Census 2027: गाँव-गाँव शुरू हुई मकानों की गिनती, 22 मई से 20 जून 2026 तक इस राज्य में होगी मकान सूचीकरण प्रक्रिया, जानिए ग्रामीण परिवारों के लिए क्यों जरूरी?
Gaon Connection | May 17, 2026, 12:45 IST
देशभर में 2027 की जनगणना की तैयारियाँ ज़ोरों पर हैं। राजस्थान, महाराष्ट्र, झारखंड, दिल्ली और मेघालय जैसे राज्यों में मकानों की गिनती का काम शुरू हो गया है। उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में प्रगणक घर-घर जाकर जानकारी जुटा रहे हैं। यह जनगणना डिजिटल होगी और लोग स्व-गणना भी कर सकेंगे। इस डेटा से गाँवों की योजनाओं को दिशा मिलेगी।
जनगणना 2027-उत्तर प्रदेश में 22 मई से 20 जून 2026 तक मकान सूचीकरण का फील्ड कार्य
Census 2027 house listing survey started in villages: देश में जनगणना 2027 की तैयारियाँ तेज हो गई हैं और अब इसका असर गाँवों तक साफ दिखाई देने लगा है। केंद्र सरकार ने राजस्थान, मेघालय, महाराष्ट्र, झारखंड और दिल्ली के MCD क्षेत्र में मकान सूचीकरण और मकानों की गणना का फील्ड कार्य शुरू कर दिया है। वहीं उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में प्रगणक घर-घर जाकर जानकारी जुटा रहे हैं। गृह मंत्रालय की तरफ से जाकी सूचना के अनुसार इन आंकड़ों से आने वाले वर्षों में गाँवों की योजनाएं, राशन, सड़क, बिजली, पानी, आवास और अन्य सरकारी सुविधाओं का आधार भी यही डेटा बनेगा।
इस बार की जनगणना पहले से अलग और ज्यादा डिजिटल होगी। सरकार ने “स्व-गणना” यानी Self Enumeration की सुविधा शुरू की है, जिसके जरिए लोग खुद ऑनलाइन पोर्टल पर अपनी जानकारी दर्ज कर सकते हैं। अब तक देशभर में 1.44 करोड़ से अधिक परिवार स्व-गणना पूरी कर चुके हैं। उत्तर प्रदेश में यह सुविधा 21 मई तक उपलब्ध रहेगी, जबकि गुजरात, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और पुडुचेरी में आज से इसकी शुरुआत हुई है।
इसके साथ ही गाँवों और कस्बों में प्रगणक मोबाइल एप्लिकेशन की मदद से घर-घर जाकर जानकारी एकत्र कर रहे हैं। इसमें परिवार के सदस्यों की संख्या, मकान की स्थिति, शौचालय, पानी, बिजली जैसी सुविधाएं और परिवार के पास उपलब्ध संसाधनों से जुड़ी जानकारी दर्ज की जा रही है।
ग्रामीण भारत के लिए जनगणना बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है क्योंकि सरकार की अधिकांश योजनाएं इन्हीं आंकड़ों के आधार पर तय होती हैं। किसी गाँव में कितने परिवार रहते हैं, कितने लोगों के पास पक्का मकान नहीं है, कितने घरों में बिजली या पानी की सुविधा नहीं है- ये सारी जानकारी सरकारी योजनाओं की दिशा तय करती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सही आंकड़े मिलने से गाँवों में सड़क, स्वास्थ्य केंद्र, स्कूल, आंगनवाड़ी, राशन वितरण और आवास योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन संभव हो पाता है। यही वजह है कि सरकार लगातार लोगों से अपील कर रही है कि वे प्रगणकों को सही जानकारी दें और इस प्रक्रिया में पूरा सहयोग करें।
फिलहाल राजस्थान, मेघालय, महाराष्ट्र, झारखंड और दिल्ली के MCD क्षेत्र में फील्ड कार्य शुरू हो चुका है। इसके अलावा आंध्र प्रदेश, बिहार, हरियाणा, मध्य प्रदेश, पंजाब, तेलंगाना, उत्तराखंड समेत कई राज्यों में घर-घर सर्वे जारी है। इससे पहले ओडिशा, सिक्किम, मिजोरम, अंडमान-निकोबार और लक्षद्वीप में यह चरण पूरा किया जा चुका है। उत्तर प्रदेश में 22 मई से 20 जून 2026 तक मकान सूचीकरण का फील्ड कार्य किया जाएगा। यानी आने वाले दिनों में गाँवों में जनगणना कर्मियों की गतिविधियां और तेज होने वाली हैं।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि जनगणना अधिनियम 1948 के तहत जुटाई गई सभी जानकारियां पूरी तरह गोपनीय रखी जाती हैं। इनका उपयोग केवल सांख्यिकीय विश्लेषण और विकास योजनाओं के लिए किया जाएगा। किसी भी व्यक्ति की निजी जानकारी सार्वजनिक नहीं की जाएगी। ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों से अपील की गई है कि वे जनगणना टीम को सही जानकारी दें ताकि गाँवों की वास्तविक जरूरतें सामने आ सकें और योजनाओं का लाभ सही लोगों तक पहुंच सके।
पहली बार डिजिटल तरीके से हो रही जनगणना
इसके साथ ही गाँवों और कस्बों में प्रगणक मोबाइल एप्लिकेशन की मदद से घर-घर जाकर जानकारी एकत्र कर रहे हैं। इसमें परिवार के सदस्यों की संख्या, मकान की स्थिति, शौचालय, पानी, बिजली जैसी सुविधाएं और परिवार के पास उपलब्ध संसाधनों से जुड़ी जानकारी दर्ज की जा रही है।
गाँवों के लिए क्यों जरूरी है जनगणना?
विशेषज्ञों का कहना है कि सही आंकड़े मिलने से गाँवों में सड़क, स्वास्थ्य केंद्र, स्कूल, आंगनवाड़ी, राशन वितरण और आवास योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन संभव हो पाता है। यही वजह है कि सरकार लगातार लोगों से अपील कर रही है कि वे प्रगणकों को सही जानकारी दें और इस प्रक्रिया में पूरा सहयोग करें।