विदेशों में घटी मिर्च-जीरे की मांग, मसाला निर्यात 6% लुढ़का, फिर किस मसाले ने बचाई भारत की साख?
Gaon Connection | Jun 04, 2026, 17:26 IST
वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान भारत का मसाला निर्यात प्रभावित हुआ है जहां निर्यात की मात्रा और मूल्य दोनों में गिरावट आई है। विशेषकर, मिर्च और जीरे की विदेशों में मांग निराशाजनक रही। हालांकि, इलायची, काली मिर्च और इमली जैसे मसालों का निर्यात बेहतर रहा है।
मसाला निर्यात में सुस्ती
विदेशों में मिर्च और जीरे की कमजोर मांग का असर भारत के मसाला निर्यात पर पड़ा है। वित्त वर्ष 2025-26 में देश का कुल मसाला निर्यात मूल्य और मात्रा दोनों के लिहाज से घटा है। हालांकि इलायची, काली मिर्च और इमली जैसे कुछ मसालों की अच्छी मांग ने राहत जरूर दी है। 'बिजनेस लाइन' में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का मसाला निर्यात 6 प्रतिशत घटकर 4.43 अरब डॉलर रह गया जबकि एक साल पहले यह 4.72 अरब डॉलर था। निर्यात की मात्रा भी 4 प्रतिशत घटकर 17.34 लाख टन रह गई।
भारत के मसाला निर्यात में मिर्च की सबसे बड़ी हिस्सेदारी है, लेकिन इस बार इसका प्रदर्शन कमजोर रहा। चीन और बांग्लादेश जैसे प्रमुख खरीदार देशों से मांग कम होने के कारण मिर्च निर्यात के मूल्य में 12 प्रतिशत और मात्रा में 4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। मिर्च निर्यात घटकर 1.17 अरब डॉलर रह गया।
जीरे के निर्यात में भी गिरावट देखने को मिली। निर्यात मात्रा 14 प्रतिशत घटकर 1.96 लाख टन रह गई। वहीं निर्यात मूल्य 28 प्रतिशत गिरकर 524.22 मिलियन डॉलर पर आ गया। विशेषज्ञों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में मांग कमजोर रहने का असर जीरे के कारोबार पर पड़ा।
हल्दी के निर्यात में 4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और इसका निर्यात मूल्य 327 मिलियन डॉलर रहा। मसाला तेल और ओलियोरेजिन का निर्यात भी मामूली गिरावट के साथ 528.73 मिलियन डॉलर पर पहुंच गया।
काली मिर्च के निर्यात की मात्रा भले ही कम हुई हो, लेकिन बेहतर कीमत मिलने से निर्यात मूल्य 11 प्रतिशत बढ़ गया। वहीं छोटी इलायची ने शानदार प्रदर्शन किया। छोटी इलायची का निर्यात मूल्य 124 प्रतिशत बढ़कर 413 मिलियन डॉलर पहुंच गया। बड़ी इलायची के निर्यात में भी 31 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
इमली के निर्यात में 42 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जबकि करी पाउडर और पेस्ट का निर्यात भी 5 प्रतिशत बढ़ा। इससे मसाला निर्यात क्षेत्र को कुछ राहत मिली।
पुदीना आधारित उत्पादों के निर्यात में 15 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसका निर्यात मूल्य घटकर 354 मिलियन डॉलर रह गया। यदि आने वाले महीनों में वैश्विक मांग में सुधार होता है तो भारतीय मसाला निर्यात फिर से रफ्तार पकड़ सकता है। फिलहाल मिर्च और जीरे की कमजोर मांग ने पूरे क्षेत्र के प्रदर्शन को प्रभावित किया है।