चावल के बाद अब लाल मिर्च पर चीन की सख्ती, तीन भारतीय निर्यातकों पर लगाया प्रतिबंध, कीटनाशक अवशेष मिलने का दावा
Gaon Connection | Jun 11, 2026, 17:03 IST
चीन ने मेथामिडोफोस कीटनाशक अवशेष अधिक मिलने का दावा करते हुए भारत की कुछ लाल मिर्च खेपों को खारिज कर दिया है और तीन भारतीय निर्यातकों से आयात निलंबित कर दिया है। चीन भारत की लाल मिर्च का सबसे बड़ा खरीदार है। इसे खाद्य सुरक्षा मानकों पर बढ़ती वैश्विक सख्ती का संकेत बताया जा रहा है।
भारत के मिर्च निर्यात पर संकट!
भारतीय कृषि उत्पादों पर चीन की सख्ती बढ़ती नजर आ रही है। चावल की खेपों पर आपत्ति जताने के बाद अब चीन ने भारतीय सूखी लाल मिर्च के कुछ निर्यातकों पर कार्रवाई की है। चीन ने कीटनाशक अवशेषों की अधिक मात्रा मिलने का दावा करते हुए भारत की कम से कम तीन लाल मिर्च खेपों को खारिज कर दिया है और तीन भारतीय निर्यातक कंपनियों से आयात पर अस्थायी रोक लगा दी है। चीन भारत की सूखी लाल मिर्च का सबसे बड़ा खरीदार है। ऐसे में इस कार्रवाई ने निर्यातकों की चिंता बढ़ा दी है, खासकर उस समय जब चीन से मांग पहले ही कुछ कमजोर पड़ने लगी है।
'बिजनेस लाइन' की एक रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने भारतीय लाल मिर्च में मेथामिडोफोस (Methamidophos) नामक कीटनाशक अवशेष निर्धारित सीमा से अधिक पाए जाने का आरोप लगाया है। माना जाता है कि यह रसायन तंत्रिका तंत्र पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। इसके बाद चीन ने तीन भारतीय कंपनियों से मिर्च आयात निलंबित कर दिया।
भारत से निर्यात होने वाली लाल मिर्च का एक बड़ा हिस्सा चीन जाता है। चीन मुख्य रूप से 'तेजा' किस्म की मिर्च खरीदता है, जिसका उपयोग ओलियोरेजिन (Oleoresin) निकालने के लिए किया जाता है। आमतौर पर भारत से चीन को हर साल 1.5 लाख से 1.9 लाख टन लाल मिर्च का निर्यात होता है। वर्ष 2024-25 में चीन को मिर्च निर्यात 31 प्रतिशत बढ़कर 2.36 लाख टन तक पहुंच गया था। इसी अवधि में भारत का कुल लाल मिर्च निर्यात 19 प्रतिशत बढ़कर 7.15 लाख टन रहा।
दक्षिण एशिया बायोटेक्नोलॉजी सेंटर (SABC) के संस्थापक निदेशक भागीरथ चौधरी ने कहा कि निर्यातित मिर्च में मेथामिडोफोस का पाया जाना चिंता का विषय है। हालांकि यह रसायन भारत में अलग से कृषि उपयोग के लिए पंजीकृत नहीं है लेकिन यह एसिफेट (Acephate) नामक कीटनाशक के अपघटन से उत्पन्न हो सकता है जिसका इस्तेमाल कुछ मिर्च उत्पादक किसान करते हैं।
यह मामला केवल एक खेप के खारिज होने तक सीमित नहीं है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में खाद्य सुरक्षा और कीटनाशक अवशेष मानकों को लेकर बढ़ती सख्ती का संकेत भी है। हाल के दिनों में चावल और मिर्च जैसी भारतीय कृषि उपज पर चीन की कड़ी जांच इसी दिशा में इशारा करती है। वर्ष 2024-25 में चीन ने भारत से रिकॉर्ड मात्रा में लाल मिर्च खरीदी थी। कम कीमतों का लाभ उठाते हुए उसने बड़े पैमाने पर भंडारण भी किया। हालांकि मौजूदा वर्ष में ऊंची कीमतों और कम उत्पादन के कारण मांग में कुछ नरमी देखी जा रही है।
रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल अब तक भारत से चीन को करीब 3,000 कंटेनर लाल मिर्च भेजी गई है। इनमें से 10 से 15 प्रतिशत खेपों में अधिक नमी और कीटनाशक अवशेष जैसी गुणवत्ता संबंधी समस्याएं सामने आई हैं। प्रभावित खेपों को वापस नहीं भेजा गया है। इसके बजाय चीनी आयातक गुणवत्ता संबंधी कमियों के आधार पर कीमत में छूट मांग रहे हैं। ये लेनदेन मुख्य रूप से साबुत मिर्च के व्यापार से जुड़े हैं और बड़े निर्यातक इसमें शामिल नहीं हैं।
चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा पहले से ही काफी बड़ा है। ऐसे में कृषि निर्यात के लिए बाजार पहुंच बनाए रखना रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। इसके लिए किसानों में जागरूकता बढ़ाने, कीटनाशकों के सुरक्षित उपयोग, अवशेषों की नियमित निगरानी और टिकाऊ कीट प्रबंधन पद्धतियों को बढ़ावा देने की जरूरत है।
वैश्विक मसाला बाजार में भारत की प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त बनाए रखने के लिए पूरी मूल्य श्रृंखला में गुणवत्ता मानकों का सख्ती से पालन करना आवश्यक होगा।
'बिजनेस लाइन' की एक रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने भारतीय लाल मिर्च में मेथामिडोफोस (Methamidophos) नामक कीटनाशक अवशेष निर्धारित सीमा से अधिक पाए जाने का आरोप लगाया है। माना जाता है कि यह रसायन तंत्रिका तंत्र पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। इसके बाद चीन ने तीन भारतीय कंपनियों से मिर्च आयात निलंबित कर दिया।
कितना लाल मिर्च खरीदता है चीन
दक्षिण एशिया बायोटेक्नोलॉजी सेंटर (SABC) के संस्थापक निदेशक भागीरथ चौधरी ने कहा कि निर्यातित मिर्च में मेथामिडोफोस का पाया जाना चिंता का विषय है। हालांकि यह रसायन भारत में अलग से कृषि उपयोग के लिए पंजीकृत नहीं है लेकिन यह एसिफेट (Acephate) नामक कीटनाशक के अपघटन से उत्पन्न हो सकता है जिसका इस्तेमाल कुछ मिर्च उत्पादक किसान करते हैं।
खाद्य सुरक्षा मानकों पर बढ़ी निगरानी
3,000 कंटेनर भेजे गए, कुछ में गुणवत्ता संबंधी समस्या
भारत के लिए चेतावनी
वैश्विक मसाला बाजार में भारत की प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त बनाए रखने के लिए पूरी मूल्य श्रृंखला में गुणवत्ता मानकों का सख्ती से पालन करना आवश्यक होगा।