चितकारा यूनिवर्सिटी में 24 जुलाई को सजेगा ‘द नीलेश मिसरा फेस्टिवल’; कहानी, संगीत और सिनेमा का होगा यादगार संगम
Gaon Connection | Jul 23, 2026, 10:48 IST
24 जुलाई 2026 को पंजाब की चितकारा यूनिवर्सिटी में आयोजित होने वाले पहले ‘द नीलेश मिसरा फेस्टिवल’ में स्टोरीटेलिंग मास्टरक्लास, मोबाइल फ़िल्ममेकिंग वर्कशॉप, फ़िल्म ‘कूद’ और अपकमिंग फ़िल्म ‘द लास्ट बैट्समैन’ की स्क्रीनिंग, प्रश्नोत्तर सत्र, ‘द स्लो माइक’, लाइव परफ़ॉर्मेंस और पुस्तक स्टॉल जैसे कई आकर्षण होंगे। इस फेस्टिवल में युवा और रचनात्मक क्षेत्र से जुड़े लोगों को कहानी, संगीत और सिनेमा की दुनिया को करीब से जानने और सीखने का अवसर मिलेगा।
‘द नीलेश मिसरा फेस्टिवल’
अपनी कहानियों से लाखों श्रोताओं के दिलों तक पहुँच बनाने वाले मशहूर लेखक, गीतकार और कहानीकार नीलेश मिसरा अब पंजाब में अपनी रचनात्मक दुनिया का रंग बिखेरने जा रहे हैं। 24 जुलाई 2026 को चितकारा यूनिवर्सिटी में पहला ‘द नीलेश मिसरा फेस्टिवल’ होने जा रहा है। इस फेस्टिवल में साहित्य, कहानी, संगीत और सिनेमा के मेल का अनूठा आयोजन होगा। इस कार्यक्रम में युवा, विद्यार्थी और रचनात्मक क्षेत्र में रुचि रखने वाले लोग न सिर्फ़ उन्हें सुन सकेंगे, बल्कि उनसे सीखने और संवाद करने का अवसर भी मिलेगा।
नीलेश मिसरा लंबे समय से कहानी कहने की अपनी अनोखी शैली के लिए जाने जाते हैं। रेडियो से लेकर साहित्य, गीत लेखन और फ़िल्मों तक उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई है। यही वजह है कि यह फेस्टिवल केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि रचनात्मक सोच, नई प्रतिभाओं और कला के विभिन्न आयामों को एक मंच पर लाने का प्रयास भी होगा।
'द नीलेश मिसरा फेस्टिवल' का आयोजन 24 जुलाई 2026 को पंजाब की चितकारा यूनिवर्सिटी में किया जाएगा। विश्वविद्यालय परिसर में होने वाले इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों, साहित्य प्रेमियों और कला जगत से जुड़े लोगों के शामिल होने की उम्मीद है। इस फेस्टिवल में लोगों को नीलेश मिसरा से लाइव कहानियाँ सुनने का मौका मिलेगा।
फेस्टिवल में प्रतिभागियों के लिए स्टोरीटेलिंग मास्टरक्लास और फ़िल्ममेकिंग वर्कशॉप का आयोजन किया जाएगा। इसमें नीलेश मिसरा प्रतिभागियों को कहानी कहने की कला और प्रभावशाली ढंग से अपनी बात प्रस्तुत करने के तरीके बताएँगे।
इसके बाद डायरेक्टर ऑफ फोटोग्रॉफी अभिषेक वर्मा और फ़िल्ममेकर रितम नंदी मोबाइल फ़िल्ममेकिंग वर्कशॉप लेंगे। इस सत्र में प्रतिभागियों को मोबाइल के ज़रिये फ़िल्म निर्माण की प्रक्रिया और उससे जुड़ी बारीकियों से परिचित कराया जाएगा। इन सत्रों में कहानी कहने की कला, विचारों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने और फ़िल्म निर्माण की प्रक्रिया से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा होगी। यह सत्र विशेष रूप से उन युवाओं के लिए उपयोगी होंगे, जो लेखन, कंटेंट क्रिएशन या सिनेमा के क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहते हैं।
कार्यक्रम में फ़िल्म स्क्रीनिंग, ओपन माइक और लाइव म्यूज़िक परफ़ॉर्मेंस भी आयोजित किए जाएंगे। फेस्टिवल में नीलेश मिसरा की फ़िल्म ‘कूद’ और उनकी अप-कमिंग फिल्म ‘द लास्ट बैट्समैन' की स्क्रीनिंग की जाएगी। इसके बाद फ़िल्म की टीम के साथ प्रश्नोत्तर (Q&A) सत्र होगा, जिसमें दर्शकों को सवाल पूछने का अवसर मिलेगा। इसके ज़रिये प्रतिभागियों को मनोरंजन के साथ अपनी प्रतिभा दिखाने और रचनात्मक माहौल का हिस्सा बनने का अवसर मिलेगा। फेस्टिवल में कहानी, संगीत और सिनेमा के विभिन्न रंग एक ही मंच पर देखने को मिलेंगे।
फेस्टिवल में ‘द स्लो माइक’ का भी आयोजन किया जाएगा। इसमें विद्यार्थियों को नीलेश मिसरा के सामने अपनी कहानी, कविता या अन्य रचनात्मक प्रस्तुति देने का अवसर मिलेगा। प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र भी दिए जाएँगे।
कार्यक्रम का समापन नीलेश मिसरा की लाइव परफ़ॉर्मेंस से होगा। इस दौरान वह अपनी कहानियाँ और गीत प्रस्तुत करेंगे। इसके अलावा फेस्टिवल परिसर में पुस्तकों के स्टॉल भी लगाए जाएँगे, जहाँ आगंतुक नीलेश मिसरा की किताबें ख़रीद सकेंगे।
नीलेश मिसरा ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत वर्ष 2003 में फिल्म जिस्म के गीत "जादू है नशा है" और "चलो तुमको लेकर चलें" से की। इसके बाद रोग, वो लम्हे, गैंगस्टर, हॉलिडे और फाइट क्लब जैसी फिल्मों में उन्होंने संवेदनशील और भावनात्मक गीत लिखकर अपनी अलग पहचान बनाई। उन्होंने सिकंदर, वन्स अपॉन ए टाइम इन मुंबई, अंजाना अंजानी, दिल तो बच्चा है जी, रेडी और बॉडीगार्ड जैसी फिल्मों के लिए भी गीत लिखे।
वर्ष 2012 के बाद एजेंट विनोद, शंघाई, एक था टाइगर, बर्फी!, चश्मे बद्दूर, शूटआउट एट वडाला, आई, मी और मैं तथा बजरंगी भाईजान जैसी फिल्मों में उनके गीतों ने भावनात्मक गहराई और अलग शैली की छाप छोड़ी। इसके बाद जग्गा जासूस (2017), पगलैट (2021) और मेट्रो... इन दिनों (2025) के गीतों के माध्यम से उन्होंने प्रेम, बिछड़न, यादों और जीवन के संवेदनशील पहलुओं को शब्दों में पिरोते हुए हिंदी सिनेमा में अपनी पहचान लगातार बरकरार रखी।
नीलेश मिसरा लंबे समय से कहानी कहने की अपनी अनोखी शैली के लिए जाने जाते हैं। रेडियो से लेकर साहित्य, गीत लेखन और फ़िल्मों तक उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई है। यही वजह है कि यह फेस्टिवल केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि रचनात्मक सोच, नई प्रतिभाओं और कला के विभिन्न आयामों को एक मंच पर लाने का प्रयास भी होगा।
24 जुलाई को होगा आयोजन
स्टोरीटेलिंग और फ़िल्ममेकिंग की बारीकियाँ सीखने का मिलेगा मौका
इसके बाद डायरेक्टर ऑफ फोटोग्रॉफी अभिषेक वर्मा और फ़िल्ममेकर रितम नंदी मोबाइल फ़िल्ममेकिंग वर्कशॉप लेंगे। इस सत्र में प्रतिभागियों को मोबाइल के ज़रिये फ़िल्म निर्माण की प्रक्रिया और उससे जुड़ी बारीकियों से परिचित कराया जाएगा। इन सत्रों में कहानी कहने की कला, विचारों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने और फ़िल्म निर्माण की प्रक्रिया से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा होगी। यह सत्र विशेष रूप से उन युवाओं के लिए उपयोगी होंगे, जो लेखन, कंटेंट क्रिएशन या सिनेमा के क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहते हैं।
फ़िल्म स्क्रीनिंग, ओपन माइक और लाइव म्यूज़िक से सजेगा फेस्टिवल
‘द स्लो माइक’ में छात्रों को मिलेगा मंच
कार्यक्रम का समापन नीलेश मिसरा की लाइव परफ़ॉर्मेंस से होगा। इस दौरान वह अपनी कहानियाँ और गीत प्रस्तुत करेंगे। इसके अलावा फेस्टिवल परिसर में पुस्तकों के स्टॉल भी लगाए जाएँगे, जहाँ आगंतुक नीलेश मिसरा की किताबें ख़रीद सकेंगे।
नीलेश मिसरा का फिल्मी करियर
वर्ष 2012 के बाद एजेंट विनोद, शंघाई, एक था टाइगर, बर्फी!, चश्मे बद्दूर, शूटआउट एट वडाला, आई, मी और मैं तथा बजरंगी भाईजान जैसी फिल्मों में उनके गीतों ने भावनात्मक गहराई और अलग शैली की छाप छोड़ी। इसके बाद जग्गा जासूस (2017), पगलैट (2021) और मेट्रो... इन दिनों (2025) के गीतों के माध्यम से उन्होंने प्रेम, बिछड़न, यादों और जीवन के संवेदनशील पहलुओं को शब्दों में पिरोते हुए हिंदी सिनेमा में अपनी पहचान लगातार बरकरार रखी।