World Wetlands Day से पहले भारत को बड़ी सौगात, रामसर सूची में जुड़े भारत के दो नए वेटलैंड्स
Gaon Connection | Jan 31, 2026, 13:22 IST
उत्तर प्रदेश के एटा की पटना बर्ड सैंक्चुरी और गुजरात के कच्छ क्षेत्र का छारी-ढांड अब आधिकारिक रूप से रामसर साइट्स की सूची में शामिल हो गए हैं।
गुजरात के कच्छ क्षेत्र का Chhari-Dhand अब आधिकारिक रूप से रामसर साइट की सूची में शामिल हो गया है।
विश्व आर्द्रभूमि दिवस (World Wetlands Day) से पहले भारत के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। उत्तर प्रदेश और गुजरात के दो नए वेटलैंड्स को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली है। उत्तर प्रदेश के एटा जिले में स्थित Patna Bird Sanctuary और गुजरात के कच्छ क्षेत्र का Chhari-Dhand अब आधिकारिक रूप से रामसर साइट्स की सूची में शामिल हो गए हैं।
यह मान्यता केवल नाम जोड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की पर्यावरण संरक्षण और आर्द्रभूमि संरक्षण के प्रति मजबूत प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है। इन दोनों आर्द्रभूमियों में सैकड़ों प्रवासी और स्थानीय पक्षी प्रजातियां पाई जाती हैं, जो हर साल यहां आकर अपना बसेरा बनाती हैं। इसके साथ ही यह क्षेत्र चिंकारा, भेड़िया, कैराकल, रेगिस्तानी बिल्ली, रेगिस्तानी लोमड़ी और कई संकटग्रस्त पक्षी प्रजातियों का भी महत्वपूर्ण आवास है।
इन नए रामसर स्थलों के जुड़ने से स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को संरक्षण मिलेगा, पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और आसपास के समुदायों को आजीविका के नए अवसर भी मिलेंगे। आर्द्रभूमियां न केवल जैव विविधता को बचाने में अहम भूमिका निभाती हैं, बल्कि जल संरक्षण, बाढ़ नियंत्रण और जलवायु संतुलन बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण योगदान देती हैं।
भारत के रामसर नेटवर्क का तेजी से विस्तार हुआ है। साल 2014 में जहां देश में केवल 26 रामसर साइट्स थीं, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 98 तक पहुंच चुकी है। यानी पिछले एक दशक में भारत के रामसर स्थलों की संख्या में 276 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी हुई है।
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Patna Bird Sanctuary और Chhari-Dhand को मिली यह अंतरराष्ट्रीय पहचान आने वाले समय में इन आर्द्रभूमियों के संरक्षण, वैज्ञानिक शोध और इको-टूरिज्म को नई दिशा देगी। साथ ही यह संदेश भी देती है कि प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग की साझा जिम्मेदारी है।
रामसर साइट (Ramsar Sites) उन अंतरराष्ट्रीय महत्व की Wetlands को कहा जाता है, जिन्हें 1971 में ईरान के रामसर शहर में हुए सम्मेलन (Ramsar Convention) के तहत मान्यता दी गई है।
भारत की बात की जाए तो सबसे ज़्यादा रामसर साइट्स तमिलनाडु में कुल 20 और इसके बाद उत्तर प्रदेश है जहाँ Patna Bird Sanctuary को मिलाकर कुल 11 साइट्स हो गईं है।
पश्चिम बंगाल की सुंदरवन वेटलैंड देश की सबसे बड़ी वेटलैंड साइट है जोकि लगभग 4,230 वर्ग किमी में फैली है। जबकि सबसे छोटी साइट हिमाचल प्रदेश की रेणुका आर्द्रभूमि और तमिलनाडु का वेम्बन्नूर वेटलैंड कॉम्प्लेक्स है। भारत में पहली रामसर साइट में शामिल होने वाली ओडिशा की चिल्का झील और राजस्थान का केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान है, जिसे साल 1981 में रामसर साइट्स में शामिल किया गया था।
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यह मान्यता केवल नाम जोड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की पर्यावरण संरक्षण और आर्द्रभूमि संरक्षण के प्रति मजबूत प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है। इन दोनों आर्द्रभूमियों में सैकड़ों प्रवासी और स्थानीय पक्षी प्रजातियां पाई जाती हैं, जो हर साल यहां आकर अपना बसेरा बनाती हैं। इसके साथ ही यह क्षेत्र चिंकारा, भेड़िया, कैराकल, रेगिस्तानी बिल्ली, रेगिस्तानी लोमड़ी और कई संकटग्रस्त पक्षी प्रजातियों का भी महत्वपूर्ण आवास है।
इन नए रामसर स्थलों के जुड़ने से स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को संरक्षण मिलेगा, पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और आसपास के समुदायों को आजीविका के नए अवसर भी मिलेंगे। आर्द्रभूमियां न केवल जैव विविधता को बचाने में अहम भूमिका निभाती हैं, बल्कि जल संरक्षण, बाढ़ नियंत्रण और जलवायु संतुलन बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण योगदान देती हैं।
उत्तर प्रदेश के एटा जिले में स्थित Patna Bird Sanctuary भी अब आधिकारिक रूप से रामसर साइट की सूची में शामिल हो गया है।
भारत के रामसर नेटवर्क का तेजी से विस्तार हुआ है। साल 2014 में जहां देश में केवल 26 रामसर साइट्स थीं, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 98 तक पहुंच चुकी है। यानी पिछले एक दशक में भारत के रामसर स्थलों की संख्या में 276 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी हुई है।
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Patna Bird Sanctuary और Chhari-Dhand को मिली यह अंतरराष्ट्रीय पहचान आने वाले समय में इन आर्द्रभूमियों के संरक्षण, वैज्ञानिक शोध और इको-टूरिज्म को नई दिशा देगी। साथ ही यह संदेश भी देती है कि प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग की साझा जिम्मेदारी है।
क्या होती है रामसर साइट (Ramsar Site)
भारत की बात की जाए तो सबसे ज़्यादा रामसर साइट्स तमिलनाडु में कुल 20 और इसके बाद उत्तर प्रदेश है जहाँ Patna Bird Sanctuary को मिलाकर कुल 11 साइट्स हो गईं है।
पश्चिम बंगाल की सुंदरवन वेटलैंड देश की सबसे बड़ी वेटलैंड साइट है जोकि लगभग 4,230 वर्ग किमी में फैली है। जबकि सबसे छोटी साइट हिमाचल प्रदेश की रेणुका आर्द्रभूमि और तमिलनाडु का वेम्बन्नूर वेटलैंड कॉम्प्लेक्स है। भारत में पहली रामसर साइट में शामिल होने वाली ओडिशा की चिल्का झील और राजस्थान का केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान है, जिसे साल 1981 में रामसर साइट्स में शामिल किया गया था।
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