Climate Risk Index 2025: बढ़ते जलवायु संकट ने बढ़ाई दुनिया की चिंता, भारत भी बड़े खतरे वाले देशों में शामिल

Preeti Nahar | May 27, 2026, 19:24 IST
Share
Germanwatch की Climate Risk Index 2025 रिपोर्ट के अनुसार 1993 से 2022 के बीच दुनिया में 9,400 से ज्यादा चरम मौसम घटनाएं दर्ज हुईं, जिनमें लाखों लोगों की मौत हुई और ट्रिलियन डॉलर का आर्थिक नुकसान हुआ। रिपोर्ट बताती है कि भारत में बाढ़, लू, सूखा और अनियमित मानसून जैसी घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं, जिसका सबसे ज्यादा असर किसानों, ग्रामीण इलाकों और जल संसाधनों पर पड़ रहा है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में जलवायु संकट और गंभीर हो सकता है।
बढ़ते जलवायु संकट ने बढ़ाई दुनिया की चिंता
बढ़ते जलवायु संकट ने बढ़ाई दुनिया की चिंता
दुनियाभर में बढ़ते तापमान, बाढ़, सूखा और चक्रवात जैसी घटनाओं ने जलवायु संकट को और गंभीर बना दिया है। Germanwatch की Climate Risk Index 2025 रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि पिछले 30 वर्षों में चरम मौसम घटनाओं से दुनिया को भारी जान-माल का नुकसान हुआ है। रिपोर्ट में भारत को भी उन देशों में शामिल किया गया है जो लगातार जलवायु परिवर्तन का गंभीर असर झेल रहे हैं।

क्या कहती है Climate Risk Index 2025 रिपोर्ट?

सबसे अधिक प्रभावित देशों की लिस्ट
सबसे अधिक प्रभावित देशों की लिस्ट
दुनियाभर में बढ़ती गर्मी, बाढ़, सूखा, चक्रवात और जंगलों में आग अब सिर्फ मौसम की सामान्य घटनाएं नहीं रह गई हैं, बल्कि ये जलवायु परिवर्तन की गंभीर चेतावनी बन चुकी हैं। पिछले 30 वर्षों में बेमौसम घटनाओं ने दुनिया को भारी नुकसान पहुंचाया है।

रिपोर्ट के मुताबिक 1993 से 2022 के बीच दुनिया में 9,400 से ज्यादा असामान्य मौसम घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें 7.65 लाख से अधिक लोगों की मौत हुई और करीब 4.2 ट्रिलियन डॉलर का आर्थिक नुकसान हुआ।

बाढ़ और चक्रवातों से लोग हो रहे बेघर

कहीं बाढ़ और कहीं चक्रवात
कहीं बाढ़ और कहीं चक्रवात
रिपोर्ट बताती है कि जलवायु संकट का असर अब हर महाद्वीप में तेजी से दिखाई दे रहा है। कहीं रिकॉर्ड तोड़ हीटवेव लोगों की जान ले रही हैं, तो कहीं बाढ़ और चक्रवात लाखों लोगों को बेघर कर रहे हैं। Germanwatch के अनुसार अब असामान्य मौसम की घटनाएं पहले से ज्यादा ख़तरनाक और लगातार हो रही हैं। रिपोर्ट यह भी चेतावनी देती है कि अगर कार्बन उत्सर्जन को तेजी से कम नहीं किया गया और जलवायु अनुकूलन पर निवेश नहीं बढ़ाया गया, तो आने वाले वर्षों में नुकसान और बढ़ सकता है।

विकासशील देशों के पास संसाधन सीमित-भारत पर असर अधिक

सबसे अधिक प्रभावित देशों में भारत का 17वां स्थान
सबसे अधिक प्रभावित देशों में भारत का 17वां स्थान
भारत भी उन देशों में शामिल है जो जलवायु परिवर्तन का सबसे ज्यादा असर झेल रहे हैं। देश में हर साल कहीं न कहीं बाढ़, सूखा, लू, बादल फटना और अनियमित मानसून जैसी घटनाएं सामने आती हैं। इसका सबसे ज्यादा असर किसानों और ग्रामीण इलाकों पर पड़ रहा है। समय पर बारिश नहीं होने से फसलें खराब हो रही हैं, गर्मी बढ़ने से गेहूं और धान की पैदावार प्रभावित हो रही है और पानी का संकट लगातार गहराता जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक विकासशील देशों के पास जलवायु संकट से निपटने के संसाधन सीमित हैं, इसलिए वहां नुकसान और ज्यादा दिखाई देता है।

भविष्य में हालात और गंभीर

विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन अब सिर्फ पर्यावरण का मुद्दा नहीं रहा, बल्कि यह खेती, स्वास्थ्य, अर्थव्यवस्था और लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ा बड़ा संकट बन चुका है। Climate Risk Index जैसी रिपोर्टें सरकारों और नीति निर्माताओं को यह समझाने का काम करती हैं कि अगर अभी ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में हालात और गंभीर हो सकते हैं।
Tags:
  • Climate Risk Index 2025
  • क्लाइमेट रिस्क इंडेक्स 2025
  • Climate Change
  • जलवायु परिवर्तन
  • Extreme Weather Events
  • India in Big Danger of Climate Crisis
  • india at 17 in climate risk index
  • Germanwatch report
  • climate change india
  • climate change impact