बारिश में बढ़ा खुरपका-मुँहपका रोग का ख़तरा, बिहार में मुफ़्त टीकाकरण अभियान तेज़, 79 लाख से अधिक पशुओं को लगा टीका

Gaon Connection | Aug 03, 2026, 13:55 IST
Share

बरसात के मौसम में खुरपका-मुँहपका (एफएमडी) रोग का ख़तरा बढ़ने के बीच बिहार सरकार राज्यभर में निःशुल्क टीकाकरण अभियान चला रही है। 10 जुलाई से शुरू हुए सातवें चरण में अब तक 79 लाख से अधिक पशुओं का टीकाकरण किया जा चुका है। सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक एफएमडी रोग पर नियंत्रण और इसके उन्मूलन का है। पशुपालकों से समय पर टीकाकरण कराकर पशुओं और दुग्ध उत्पादन को सुरक्षित रखने की अपील की गई है।

एफएमडी से बचाने के लिए घर-घर पहुँच रही वैक्सीन
एफएमडी से बचाने के लिए घर-घर पहुँच रही वैक्सीन
मानसून के दौरान जहाँ एक ओर किसान खरीफ़ फ़सलों की बुवाई में व्यस्त हैं, वहीं दूसरी ओर पशुपालकों के सामने पशुओं को संक्रामक बीमारियों से सुरक्षित रखने की चुनौती भी बढ़ जाती है। बरसात का मौसम खुरपका-मुँहपका (एफएमडी) रोग के फैलने के लिए अनुकूल माना जाता है। यह बीमारी गाय, भैंस और अन्य दुधारू पशुओं को प्रभावित करती है, जिससे उनकी सेहत बिगड़ने के साथ-साथ दुग्ध उत्पादन में भी गिरावट आती है। ऐसे में समय पर टीकाकरण ही इस रोग से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय माना जा रहा है।

इसी चुनौती को देखते हुए बिहार सरकार ने राज्यभर में निःशुल्क एफएमडी टीकाकरण अभियान को तेज़ कर दिया है। 10 जुलाई से शुरू हुए अभियान के सातवें चरण के तहत अब तक 79 लाख से अधिक पशुओं को टीका लगाया जा चुका है। अभियान का उद्देश्य अधिक से अधिक पशुओं को रोग से सुरक्षित करना और वर्ष 2030 तक राज्य को खुरपका-मुँहपका रोग से मुक्त बनाने की दिशा में तेज़ी से काम करना है।

क्या है सरकार की टीकाकरण योजना और किसे मिल रहा लाभ?

राज्य सरकार की ओर से प्रशिक्षित टीकाकर्मी गाँव-गाँव और घर-घर जाकर गाय, बैल, बछड़ा, बछड़ी और भैंसों का निःशुल्क टीकाकरण कर रहे हैं। अब तक लगभग 16 लाख से अधिक पशुपालक इस अभियान से लाभान्वित हो चुके हैं। टीकाकरण के आँकड़ों में पूर्णिया सबसे आगे है, जहाँ लगभग 5.98 लाख पशुओं को टीका लगाया गया है। इसके बाद पटना में 4.89 लाख और पूर्वी चंपारण में 4.61 लाख से अधिक पशुओं का टीकाकरण किया जा चुका है। पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में भी 2.81 करोड़ पशुओं का टीकाकरण हुआ था, जिससे 50 लाख से अधिक पशुपालकों को लाभ मिला था।

बारिश में बढ़ जाता है एफएमडी का ख़तरा

बरसात के मौसम में खुरपका-मुँहपका रोग के फैलने की आशंका अन्य मौसमों की तुलना में अधिक रहती है। यह बीमारी पशुओं की सेहत पर गंभीर असर डालती है और दूध उत्पादन में भी कमी ला सकती है। इसीलिए सरकार निःशुल्क टीकाकरण अभियान चला रही है।

एफएमडी से कितना होता है आर्थिक नुकसान और क्या है लक्ष्य?

खुरपका-मुँहपका रोग के कारण देश को हर वर्ष लगभग 20 हज़ार करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। इसके अलावा पशु उत्पादों के निर्यात पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इसी वजह से सरकार इस बीमारी पर नियंत्रण को प्राथमिकता दे रही है। डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के सचिव शीर्षत कपिल अशोक ने पशुपालकों से अपील की है कि वे टीकाकर्मियों का सहयोग करें और सभी पात्र पशुओं का समय पर टीकाकरण कराएँ। उन्होंने बताया कि किसी भी प्रकार की जानकारी, शिकायत या सुझाव के लिए विभाग के टोल फ़्री नंबर 1962 पर संपर्क किया जा सकता है।
Tags:
  • Foot and Mouth Disease (FMD)
  • Bihar Government
  • Free Vaccination
  • Livestock
  • Cattle Vaccination
  • Monsoon Season
  • Dairy Farming
  • Animal Health
  • Milk Production
  • Veterinary Department