जुलाई के अंत में फिर सक्रिय हुआ मानसून, बंगाल की खाड़ी में गहरे दबाव से कई राज्यों में भारी बारिश के आसार
Gaon Connection | Jul 27, 2026, 19:30 IST
बंगाल की खाड़ी में बने दबाव के कारण भारत के विभिन्न हिस्सों में भारी बारिश की आशंका है। यह मौसम प्रणाली मध्य, पूर्वी और पश्चिमी भारत के कई राज्यों में लाभकारी वर्षा लाएगी, जिससे खरीफ फसलों को मजबूती मिलेगी। हालांकि, अत्यधिक बारिश से जलभराव और फसल क्षति का खतरा भी मंडरा रहा है, इसलिए किसानों को मौसम विभाग की सलाह का पालन करने का अनुरोध किया गया है।
जुलाई के अंत में फिर सक्रिय हुआ मानसून
जुलाई के आखिरी सप्ताह में कमजोर पड़ता दिख रहा दक्षिण-पश्चिम मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है। बंगाल की खाड़ी में बना कम दबाव का क्षेत्र (लो प्रेशर एरिया) तेजी से मजबूत होकर गहरे दबाव (डीप डिप्रेशन) में बदल गया है, जिसके चलते देश के कई हिस्सों में अगले कुछ दिनों तक व्यापक बारिश होने की संभावना है। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) का कहना है कि इस प्रणाली के असर से मध्य, पूर्वी, पश्चिमी और उत्तर-पूर्वी भारत के कई राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है।
मानसून के दौरान किसी कम दबाव के क्षेत्र का इतनी तेजी से गहरे दबाव में बदलना सामान्य घटना नहीं है। आमतौर पर इस मौसम में तेज ऊपरी हवाएं ऐसे सिस्टम को ज्यादा मजबूत नहीं होने देतीं, लेकिन इस बार यह प्रणाली तेजी से विकसित हुई है।
इस नए मौसम तंत्र के सक्रिय होने से देश में बारिश की कमी काफी हद तक कम हुई है। 26 जुलाई तक देश में कुल वर्षा सामान्य से 15 प्रतिशत कम दर्ज की गई। मध्य भारत में बारिश लगभग सामान्य स्थिति में पहुंच गई है, जबकि उत्तर-पश्चिम भारत में भी बारिश का घाटा घटा है। पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत में भी पहले की तुलना में स्थिति में सुधार हुआ है, हालांकि दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में अभी भी सामान्य से कम बारिश दर्ज की जा रही है। आईएमडी के अनुसार, सामान्य वर्षा का दायरा औसत से 19 प्रतिशत अधिक या 19 प्रतिशत कम तक माना जाता है।
मौसम विभाग के मुताबिक, गहरे दबाव का यह क्षेत्र पश्चिम बंगाल और उत्तरी ओडिशा तट के बीच से गुजरते हुए आगे बढ़ेगा। इसके प्रभाव से पश्चिम बंगाल, ओडिशा, झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश और उत्तर-पूर्व के कई राज्यों में अगले कुछ दिनों तक तेज बारिश हो सकती है। इसके अलावा कोंकण-गोवा, तेलंगाना, तटीय आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और सिक्किम के कुछ इलाकों में भी भारी बारिश का अनुमान है। उत्तर-पश्चिम भारत में भी मानसून की गतिविधियां बढ़ने की संभावना जताई गई है।
लगातार हो रही बारिश का असर असम में सबसे ज्यादा देखने को मिला है। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, बाढ़ और इससे जुड़ी घटनाओं में अब तक 68 लोगों की जान जा चुकी है। वहीं, 6.5 लाख से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। कई जिलों में फसलों, घरों और अन्य संपत्तियों को भी नुकसान पहुंचा है।
बंगाल की खाड़ी में लगातार बन रहे कम दबाव के क्षेत्र मानसून को नई ऊर्जा दे रहे हैं। इसके साथ ही मानसून ट्रफ भी फिलहाल अनुकूल स्थिति में है, जिससे नमी लगातार उत्तर और मध्य भारत की ओर पहुंच रही है। यही कारण है कि जुलाई के अंत में मानसून ने फिर से रफ्तार पकड़ ली है। हालांकि अल नीनो के प्रभाव को लेकर पहले अनुमान लगाया जा रहा था कि जुलाई में मानसून कमजोर पड़ सकता है, लेकिन मौजूदा मौसम प्रणाली ने इन आशंकाओं को कुछ समय के लिए पीछे छोड़ दिया है।
मानसून की वापसी खरीफ फसलों के लिए राहत लेकर आई है। जिन इलाकों में जुलाई के शुरुआती दिनों में बारिश कम हुई थी, वहां अब अच्छी वर्षा से धान, मक्का, सोयाबीन, कपास और अन्य खरीफ फसलों को फायदा मिलने की उम्मीद है। हालांकि जिन क्षेत्रों में बहुत भारी बारिश होगी, वहाँ जलभराव और फसलों को नुकसान की आशंका भी बनी रहेगी। ऐसे में किसानों को मौसम विभाग की सलाह के अनुसार कृषि कार्य करने की सलाह दी गई है।
मानसून के दौरान किसी कम दबाव के क्षेत्र का इतनी तेजी से गहरे दबाव में बदलना सामान्य घटना नहीं है। आमतौर पर इस मौसम में तेज ऊपरी हवाएं ऐसे सिस्टम को ज्यादा मजबूत नहीं होने देतीं, लेकिन इस बार यह प्रणाली तेजी से विकसित हुई है।