खराब मौसम की मार! भारत में घट सकता है कॉफी उत्पादन, अरबिका फसल पर सबसे बड़ा संकट
Gaon Connection | May 23, 2026, 18:29 IST
भारत में कॉफी की फसल पर मौसम का प्रतिकूल प्रभाव देखा जा रहा है। 2026-27 में संभवतः उत्पादन में 4% की कमी आ सकती है। अरबिका कॉफी को सबसे अधिक नुकसान होगा, जबकि रोबस्टा कॉफी की फसल भले ही मजबूत बनी रहे।
मौसम की मार से कॉफी किसानों की बढ़ी चिंता
देश में बदलते मौसम और कमजोर मानसून की आशंका का असर अब कॉफी उत्पादन पर भी दिखाई देने लगा है। अमेरिका के कृषि विभाग (USDA) के मुंबई स्थित कार्यालय की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 2026-27 फसल वर्ष के दौरान कॉफी उत्पादन करीब 4 प्रतिशत तक घट सकता है। रिपोर्ट के अनुसार अक्टूबर 2026 से शुरू होने वाले नए कॉफी सीजन में देश का कुल उत्पादन लगभग 61.4 लाख बैग रहने का अनुमान है। एक बैग का वजन 60 किलोग्राम होता है और कुल उत्पादन करीब 3.68 लाख टन रहने की संभावना जताई गई है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि इस बार सबसे ज्यादा असर अरबिका कॉफी उत्पादन पर पड़ सकता है। अनुमान है कि अरबिका उत्पादन घटकर 15.6 लाख बैग यानी करीब 93,600 टन रह जाएगा। वहीं रोबस्टा कॉफी का उत्पादन अपेक्षाकृत मजबूत बना रह सकता है और इसका उत्पादन करीब 45.8 लाख बैग यानी 2.74 लाख टन रहने का अनुमान लगाया गया है। भारत में कुल कॉफी उत्पादन में रोबस्टा की हिस्सेदारी 75 प्रतिशत से ज्यादा है।
USDA की रिपोर्ट के मुताबिक सामान्य से कम मानसून बारिश और लगातार बढ़ते तापमान का असर खासकर अरबिका कॉफी पर पड़ रहा है। अरबिका फसल को ज्यादा पानी और ठंडा मौसम चाहिए होता है, जबकि रोबस्टा मौसम में उतार-चढ़ाव को अपेक्षाकृत बेहतर तरीके से झेल लेती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मार्च और अप्रैल में समय पर हुई बारिश से फूल आने और शुरुआती फसल विकास में मदद मिली थी, लेकिन हाल के दिनों में पड़ी तेज गर्मी ने मिट्टी में नमी की कमी बढ़ा दी है।
विशेषज्ञों के अनुसार लगातार हीटवेव और अनियमित हल्की बारिश से कॉफी पौधों पर दबाव बढ़ रहा है। इससे फूल झड़ने का खतरा बढ़ सकता है, फलों का विकास प्रभावित हो सकता है और सिंचाई की जरूरत भी बढ़ सकती है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अरबिका पौधों में लगातार गर्मी रहने पर प्रकाश संश्लेषण की क्षमता कम हो सकती है, जिससे उत्पादन पर सीधा असर पड़ सकता है।
हालांकि सामान्य से कम बारिश रोबस्टा फसल के लिए कुछ हद तक फायदेमंद भी मानी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार अधिक बारिश की वजह से फैलने वाले फंगल रोगों में कमी आ सकती है। लेकिन मौसम का तेजी से बदलता पैटर्न अब भी चिंता का बड़ा कारण बना हुआ है। कभी अत्यधिक बारिश और कभी लंबे सूखे की स्थिति ने कॉफी उत्पादन को अनिश्चित बना दिया है।
रिपोर्ट के मुताबिक 2026-27 में अरबिका कॉफी की उत्पादकता करीब 8 प्रतिशत घटकर 452 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर रह सकती है। वहीं रोबस्टा की पैदावार में करीब 2 प्रतिशत की मामूली गिरावट का अनुमान लगाया गया है और यह 1239 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर रह सकती है।
एक तरफ उत्पादन घटने की आशंका है, वहीं दूसरी तरफ देश में कॉफी की मांग लगातार बढ़ रही है। रिपोर्ट के अनुसार 2026-27 में भारत में घरेलू कॉफी खपत बढ़कर 15.8 लाख बैग यानी करीब 94,800 टन तक पहुंच सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि इंस्टेंट और सॉल्यूबल कॉफी की बढ़ती लोकप्रियता इसकी बड़ी वजह है। अनुमान है कि अगले साल घरेलू कॉफी खपत में करीब 73 प्रतिशत हिस्सेदारी इंस्टेंट कॉफी की होगी।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत में प्रति व्यक्ति कॉफी खपत अभी भी दुनिया के मुकाबले काफी कम है। देश में प्रति व्यक्ति औसतन सिर्फ 0.04 किलोग्राम कॉफी की खपत होती है, जबकि वैश्विक औसत करीब 1.3 किलोग्राम है। इसी वजह से कॉफी कंपनियां भारत को भविष्य के बड़े बाजार के रूप में देख रही हैं।
इस बीच राज्य संचालित कॉफी बोर्ड ने अभी 2026-27 सीजन के आधिकारिक उत्पादन अनुमान जारी नहीं किए हैं। हालांकि 2025-26 के लिए बोर्ड ने शुरुआती अनुमान में कुल 4.03 लाख टन कॉफी उत्पादन का अनुमान लगाया था, जिसमें 1.18 लाख टन अरबिका और 2.84 लाख टन रोबस्टा शामिल थे।