रिकॉर्ड पैदावार के बावजूद चना हुआ महंगा, एक महीने में 9% से ज़्यादा उछले दाम; जानिए वजह
Gaon Connection | Jun 03, 2026, 15:32 IST
देश में रिकॉर्ड उत्पादन और पर्याप्त बफर स्टॉक के बावजूद चने के दाम पिछले एक महीने में 9 प्रतिशत से अधिक बढ़ गए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार सरकार की बड़े पैमाने पर खरीद और आयात में कमी इसके प्रमुख कारण हैं। बाजार से 21 लाख टन चना बाहर होने से आपूर्ति घटी है, जबकि मानसून और त्योहारी सीजन में मांग बढ़ने की उम्मीद है।
चना बाजार में तेजी का दौर
देश में इस वर्ष चने का रिकॉर्ड उत्पादन होने के बावजूद इसकी कीमतों में लगातार तेजी देखी जा रही है। पिछले एक महीने में चने के दाम 9 प्रतिशत से अधिक बढ़ गए हैं, जबकि पिछले साल की तुलना में कीमतों में करीब 4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। दिलचस्प बात यह है कि यह तेजी ऐसे समय आई है जब देश में दालों का उत्पादन रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा है और सरकार के पास पिछले तीन वर्षों का सबसे बड़ा बफर स्टॉक भी मौजूद है। विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े पैमाने पर सरकारी खरीद और आयात में कमी के कारण बाजार में चने की उपलब्धता घटी है, जिससे कीमतों को समर्थन मिला है। आने वाले मानसून और त्योहारी सीजन में चना और बेसन की मांग बढ़ने की संभावना के चलते व्यापारियों को दाम और मजबूत रहने की उम्मीद है।
इंडियन पल्सेज एंड ग्रेन्स एसोसिएशन (आईपीजीए) के अध्यक्ष बिमल कोठारी के अनुसार, अधिकांश दालों की कीमतें स्थिर हैं या न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के आसपास बनी हुई हैं। लेकिन चने के दामों में हाल के सप्ताहों में तेजी आई है क्योंकि सरकार ने बड़े पैमाने पर खरीद की है। इससे करीब 21 लाख टन चना खुले बाजार से बाहर हो गया है, जिसका सीधा असर कीमतों पर पड़ा है। उद्योग से जुड़े जानकारों का कहना है कि सरकार ने कुल उत्पादन का लगभग 16 प्रतिशत हिस्सा खरीद लिया है, जिससे बाजार में आपूर्ति अपेक्षाकृत कम हो गई है।
सरकारी अनुमान के अनुसार वर्ष 2025-26 में देश का कुल खाद्यान्न उत्पादन 37.66 करोड़ टन रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 5.2 प्रतिशत अधिक है। वहीं दालों का उत्पादन रिकॉर्ड 274.09 लाख टन रहने का अनुमान है, जो एक साल पहले की तुलना में 6.7 प्रतिशत ज्यादा है। चना उत्पादन में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 2025-26 में चने का उत्पादन बढ़कर 125.14 लाख टन तक पहुंच सकता है, जबकि पिछले वर्ष यह 111 लाख टन था। यानी उत्पादन में करीब 12.6 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है।
हालांकि, बाजार से जुड़े कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि वास्तविक उत्पादन सरकारी अनुमान से कम हो सकता है। आईपीजीए के मानद कोषाध्यक्ष सतीश उपाध्याय का कहना है कि यदि उत्पादन वास्तव में इतना अधिक होता तो कीमतों में तेजी आने के बाद मंडियों में आवक भी बढ़ती। लेकिन ऐसा देखने को नहीं मिला है, जिससे उत्पादन के अनुमान पर सवाल खड़े होते हैं।
व्यापारियों का कहना है कि मानसून और आगामी त्योहारी सीजन के दौरान चना और बेसन की खपत बढ़ती है। ऐसे में यदि बाजार में आपूर्ति सीमित रही तो आने वाले समय में चने के दाम और मजबूत रह सकते हैं।