नारियल की बढ़ी विदेशों में मांग, 62% उछला निर्यात; तेल से लेकर एक्टिवेटेड कार्बन तक की दुनिया में बढ़ी पहुँच

Mansi | Aug 31, 2026, 18:21 IST
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भारत का नारियल उत्पादन अब सिर्फ खेती तक सीमित नहीं रह गया है, यह प्रोसेसिंग और निर्यात के क्षेत्र में भी तेजी से विकसित हो रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 में इसके निर्यात का अनुमान ₹7,038.35 करोड़ तक पहुँचने का है। खासकर एक्टिवेटेड कार्बन जैसे उत्पाद भारतीय निर्यात में नए मानक स्थापित कर रहे हैं।

भारत के नारियल उत्पादों की विदेशों में बढ़ी मांग से निर्यात 62% बढ़कर ₹7,038.35 करोड़ पहुँच गया<br>
भारत के नारियल उत्पादों की विदेशों में बढ़ी मांग से निर्यात 62% बढ़कर ₹7,038.35 करोड़ पहुँच गया
भारत में नारियल का पेड़ सिर्फ़ फल देने वाला पेड़ नहीं है। गाँवों में इसके फल, पानी, तेल और पत्तों का इस्तेमाल लंबे समय से होता आया है। लेकिन अब नारियल की यही उपयोगिता देश की सीमाओं से बाहर भी बड़ा बाज़ार बना रही है। नारियल से तैयार होने वाले अलग-अलग उत्पादों की मांग बढ़ने से भारत का नारियल कारोबार अब खेती से आगे बढ़कर प्रोसेसिंग और निर्यात तक पहुँच गया है।

नारियल विकास बोर्ड के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत से नारियल और नारियल उत्पादों का निर्यात ₹7,038.35 करोड़ तक पहुँच गया। यह 2024-25 के ₹4,349.03 करोड़ के मुकाबले करीब 62% की बढ़ोतरी है। डॉलर में देखें तो 2025-26 का निर्यात करीब 794.70 मिलियन डॉलर रहा।

कच्चे नारियल से आगे बढ़ा कारोबार

पहले विदेशों में भारतीय नारियल की पहचान मुख्य रूप से नारियल, तेल, कोपरा और सूखे नारियल जैसे पारंपरिक उत्पादों से थी। अब तस्वीर बदल रही है। भारत से ऐसे उत्पाद भी भेजे जा रहे हैं, जिन्हें अलग-अलग उद्योगों में इस्तेमाल किया जाता है।इनमें वर्जिन कोकोनट ऑयल, नारियल दूध, नारियल पानी और एक्टिवेटेड कार्बन जैसे मूल्यवर्धित उत्पाद शामिल हैं। यानी एक नारियल को सिर्फ़ फल के रूप में बेचने के बजाय उससे कई तरह के उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। इससे नारियल की कीमत और उसके कारोबार का दायरा दोनों बढ़ रहे हैं।

एक्टिवेटेड कार्बन की सबसे ज्यादा मांग

भारतीय नारियल उत्पादों के निर्यात में एक्टिवेटेड कार्बन सबसे अहम उत्पादों में से एक है। नारियल के खोल से तैयार होने वाले इस उत्पाद का इस्तेमाल पानी और हवा को साफ़ करने, सोने के खनन, दवा, कॉस्मेटिक्स और दूसरे औद्योगिक कामों में किया जाता है। 2025-26 में करीब 1.8 लाख टन एक्टिवेटेड कार्बन का निर्यात हुआ और इसका मूल्य लगभग ₹4,688.89 करोड़ रहा। नारियल जटा को छोड़कर नारियल उत्पादों के कुल निर्यात मूल्य में इसकी हिस्सेदारी करीब 67 % रही। यानी जिस नारियल के खोल को अक्सर बेकार समझ लिया जाता है, वही विदेशों में एक महत्वपूर्ण औद्योगिक उत्पाद बनकर भारत के लिए बड़ी कमाई का ज़रिया बन रहा है।

वीगन डाइट ने भी बढ़ाई मांग

दुनिया में खान-पान की आदतें भी बदल रही हैं। प्लांट-बेस्ड और वीगन भोजन की लोकप्रियता बढ़ने से नारियल से बने कई खाद्य उत्पादों की मांग बढ़ी है। नारियल दूध, मिल्क पाउडर और वर्जिन कोकोनट ऑयल इसी बदलती पसंद का हिस्सा हैं। नारियल विकास बोर्ड के मुताबिक, भारत में बेहतर होती प्रोसेसिंग क्षमता और अलग-अलग देशों के साथ व्यापार समझौतों ने भी भारतीय उत्पादों के लिए विदेशी बाज़ार तक पहुँ च आसान बनाने में मदद की है।

भारतीय नारियल उत्पादों का बाज़ार अब सिर्फ़ खाड़ी देशों तक सीमित नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने यूरोप, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे बाज़ारों में भी अपनी पहुँच बढ़ाई है। अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात, श्रीलंका, जर्मनी, रूस, तुर्की, बेल्जियम, ब्रिटेन और नीदरलैंड भारत के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों में शामिल हैं। नारियल उत्पादों की पहुँच 155 से ज्यादा देशों तक बताई गई है।

किसानों के लिए क्यों अहम है यह बढ़ता बाज़ार?

नारियल के निर्यात में बढ़ोतरी सिर्फ़ विदेशों में बढ़ती मांग की कहानी नहीं है। इसका असर उन किसानों और ग्रामीण परिवारों पर भी पड़ सकता है, जिनकी रोज़ी-रोटी नारियल की खेती से जुड़ी है। नारियल विकास बोर्ड के मुताबिक, भारत में करीब 3 करोड़ लोग, जिनमें लगभग 1 करोड़ किसान शामिल हैं, नारियल क्षेत्र पर निर्भर हैं। भारत दुनिया में नारियल उत्पादन में पहले स्थान पर है। 2024-25 में देश में करीब 20,301.22 मिलियन नारियल का उत्पादन हुआ, जो लगभग 21.9 लाख हेक्टेयर क्षेत्र से आया।

यही वजह है कि नारियल से जुड़े कारोबार में प्रोसेसिंग, नई तकनीक और बेहतर बाज़ार की भूमिका बढ़ना किसानों के लिए भी अहम है। अगर नारियल से तेल, दूध, पाउडर या एक्टिवेटेड कार्बन जैसे उत्पाद तैयार होते हैं, तो खेती से लेकर पैकिंग और निर्यात तक कई स्तरों पर रोजगार और कारोबार के अवसर बनते हैं।

2 सितंबर को विश्व नारियल दिवस

नारियल की इसी बढ़ती भूमिका के बीच 2 सितंबर को विश्व नारियल दिवस 2026 मनाया जाएगा। इस वर्ष इसकी थीम “अनिश्चितता के समय में नारियल: भोजन, ऊर्जा और आजीविका की सुरक्षा” रखी गई है। कभी घर के आँगन और खेतों में रोज़मर्रा की ज़रूरत पूरी करने वाला नारियल अब अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में भी अपनी पहचान बना रहा है। इसकी कहानी यह भी बताती है कि किसी पारंपरिक फसल की असली ताकत सिर्फ़ उसकी पैदावार में नहीं, बल्कि उससे तैयार होने वाले अलग-अलग उत्पादों और उनके लिए तैयार होते बाज़ार में भी छिपी होती है।
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