भारत की पहल को BRICS की मंज़ूरी, किसानों के अधिकारों के लिए बनेगा ग्लोबल फोरम, जानें क्या होगा काम
Umang | Jun 13, 2026, 16:14 IST
भारत की अध्यक्षता में इंदौर में आयोजित 16वीं BRICS कृषि मंत्रियों की बैठक में सदस्य देशों ने संयुक्त घोषणा पत्र को मंजूरी दी। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि किसानों के अधिकार, डिजिटल कृषि, कृषि अनुसंधान, खाद्य सुरक्षा, मत्स्य पालन और ग्रामीण आजीविका से जुड़ी कई नई पहलों पर सहमति बनी है, जिससे कृषि क्षेत्र को मजबूती मिलेगी।
फार्मर्स राइट्स को बढ़ावा देने के लिए BRICS ने उठाया बड़ा कदम
भारत की अध्यक्षता में मध्य प्रदेश के इंदौर में आयोजित 16वीं ब्रिक्स कृषि मंत्रियों की बैठक में सदस्य देशों ने संयुक्त घोषणा पत्र को मंजूरी देते हुए कृषि, खाद्य सुरक्षा और किसानों के हितों से जुड़ी कई महत्वपूर्ण पहलों पर सहमति जताई। बैठक में किसान-केंद्रित कृषि विकास, खाद्य एवं पोषण सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन के प्रति लचीली कृषि व्यवस्था और टिकाऊ कृषि प्रणालियों को मजबूत बनाने पर विशेष जोर दिया गया। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि इस वर्ष भारत को ब्रिक्स की अध्यक्षता का दायित्व मिला है, जो केवल गौरव का विषय नहीं बल्कि एक बड़ी जिम्मेदारी भी है। उन्होंने कहा कि विश्व के प्रमुख कृषि उत्पादक देशों में शामिल भारत ने इस जिम्मेदारी को पूरी गंभीरता के साथ निभाया है।
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि उन्हें प्रसन्नता है कि सदस्य देश बीज प्रणालियों में किसानों के अधिकारों के संरक्षण और संवर्धन के लिए ग्लोबल फोरम ऑन फार्मर्स राइट्स इन सीड सिस्टम्स की स्थापना पर सहमत हुए हैं। उन्होंने कहा कि यह मंच पारंपरिक ज्ञान, बीज विरासत और किसानों के योगदान को वैश्विक स्तर पर उचित सम्मान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। साथ ही यह किसानों के अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर सार्थक संवाद को आगे बढ़ाने का काम करेगा।
उन्होंने बताया कि कृषि आदानों, बीजों और आनुवंशिक संसाधनों के क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करने के लिए ब्रिक्स एग्रिन (BRICS AGRIN- Agro Inputs, Genetic Resources and Information Network) की स्थापना भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह नेटवर्क सदस्य देशों के बीच कृषि आदानों और आनुवंशिक संसाधनों से जुड़ी सूचनाओं के आदान-प्रदान, क्षमता निर्माण, तकनीकी सहयोग और साझेदारी को बढ़ावा देगा।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सदस्य देशों ने ब्रिक्स एग्रीकल्चरल रिसर्च प्लेटफॉर्म (BARP) को और अधिक मजबूत बनाते हुए उसे एक सशक्त 'नॉलेज टू एक्शन हब' के रूप में विकसित करने पर भी सहमति बनाई है। इससे कृषि अनुसंधान के नतीजों को सीधे किसानों तक पहुंचाने, नवाचारों के प्रसार और व्यावहारिक समाधान विकसित करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि बैठक में निष्पक्ष, समतामूलक, समावेशी और पारदर्शी बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था के प्रति सदस्य देशों ने अपनी प्रतिबद्धता भी दोहराई। साथ ही ब्रिक्स ग्रेन एक्सचेंज पहल पर चर्चा को आगे बढ़ाने के लिए भारत द्वारा आयोजित विशेष संवाद ने सदस्य देशों के बीच रचनात्मक विचार-विमर्श को नई गति दी है और इसके व्यावहारिक पहलुओं पर साझा समझ विकसित करने में योगदान दिया है।
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि खाद्यान्न अपव्यय में कमी, उन्नत पशुधन प्रौद्योगिकियों एवं चारा प्रणालियों तथा मत्स्य और जलीय कृषि विकास पर आयोजित तीन तकनीकी संवादों के निष्कर्षों को भी भविष्य की सहयोगात्मक पहलों में शामिल करने पर सहमति बनी है। उन्होंने कहा कि ये प्रयास खाद्य प्रणालियों की दक्षता बढ़ाने, पोषण सुरक्षा को मजबूत करने तथा किसानों और मत्स्य पालकों की आय बढ़ाने में सहायक होंगे। उन्होंने कहा कि दक्षिण-दक्षिण सहयोग, तकनीकी साझेदारी, क्षमता निर्माण, कौशल विकास तथा कृषि क्षेत्र में ज्ञान और अनुभव के आदान-प्रदान को मजबूत करने की साझा प्रतिबद्धता भी घोषणा पत्र में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। इससे सदस्य देशों के किसानों, विशेषकर छोटे एवं पारिवारिक किसानों, महिलाओं और युवाओं के लिए नए अवसर पैदा होंगे तथा कृषि क्षेत्र में समावेशी विकास को बढ़ावा मिलेगा।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मत्स्य पालन, पशुपालन और ग्रामीण आजीविका के क्षेत्र में सहयोग को नई गति देने के लिए भी कई महत्वपूर्ण सहमतियां बनी हैं। इसके अलावा जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए कृषि पारिस्थितिकी (Agroecology) और पुनर्योजी कृषि (Regenerative Agriculture) को बढ़ावा देने, डिजिटल कृषि नेटवर्क स्थापित करने तथा कृषि उत्पादकता बढ़ाने के लिए सदस्य देशों ने साझा प्रयासों पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि ये सभी पहलें ब्रिक्स देशों की कृषि और खाद्य प्रणालियों को अधिक लचीला, टिकाऊ और भविष्य की चुनौतियों का सामना करने में सक्षम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
किसानों के अधिकारों और बीज विरासत को मिलेगा वैश्विक मंच
उन्होंने बताया कि कृषि आदानों, बीजों और आनुवंशिक संसाधनों के क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करने के लिए ब्रिक्स एग्रिन (BRICS AGRIN- Agro Inputs, Genetic Resources and Information Network) की स्थापना भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह नेटवर्क सदस्य देशों के बीच कृषि आदानों और आनुवंशिक संसाधनों से जुड़ी सूचनाओं के आदान-प्रदान, क्षमता निर्माण, तकनीकी सहयोग और साझेदारी को बढ़ावा देगा।
BRICS कृषि सहयोग को नई दिशा मिली है।
— Shivraj Singh Chouhan (@ChouhanShivraj) June 13, 2026
किसानों के अधिकारों, पारंपरिक ज्ञान और बीज विरासत के संरक्षण हेतु Global Forum on Farmers' Rights in Seed Systems की स्थापना पर सहमति बनी है।
साथ ही, BRICS Agro Inputs, Genetic Resources and Information Network के गठन, BRICS Agricultural… pic. twitter. com/vrd30lsK7A