बुआई में कमी के बीच कपास के दाम में ज़बरदस्त उछाल, दो दिन में ₹800 प्रति कैंडी बढ़े भाव, जानिए वजह

Gaon Connection | Jul 15, 2026, 13:09 IST
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वैश्विक बाज़ार में कपास की कीमतों में तेजी और देश में बुआई क्षेत्र घटने से घरेलू बाज़ार में कपास के दाम मजबूत हुए हैं। कॉटन कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (CCI) ने दो दिनों में ₹800 प्रति कैंडी तक कीमतें बढ़ाई हैं। 10 जुलाई तक कपास की बुआई 15 प्रतिशत कम रही, जबकि उद्योग का एक वर्ग मानता है कि जुलाई के अंत तक बारिश बढ़ने के साथ बुआई में तेजी आएगी। मिलों की माँग फिलहाल मजबूत बनी हुई है।

बारिश की अनिश्चितता से गर्माया कपास बाज़ार
बारिश की अनिश्चितता से गर्माया कपास बाज़ार
देश में कपास की बुआई में कमी और अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कीमतों में आई तेजी का असर अब घरेलू मंडियों में भी दिखाई देने लगा है। वैश्विक स्तर पर कपास के दाम मजबूत होने और मानसून में देरी के कारण नई फसल को लेकर बनी अनिश्चितता से भारतीय बाज़ार में भी कीमतों को समर्थन मिला है। इसके बीच कॉटन कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (CCI) ने पिछले दो दिनों में कपास के दाम ₹800 प्रति कैंडी (356 किलोग्राम) तक बढ़ा दिए हैं।

कृषि मंत्रालय के ताज़ा आँकड़ों के अनुसार 10 जुलाई तक देश में कपास की बुआई 79.54 लाख हेक्टेयर रही, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 93.95 लाख हेक्टेयर थी। यानी इस बार अब तक कपास का रकबा लगभग 15 प्रतिशत कम है। वहीं कपड़ा मिलों और व्यापारियों की लगातार बनी माँग के कारण बाज़ार में कीमतों को और मजबूती मिल रही है।

वैश्विक बाज़ार में तेजी और कम बारिश से बढ़ी चिंता, सीसीआई की बिक्री भी तेज़

न्यूयॉर्क स्थित आईसीई एक्सचेंज पर कपास वायदा कीमतें 75-76 सेंट प्रति पाउंड से बढ़कर 81-82 सेंट प्रति पाउंड तक पहुँच गई हैं। मानसून में देरी के कारण नई फसल को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, जिसका सीधा असर बाज़ार पर पड़ रहा है। बिजनेस लाइन की एक रिपोर्ट के अनुसार, सीसीआई के पास कपास की अच्छी माँग बनी हुई है। सोमवार को एक लाख 20 हजार से अधिक गांठों और मंगलवार को लगभग डेढ़ लाख गांठों की बिक्री हुई। बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ भी अपने स्टॉक बेच रही हैं और उनके भाव सीसीआई के दाम से लगभग ₹1,000 प्रति कैंडी अधिक चल रहे हैं।

अल नीनो को लेकर अलग राय, उद्योग का कहना- बारिश मिलने पर बढ़ेगा रकबा

कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (CAI) की क्रॉप कमेटी के अध्यक्ष अतुल गनात्रा ने कहा कि अल नीनो का कपास की फसल पर नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा। उनके अनुसार अपेक्षाकृत कम वर्षा से कपास की गुणवत्ता और उत्पादन बेहतर हो सकता है तथा इससे बुआई क्षेत्र बढ़ने की संभावना भी है। उन्होंने बताया कि अभी तक लगभग 80 लाख हेक्टेयर में कपास की बुआई पूरी हो चुकी है, जबकि पिछले वर्ष इसी समय यह लगभग 86 लाख हेक्टेयर थी। उनका अनुमान है कि 25 जुलाई तक बुआई 100 लाख हेक्टेयर का आँकड़ा पार कर जाएगी, क्योंकि अधिकांश कपास उत्पादक क्षेत्रों में अच्छी बारिश हो चुकी है। फिलहाल बारिश में आए विराम का लाभ उठाकर किसान तेज़ी से बुआई कर रहे हैं।

अतुल गनात्रा के अनुसार दक्षिण भारत में इस वर्ष कपास का रकबा पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 20 प्रतिशत अधिक है। देर से हुई बारिश के कारण किसानों के पास अब कपास की बुआई का बेहतर विकल्प बचा है। उनका अनुमान है कि इस सीज़न में कुल कपास बुआई 125 से 130 लाख हेक्टेयर तक पहुँच सकती है, जो पिछले वर्ष से 10 से 15 प्रतिशत अधिक होगी। बिजनेस लाइन के मुताबिक, राजकोट के ब्रोकर आनंद पोपट ने अपने साप्ताहिक बाज़ार विश्लेषण में कहा कि देश में कुल मिलाकर कपास की उपलब्धता अभी संतोषजनक बनी हुई है, लेकिन प्रीमियम गुणवत्ता वाले कपास का स्टॉक सीमित है। उपलब्ध उच्च गुणवत्ता वाला अधिकांश कपास सीसीआई और बहुराष्ट्रीय ट्रेडिंग कंपनियों के पास है, जिससे सीज़न के शेष महीनों में कीमतों को समर्थन मिलता रह सकता है।

उन्होंने बताया कि प्रतिदिन कपास (कपासिया) की आवक घटकर लगभग 7,000 से 8,000 गांठ रह गई है। दूसरी ओर स्पिनिंग मिलों की माँग स्थिर बनी हुई है और घरेलू तथा निर्यात बाज़ार में सूत (यार्न) की माँग में भी धीरे-धीरे सुधार देखने को मिल रहा है।
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