प्रदेश सरकार ने गेहूं उपार्जन को लेकर किसानों के हित में कई बड़े फैसले किए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि किसानों को अपनी उपज बेचने में किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए। इसी को ध्यान में रखते हुए खरीदी लक्ष्य बढ़ाने से लेकर स्लॉट बुकिंग, केंद्रों की क्षमता और सुविधाओं में विस्तार किया गया है। सरकार का उद्देश्य है कि किसानों को समय पर भुगतान मिले और खरीदी प्रक्रिया पूरी तरह सुचारु रहे।
गेहूं खरीदी का लक्ष्य 100 लाख मीट्रिक टन
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि प्रदेश में गेहूं उपार्जन का लक्ष्य 78 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 100 लाख मीट्रिक टन कर दिया गया है। उन्होंने इस फैसले के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त किया। सरकार का मानना है कि इससे अधिक किसानों की उपज समर्थन मूल्य पर खरीदी जा सकेगी और उन्हें बाजार में बेहतर अवसर मिलेगा।
सभी किसानों के लिए स्लॉट बुकिंग की सुविधा
सरकार ने लघु एवं सीमांत किसानों के साथ-साथ मध्यम और बड़े किसानों के लिए भी स्लॉट बुकिंग शुरू कर दी है। स्लॉट बुकिंग की अंतिम तिथि 30 अप्रैल से बढ़ाकर 9 मई कर दी गई है, ताकि ज्यादा से ज्यादा किसान इसका लाभ ले सकें। इससे खरीदी केंद्रों पर भीड़ कम होगी और किसानों को तय समय पर उपज बेचने में आसानी होगी।
खरीदी केंद्रों की क्षमता बढ़ी
पहले जहां एक उपार्जन केंद्र पर प्रतिदिन 1000 क्विंटल तक खरीदी होती थी, अब इसे बढ़ाकर 2250 क्विंटल प्रतिदिन कर दिया गया है। माना जा रहा है कि इस फैसले से किसानों की आवक तेजी से बढ़ेगी और खरीदी प्रक्रिया में तेजी आएगी। कलेक्टरों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने जिलों में सभी व्यवस्थाएं समय पर सुनिश्चित करें।
किसानों को मिलें सभी जरूरी सुविधाएं
मुख्यमंत्री ने कहा कि खरीदी केंद्रों पर किसानों के लिए तौल कांटे, हम्माल, छाया, पेयजल और बैठने जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। किसानों को लाइन, देरी या अव्यवस्था जैसी समस्याओं का सामना न करना पड़े। साथ ही प्रतिदिन गेहूं खरीदी, परिवहन व्यवस्था, भंडारण और भुगतान की समीक्षा करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
चना और मसूर खरीदी पर भी जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में चना और मसूर की खरीदी भी जारी है। उन्होंने निर्देश दिए कि इन फसलों की खरीदी मंडी शेड के अंदर की जाए, ताकि असमय बारिश से किसानों की उपज खराब न हो। जिला स्तर पर चना और मसूर खरीदी की जानकारी का व्यापक प्रचार-प्रसार करने को भी कहा गया है।
बारदानों और तौल कांटों की पर्याप्त व्यवस्था
सरकार ने कहा है कि प्रदेश में आवश्यक बारदानों की पर्याप्त व्यवस्था कर ली गई है। हर उपार्जन केंद्र पर कम से कम 7 दिन की खरीदी के लिए बारदान उपलब्ध रहना चाहिए। साथ ही प्रत्येक केंद्र पर न्यूनतम 6 इलेक्ट्रॉनिक तौल कांटे लगाए जाएं, ताकि तौल प्रक्रिया तेज और पारदर्शी हो सके।
अब तक कितनी हुई खरीदी
बैठक में बताया गया कि प्रदेश में कुल 3,516 उपार्जन केंद्र संचालित हैं। अब तक 8 लाख 55 हजार किसानों ने स्लॉट बुकिंग कराई है। इनमें से 3 लाख 96 हजार किसानों से 16 लाख 60 हजार मीट्रिक टन गेहूं खरीदा जा चुका है। इसके बदले किसानों को 2,527 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है।
गुणवत्ता मानकों में भी राहत
केंद्र सरकार ने चमक विहीन गेहूं की सीमा में 50 प्रतिशत तक शिथिलता दी है। वहीं कम पानी के कारण अल्प विकसित दानों की सीमा 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 10 प्रतिशत की गई है। क्षतिग्रस्त दानों की सीमा में भी राहत दी गई है। इससे मौसम की मार झेल रहे किसानों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
सरकार ने कहा- किसान हित सर्वोपरि
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुना, रायसेन, दतिया, सीधी और विदिशा के कलेक्टरों से वर्चुअल संवाद कर जिलों की स्थिति जानी। उन्होंने कहा कि किसानों के हित सर्वोपरि हैं और सरकार की कोशिश है कि खरीदी व्यवस्था पारदर्शी, तेज और किसान हितैषी बने, ताकि किसानों को उनकी मेहनत का पूरा लाभ मिल सके।