेक्ट्रिक टैक्सी, ऑटो और डिलीवरी वाहनों की मांग तेजी से बढ़ सकती है। इससे EV उद्योग को बड़ा फायदा मिलने की संभावना है। सरकार का उद्देश्य पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता कम करना और ग्रीन ट्रांसपोर्ट सिस्टम को मजबूत बनाना है। हालांकि इस बदलाव को सफल बनाने के लिए सरकार को चार्जिंग स्टेशन, बैटरी इंफ्रास्ट्रक्चर और ड्राइवरों के लिए आर्थिक सहायता जैसी चुनौतियों पर भी तेजी से काम करना होगा।