Agri Loan: किसानों और छोटे कारोबारियों के लिए आसान होगा कर्ज, लोकसभा में पेश हुआ NCDC संशोधन बिल
Mansi | Aug 11, 2026, 14:01 IST
सरकार ने लोकसभा में राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम संशोधन विधेयक पेश किया है। यह विधेयक सहकारी संस्थाओं को सीधे ऋण और अनुदान प्राप्त करने में मदद करेगा। डेयरी, भंडारण और मछली उत्पादन जैसी गतिविधियों को इससे वित्तीय सहयोग मिलेगा। एनसीडीसी को शेयर पूंजी में हिस्सेदारी लेने का अधिकार भी प्रस्तावित है। सरकार 4 वर्षों में 2,000 करोड़ रुपये का अनुदान प्रदान करेगी।
एनसीडीसी के नए प्रावधानों से सहकारी समितियों को सीधे कर्ज, अनुदान और पूंजी निवेश की सुविधा मिलने का रास्ता आसान होगा
सहकारी समितियों से जुड़े किसानों और छोटे कारोबारियों के लिए वित्तीय सहायता हासिल करना आसान हो सकता है। सरकार ने सोमवार को लोकसभा में राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) संशोधन विधेयक पेश किया है। प्रस्तावित बदलावों का मक़सद एनसीडीसी के कामकाज का दायरा बढ़ाना और सहकारी क्षेत्र में कर्ज व अनुदान की उपलब्धता को आसान बनाना है।
इस बदलाव से सहकारी क्षेत्र में काम करने वाली पात्र संस्थाओं को परियोजनाओं के लिए फंड जुटाने के अधिक विकल्प मिल सकते हैं। डेयरी, भंडारण, प्रोसेसिंग और मछली उत्पादन जैसी गतिविधियों से जुड़ी संस्थाओं के लिए सीधे वित्तीय सहायता का रास्ता खुलने से विकास कार्यों को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है। साथ ही, एनसीडीसी की बढ़ी हुई ऋण क्षमता से सहकारी संस्थाओं को लंबी अवधि के कर्ज और रोज़मर्रा के कामकाज के लिए ज़रूरी पूंजी हासिल करने का अवसर मिलेगा।
प्रस्तावित कानून के तहत एनसीडीसी को सहकारी समितियों के अलावा सहकारी क्षेत्र में काम करने वाली अन्य पात्र संस्थाओं को भी सीधे ऋण और अनुदान देने का अधिकार मिल सकेगा। मौजूदा व्यवस्था में ऐसी संस्थाओं को वित्तीय सहायता दिलाने के लिए कई मामलों में राज्य सरकार या किसी दूसरी सहकारी संस्था को बीच में लाना पड़ता है। नए प्रावधान लागू होने के बाद इस प्रक्रिया में बदलाव होगा और पात्र संस्थाओं को सीधे एनसीडीसी से वित्तीय सहायता लेने का रास्ता मिल सकेगा। हालांकि, ऋण देते समय एनसीडीसी ज़रूरी गारंटी या सुरक्षा मांग सकेगा।
सीधे वित्तीय सहयोग मिलने से सहकारी क्षेत्र की कई तरह की परियोजनाओं को गति मिल सकती है। उदाहरण के लिए, दुग्ध सहकारी समितियाँ दूध ठंडा करने के लिए चिलिंग प्लांट स्थापित कर सकती हैं। किसानों के लिए गोदाम और प्रोसेसिंग सुविधाएँ तैयार करने वाली संस्थाओं को भी इस व्यवस्था से मदद मिल सकती है। इसके अलावा मछली उत्पादन से जुड़े बुनियादी ढांचे को विकसित करने वाली सहकारी संस्थाएँ भी वित्तीय सहायता का लाभ उठा सकेंगी। इससे ऐसी परियोजनाओं को शुरू करने और आगे बढ़ाने के लिए पूंजी जुटाना आसान हो सकता है।
विधेयक में एनसीडीसी की भूमिका को सिर्फ़ कर्ज और अनुदान देने तक सीमित नहीं रखने का प्रस्ताव है। सरकार की मंज़ूरी मिलने के बाद एनसीडीसी सहकारी समितियों या सहकारी विकास से जुड़ी संस्थाओं की शेयर पूंजी में भी हिस्सेदारी ले सकेगा। इस प्रावधान के बाद एनसीडीसी जरूरत के अनुसार सहकारी क्षेत्र की परियोजनाओं में सीधे पूंजी निवेश कर सकेगा। इससे बड़ी परियोजनाओं को वित्तीय आधार देने के लिए एक अतिरिक्त विकल्प उपलब्ध होगा।
सहकारी क्षेत्र को मजबूत करने के लिए सरकार ने 2025-26 से 2028-29 तक चार वर्षों में एनसीडीसी को कुल 2,000 करोड़ रुपये का अनुदान देने का फैसला किया है। सरकार के अनुसार, इस सरकारी सहायता के आधार पर एनसीडीसी बाजार से करीब 20,000 करोड़ रुपये जुटाने में सक्षम हो सकता है। इससे उसकी कर्ज देने की क्षमता बढ़ेगी और सहकारी संस्थाओं को लंबे समय के ऋण के साथ-साथ वर्किंग कैपिटल के लिए भी वित्तीय सहायता मिल सकेगी।
सहकारी क्षेत्र में बढ़ेगा वित्तीय सहयोग
प्रस्तावित संशोधन के ज़रिए एनसीडीसी के वित्तीय कामकाज को व्यापक बनाने की कोशिश की गई है। सीधे ऋण और अनुदान देने की सुविधा, शेयर पूंजी में हिस्सेदारी और 2,000 करोड़ रुपये के सरकारी अनुदान से एनसीडीसी की वित्तीय क्षमता बढ़ाने का रास्ता तैयार किया जा रहा है। इन प्रावधानों का असर सहकारी क्षेत्र से जुड़ी डेयरी, भंडारण, प्रोसेसिंग और मछली उत्पादन जैसी गतिविधियों पर पड़ सकता है। इससे सहकारी संस्थाओं को परियोजनाओं के लिए पूंजी जुटाने और उन्हें समय पर आगे बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
इस बदलाव से सहकारी क्षेत्र में काम करने वाली पात्र संस्थाओं को परियोजनाओं के लिए फंड जुटाने के अधिक विकल्प मिल सकते हैं। डेयरी, भंडारण, प्रोसेसिंग और मछली उत्पादन जैसी गतिविधियों से जुड़ी संस्थाओं के लिए सीधे वित्तीय सहायता का रास्ता खुलने से विकास कार्यों को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है। साथ ही, एनसीडीसी की बढ़ी हुई ऋण क्षमता से सहकारी संस्थाओं को लंबी अवधि के कर्ज और रोज़मर्रा के कामकाज के लिए ज़रूरी पूंजी हासिल करने का अवसर मिलेगा।
सहकारी संस्थाओं को सीधे मिल सकेगा कर्ज
डेयरी से लेकर मछली पालन तक को फायदा
एनसीडीसी को शेयर पूंजी में हिस्सेदारी लेने का अधिकार
चार साल में मिलेगा 2,000 करोड़ रुपये का अनुदान
सहकारी क्षेत्र में बढ़ेगा वित्तीय सहयोग
प्रस्तावित संशोधन के ज़रिए एनसीडीसी के वित्तीय कामकाज को व्यापक बनाने की कोशिश की गई है। सीधे ऋण और अनुदान देने की सुविधा, शेयर पूंजी में हिस्सेदारी और 2,000 करोड़ रुपये के सरकारी अनुदान से एनसीडीसी की वित्तीय क्षमता बढ़ाने का रास्ता तैयार किया जा रहा है। इन प्रावधानों का असर सहकारी क्षेत्र से जुड़ी डेयरी, भंडारण, प्रोसेसिंग और मछली उत्पादन जैसी गतिविधियों पर पड़ सकता है। इससे सहकारी संस्थाओं को परियोजनाओं के लिए पूंजी जुटाने और उन्हें समय पर आगे बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।