Litchi Farming: बिहार के लीची किसानों के लिए अलर्ट: बढ़ेगा कीट प्रकोप, तुरंत अपनाएं वैज्ञानिक उपाय
Gaon Connection | Apr 30, 2026, 17:22 IST
Bihar में लीची किसानों के लिए महत्वपूर्ण एडवाइजरी जारी की गई है, जिसमें बदलते मौसम के बीच कीटों के बढ़ते प्रकोप को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी गई है। वैज्ञानिकों ने समय पर उचित प्रबंधन अपनाकर फसल की गुणवत्ता और उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया है।
बिहार में कीट बढ़ने की चेतावनी, एडवाइजरी जारी
बिहार में लीची की खेती करने वाले किसानों के लिए यह समय बेहद महत्वपूर्ण है। मौजूदा मौसम में कीटों का प्रकोप तेजी से बढ़ सकता है, जिससे फसल को नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है। इसी को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र द्वारा किसानों को जरूरी सलाह जारी की गई है, ताकि वे समय रहते उचित कदम उठाकर अपनी फसल को सुरक्षित रख सकें।
मौसम में बदलाव के साथ लीची की फसलों पर कीटों का असर बढ़ने की संभावना रहती है। खासकर गर्म और आर्द्र परिस्थितियों में फल बेधक जैसे कीट तेजी से फैलते हैं, जिससे फलों की गुणवत्ता प्रभावित होती है और उत्पादन में कमी आ सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, लीची की फसल को सुरक्षित रखने के लिए समय पर कीटनाशी दवाओं का छिड़काव जरूरी है। फल बेधक कीट नियंत्रण के लिए थियाक्लोप्रिड और लैम्ब्डा साइहेलोथ्रिन जैसे रसायनों का निर्धारित मात्रा में उपयोग करने की सलाह दी गई है। इसके अलावा, आवश्यकता अनुसार अन्य अनुशंसित दवाओं का भी प्रयोग किया जा सकता है।
फलों के बेहतर विकास और गुणवत्ता बनाए रखने के लिए बोरॉन का छिड़काव भी महत्वपूर्ण बताया गया है। यारा वीटा बोरॉन या सोलुबार (21% बोरॉन) को पानी में मिलाकर छिड़काव करने से फलों का आकार और गुणवत्ता बेहतर होती है। यह उपाय उत्पादन बढ़ाने में भी सहायक साबित होता है।
लीची किसानों के लिए खास एडवायजरी जारी की गई है कि फलों को कीटों से बचाने के लिए लीची की तुड़ाई से 10 से 12 दिन पूर्व अंतिम छिड़काव करना चाहिए। इसके लिए इमामेक्टिन बेन्जोएट 5%SG, स्पाइनोसैड 45 % SG और स्पिनेटोरम 11.7% SC में से किसी एक का प्रयोग कर सकते हैं।
- छिड़काव सुबह या शाम में करें
- केवल अनुशंसित मात्रा का उपयोग करें
- बाग में हल्की सिंचाई से नमी बनाए रखें
- मास्क व दस्ताने जैसे सुरक्षा उपकरण अवश्य पहनें
किसानों को सलाह दी गई है कि वे नियमित रूप से अपने बागों की निगरानी करें और कीटों के शुरुआती लक्षण दिखते ही तुरंत कार्रवाई करें। साथ ही, दवाओं का उपयोग वैज्ञानिक अनुशंसा के अनुसार ही करें, ताकि फसल को अधिकतम लाभ मिल सके और पर्यावरण पर भी नकारात्मक प्रभाव न पड़े। समय पर वैज्ञानिक उपाय अपनाकर लीची की फसल को सुरक्षित रखा जा सकता है। सही प्रबंधन से न केवल उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि फलों की गुणवत्ता भी बेहतर होगी, जिससे किसानों की आय में वृद्धि संभव है।
वर्तमान मौसम और कीट प्रकोप की स्थिति
लीची फसल बचाने का अलर्ट
वैज्ञानिकों की सलाह: समय पर करें नियंत्रण
पोषण प्रबंधन और गुणवत्ता सुधार
कीटों का बढ़ता खतरा, बचाव के लिए अपनाएं ये उपाय
अंतिम छिड़काव तुड़ाई से पहले
किसानों के लिए जरूरी सावधानियाँ
समय पर वैज्ञानिक उपाय अपनाकर लीची की गुणवत्ता और उत्पादन बढ़ाएं
- केवल अनुशंसित मात्रा का उपयोग करें
- बाग में हल्की सिंचाई से नमी बनाए रखें
- मास्क व दस्ताने जैसे सुरक्षा उपकरण अवश्य पहनें
समय रहते कर लें ये तैयारी
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