गोशालाओं के बीच शुरू होगी प्रतियोगिता, उत्कृष्ट प्रदर्शन पर मिलेगा पुरस्कार, जानें यूपी सरकार का नया प्लान
Umang | Jul 29, 2026, 18:19 IST
उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप प्रदेश की गोशालाओं के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा शुरू करने का निर्णय लिया है। प्रत्येक जिले की गोशालाओं का वैज्ञानिक प्रबंधन, स्वच्छता, गोवंश संरक्षण, पोषण, दुग्ध उत्पादन, जनसहभागिता और आत्मनिर्भरता जैसे मानकों पर मूल्यांकन किया जाएगा। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली गोशालाओं को पुरस्कृत किया जाएगा और उनके सफल मॉडल को पूरे प्रदेश में लागू करने की दिशा में काम होगा। आयोग गोशालाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए बायोगैस, गोबर-गोमूत्र आधारित उत्पादों और प्राकृतिक खेती को भी बढ़ावा देगा।
गोशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने की तैयारी
उत्तर प्रदेश में गोशालाओं के बेहतर संचालन और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में नई पहल शुरू की गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग ने फैसला किया है कि अब प्रत्येक जिले की गोशालाओं का मूल्यांकन किया जाएगा। इस प्रक्रिया में बेहतर प्रदर्शन करने वाली गोशालाओं को सम्मानित और पुरस्कृत किया जाएगा, जबकि उनके सफल मॉडल को प्रदेश की अन्य गोशालाओं में भी अपनाने की दिशा में काम किया जाएगा।
आयोग का मानना है कि स्वस्थ प्रतिस्पर्धा से गोशालाओं के प्रबंधन, गोवंश संरक्षण, स्वच्छता और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा। इसी उद्देश्य से मूल्यांकन के लिए कई मानक तय किए गए हैं, जिनमें गोवंश के स्वास्थ्य, पोषण, वैज्ञानिक प्रबंधन, दुग्ध उत्पादन, जनसहभागिता और आत्मनिर्भरता से जुड़े प्रयासों को प्रमुख आधार बनाया जाएगा।
उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अनुसार, गोशालाओं का मूल्यांकन वैज्ञानिक प्रबंधन, स्वच्छता, गोवंश के स्वास्थ्य एवं पोषण, नस्ल संवर्धन, दुग्ध उत्पादन, जनसहभागिता और आत्मनिर्भरता के प्रयासों के आधार पर किया जाएगा। इसके अलावा वर्षभर हरे चारे की उपलब्धता, भूसा-चोकर का उचित प्रबंधन, गुणवत्तापूर्ण पशु आहार, नर-मादा एवं बछड़े-बछियों का वैज्ञानिक वर्गीकरण, नंदीशाला की व्यवस्था और वैज्ञानिक प्रजनन प्रणाली को भी मूल्यांकन का हिस्सा बनाया गया है। साथ ही सिक वार्ड, नियमित पशु चिकित्सा, कमज़ोर गोवंश की अलग देखभाल, पर्याप्त शेड, स्वच्छता, सीसीटीवी, बाउंड्री वॉल और अन्य बुनियादी सुविधाओं की भी समीक्षा की जाएगी।
आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता, उपाध्यक्ष अतुल सिंह एवं महेश शुक्ल तथा सदस्य राजेश सिंह सेंगर, रमाकांत उपाध्याय और दीपक गोयल ने गोशालाओं के समग्र विकास की कार्ययोजना पर मंथन के बाद यह योजना तैयार की है। आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि आयोग का उद्देश्य गोशालाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। इसके लिए बायोगैस संयंत्र, गोबर और गोमूत्र के वैज्ञानिक उपयोग, जैविक खाद तथा अन्य मूल्यवर्धित उत्पादों को बढ़ावा दिया जाएगा।
आयोग ने बताया कि गोशालाओं को ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़ने के लिए आसपास के किसानों को गो-आधारित प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। इससे किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने में मदद मिलेगी और गोशालाओं की उपयोगिता भी बढ़ेगी। आयोग का कहना है कि उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली गोशालाओं को पुरस्कृत किया जाएगा और उनके सफल मॉडल को प्रदेशभर की अन्य गोशालाओं में लागू करने का प्रयास किया जाएगा। आयोग को उम्मीद है कि इस पहल से गोवंश संरक्षण, बेहतर प्रबंधन, स्वच्छता और आत्मनिर्भरता के नए मानक स्थापित होंगे।
आयोग का मानना है कि स्वस्थ प्रतिस्पर्धा से गोशालाओं के प्रबंधन, गोवंश संरक्षण, स्वच्छता और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा। इसी उद्देश्य से मूल्यांकन के लिए कई मानक तय किए गए हैं, जिनमें गोवंश के स्वास्थ्य, पोषण, वैज्ञानिक प्रबंधन, दुग्ध उत्पादन, जनसहभागिता और आत्मनिर्भरता से जुड़े प्रयासों को प्रमुख आधार बनाया जाएगा।