धान से नहीं हो रही कमाई तो परेशान ना हों किसान! अपनाएं वच की खेती, एक एकड़ से होगी ₹1 लाख की इनकम
Umang | Jun 08, 2026, 18:37 IST
किसानों की आय बढ़ाने और पारंपरिक खेती के विकल्प उपलब्ध कराने के उद्देश्य से आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में कम लागत वाली एक लाभकारी फसल की खेती, कटाई और प्रसंस्करण की जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि करीब 20 हजार रुपये की लागत से एक एकड़ में खेती कर लगभग एक लाख रुपये तक की शुद्ध आय अर्जित की जा सकती है।
खेत में किसानों को औषधीय खेती का प्रशिक्षण देती वन विभाग की टीम
परंपरागत खेती से होने वाली सीमित आय और बढ़ती लागत के बीच किसानों को वैकल्पिक और लाभकारी खेती की ओर प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड (वन विभाग) द्वारा धमतरी जिले के ग्राम राउतमुड़ा में सजीव वच विदोहन प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में धमतरी जिले के विभिन्न गांवों के अलावा आदिवासी अंचल नारायणपुर (अबूझमाड़) से आए किसानों ने भाग लिया और औषधीय पौधों की खेती से जुड़ी तकनीकी जानकारी प्राप्त की।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को औषधीय फसलों की खेती के प्रति जागरूक करना और उन्हें आय बढ़ाने के नए विकल्पों से जोड़ना था। प्रशिक्षण के दौरान किसानों को वच की खेती, उसकी कटाई, प्रसंस्करण और विपणन की प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बोर्ड के अध्यक्ष विकास मरकाम ने कहा कि औषधीय पौधों की खेती किसानों के लिए बेहतर आय का माध्यम बन सकती है। उन्होंने किसानों से कहा कि वे पारंपरिक खेती के साथ-साथ औषधीय फसलों की खेती अपनाकर शासन की योजनाओं का लाभ उठाएं। उन्होंने बताया कि औषधीय पौधों की मांग लगातार बढ़ रही है और किसान इस क्षेत्र में आगे बढ़कर अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत कर सकते हैं। मरकाम ने कहा कि बोर्ड का प्रयास है कि अधिक से अधिक किसानों को औषधीय खेती से जोड़ा जाए, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आय के नए अवसर विकसित हो सकें।
बोर्ड के उपाध्यक्ष अंजय शुक्ला ने कहा कि औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देने के लिए बोर्ड किसानों के साथ हर कदम पर खड़ा है। उन्होंने किसानों को भरोसा दिलाया कि खेती से लेकर विपणन तक की प्रक्रिया में उन्हें आवश्यक मार्गदर्शन और सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसानों को नई फसलों और आधुनिक तकनीकों के प्रति जागरूक करना समय की आवश्यकता है।
कार्यक्रम में बोर्ड के मुख्य कार्यपालन अधिकारी जे. ए. सी. एस. राव ने किसानों को पैडी डायवर्सन मॉडल की जानकारी देते हुए बताया कि धान की पारंपरिक खेती में बढ़ती लागत और कम लाभ को देखते हुए वच की खेती एक बेहतर विकल्प बनकर उभर रही है। उन्होंने बताया कि वच की खेती में लगभग 20 हजार रुपये प्रति एकड़ की लागत आती है और एक वर्ष में किसान एक एकड़ से करीब एक लाख रुपये तक की शुद्ध आय प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि औषधीय पौधों की खेती न केवल किसानों की आय बढ़ा सकती है, बल्कि कृषि क्षेत्र में विविधीकरण को भी बढ़ावा दे सकती है। इससे किसानों की पारंपरिक फसलों पर निर्भरता कम होगी और उन्हें अतिरिक्त आय का स्रोत मिलेगा।
प्रशिक्षण कार्यक्रम की खास बात यह रही कि किसानों को केवल सैद्धांतिक जानकारी ही नहीं दी गई, बल्कि खेत में जाकर वच की कटाई और प्रसंस्करण की पूरी प्रक्रिया का प्रदर्शन भी किया गया। किसानों को बताया गया कि वच की जड़ों को निकालने के लिए खेत में ट्रैक्टर से आड़ी-तिरछी जुताई की जाती है, जिससे जड़ें मिट्टी से बाहर आ जाती हैं। इसके बाद जड़ों से मिट्टी साफ कर उन्हें छायादार स्थान पर एकत्र किया जाता है। मुख्य जड़ से जुड़ी अतिरिक्त जड़ों को तेज धार वाले उपकरण से अलग किया जाता है और फिर मुख्य जड़ को 2 से 3 इंच के छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर सुखाने के लिए रखा जाता है। अच्छी तरह सूखने के बाद इन जड़ों को बिक्री के लिए तैयार किया जाता है।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में धमतरी जिले के ग्राम राउतमुड़ा और आसपास के गांवों के अलावा नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ क्षेत्र के कोहाकमेटा और किल्काड गांवों से भी किसान पहुंचे। कुल मिलाकर लगभग 50 किसानों ने कार्यक्रम में भाग लिया और औषधीय खेती से जुड़ी जानकारी हासिल की। कार्यक्रम में बोर्ड के अध्यक्ष विकास मरकाम, उपाध्यक्ष अंजय शुक्ला, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जे. ए. सी. एस. राव, औषधीय पौधों की खेती के सलाहकार डी. के. एस. चौहान तथा धमतरी के सलाहकार फकीरराम कोसरिया उपस्थित रहे।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के बाद बोर्ड के अध्यक्ष विकास मरकाम और उपाध्यक्ष अंजय शुक्ला ने धमतरी जिले के ग्राम पोतियाडीह पहुंचकर मां गायत्री स्व-सहायता समूह द्वारा की जा रही खस की खेती का निरीक्षण किया। समूह द्वारा दो एकड़ क्षेत्र में खस की खेती की जा रही है। निरीक्षण के दौरान समूह की महिलाओं ने बताया कि आगामी सप्ताह में खस की जड़ों की कटाई की जाएगी। महिलाओं के अनुसार इस खेती से उन्हें लगभग एक लाख रुपये की आय प्राप्त होने की उम्मीद है। बोर्ड के पदाधिकारियों ने समूह की महिलाओं से खेती से जुड़े अनुभवों की जानकारी ली और उन्हें आगे भी इस दिशा में कार्य करने के लिए प्रोत्साहित किया।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को औषधीय फसलों की खेती के प्रति जागरूक करना और उन्हें आय बढ़ाने के नए विकल्पों से जोड़ना था। प्रशिक्षण के दौरान किसानों को वच की खेती, उसकी कटाई, प्रसंस्करण और विपणन की प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
औषधीय पौधों की खेती अपनाने की अपील
किसानों को हरसंभव सहयोग देगा बोर्ड
एक एकड़ में 1 लाख रुपये तक शुद्ध आय की संभावना
छत्तीसगढ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड (छत्तीसगढ़ शासन, वन विभाग)
— CG Forest & Climate Change Department (@ForestCgGov) June 8, 2026
द्वारा सजीव वच विदोहन प्रशिक्षण धमतरी ग्राम राउतमुड़ा में आयोजित किया गया.....*
🌾 सजीव वच विदोहन प्रशिक्षण में धमतरी और आदिवासी अंचल नारायणपुर (अबूझमाड़) के ग्रामीण क्षेत्रों से किसानो… pic. twitter. com/J7nyFcJwfM