Gobardhan: गोबर से बनेगी CNG और PNG, सरकार की नई योजना से किसानों को मिलेगा अतिरिक्त आय का मौका
Mansi | Aug 07, 2026, 12:18 IST
गोबरधन योजना के तहत बायोगैस उत्पादन में दस गुना वृद्धि लाई जाएगी। इससे देश की ऊर्जा सुरक्षा सुदृढ़ होगी और आयातित गैस पर निर्भरता कम होगी। सीबीजी का सीएनजी और पीएनजी में मिलाना अनिवार्य होगा, जिससे किसानों को गोबर और कृषि अवशेषों से न केवल अधिकतम लाभ मिलेगा, बल्कि इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पर्यावरण की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।
गोबर, पराली और जैविक कचरे से बनेगी CBG, किसानों की आय और ग्रामीण रोजगार को मिलेगा बढ़ावा
गोबर, फसल अवशेष और जैविक कचरा अब सिर्फ बेकार नहीं रहेगा, बल्कि इससे बनने वाली बायोगैस किसानों की आय बढ़ाने के साथ CNG और PNG की आपूर्ति का भी हिस्सा बनेगी। केंद्र सरकार ने इसी उद्देश्य से 23,731 करोड़ रुपये की गोबरधन (राष्ट्रीय सर्कुलर बायो-एनर्जी) योजना को मंजूरी दी है।
सरकार का कहना है कि इस योजना के जरिए देश में कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) का उत्पादन मौजूदा स्तर से लगभग 10 गुना तक बढ़ाया जाएगा। इससे स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिलने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार, जैविक कचरे का बेहतर प्रबंधन और किसानों के लिए अतिरिक्त आय के अवसर भी बढ़ने की उम्मीद है।
भारत अपनी प्राकृतिक गैस की जरूरतों का लगभग 50 % आयात करता है। सरकार का कहना है कि घरेलू स्तर पर CBG उत्पादन बढ़ने से आयातित गैस पर निर्भरता कम होगी और ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी। हाल के वर्षों में वैश्विक परिस्थितियों और ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े जोखिमों ने भी स्वदेशी ऊर्जा स्रोतों के महत्व को बढ़ाया है।
योजना के तहत गोबर, फसल अवशेष, चीनी मिलों से निकलने वाला प्रेसमड, नगर निकायों के जैविक कचरे और अन्य बायोमास से कंप्रेस्ड बायोगैस तैयार की जाएगी। इससे खेतों में पराली जलाने जैसी समस्याओं को कम करने, जैविक कचरे के बेहतर प्रबंधन और जैविक खाद के उत्पादन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
सरकार के अनुसार, सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) कंपनियों के लिए निर्धारित लक्ष्य के अनुसार सीबीजी खरीदना अनिवार्य किया जाएगा। CNG (परिवहन) और PNG (घरेलू) क्षेत्रों में 2026-27 में 3 %, 2027-28 में 4 % और 2028-29 से 5 % तक सीबीजी ब्लेंडिंग लागू होगी। इसका उद्देश्य स्वच्छ ईंधन का उपयोग बढ़ाना और गैस के घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहित करना है।
सरकार के अनुसार, यदि किसान गोबर और कृषि अवशेष सीबीजी संयंत्रों तक पहुंचाते हैं तो उन्हें अतिरिक्त आय का स्रोत मिल सकता है। वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में नए सीबीजी संयंत्र लगने से परिवहन, कच्चे माल की आपूर्ति, संयंत्र संचालन और जैविक खाद उत्पादन जैसे क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं। सरकार ने CBG उत्पादकों के लिए 2,110 रुपये प्रति एमएमबीटीयू (लगभग 105 रुपये प्रति किलोग्राम) की स्थिर कीमत तय की है। यह व्यवस्था कम से कम 10 वर्षों तक लागू रहेगी, जिससे निवेशकों और उत्पादकों को आय को लेकर अधिक निश्चितता मिल सके।
योजना के तहत नए ग्रीनफील्ड सीबीजी संयंत्रों को प्रति टन प्रतिदिन (TPD) क्षमता पर 2 करोड़ रुपये तक की पूंजी सहायता मिलेगी। एमएसएमई आधारित परियोजनाओं के लिए 85 % तक ऋण गारंटी की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही सीबीजी संयंत्रों को गैस पाइपलाइन नेटवर्क से जोड़ने और जिला स्तर पर CBG इकोसिस्टम चैलेंज फंड के जरिए स्थानीय परियोजनाओं को बढ़ावा देने की भी व्यवस्था की गई है।
सरकार के अनुसार, SATAT, मार्केट डेवलपमेंट असिस्टेंस (MDA), बायोमास एग्रीगेशन मशीनरी (BAM), पाइपलाइन इंफ्रास्ट्रक्चर और राष्ट्रीय बायोएनर्जी कार्यक्रम जैसी पहलों के जरिए देश में 217 सीबीजी संयंत्र संचालित हो रहे हैं, जबकि 339 संयंत्र निर्माणाधीन हैं। सरकार का कहना है कि नई गोबरधन योजना इन सभी प्रयासों को एकीकृत ढांचे में आगे बढ़ाएगी।
सरकार का अनुमान है कि योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से प्राकृतिक गैस के आयात पर निर्भरता घटेगी और विदेशी मुद्रा की बचत होगी। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, जैविक खाद का उत्पादन बढ़ेगा और जैविक कचरे का वैज्ञानिक तरीके से उपयोग संभव होगा। अगर इस योजना का प्रभावी क्रियान्वयन होता है तो गोबर और कृषि अवशेष किसानों के लिए केवल अपशिष्ट नहीं, बल्कि आय का नया स्रोत बन सकते हैं। इससे स्वच्छ ऊर्जा, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पर्यावरण संरक्षण—तीनों क्षेत्रों में सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकता है।
सरकार का कहना है कि इस योजना के जरिए देश में कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) का उत्पादन मौजूदा स्तर से लगभग 10 गुना तक बढ़ाया जाएगा। इससे स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिलने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार, जैविक कचरे का बेहतर प्रबंधन और किसानों के लिए अतिरिक्त आय के अवसर भी बढ़ने की उम्मीद है।