जुलाई की बारिश ने बदली तस्वीर लेकिन मानसून अब भी 13% पीछे; जानें किसानों के लिए क्यों अहम हैं अगले 2 महीने?
Gaon Connection | Aug 20, 2026, 16:28 IST
जून में बारिश की कमी के बाद जुलाई में खरीफ फसलों की बुआई ने रफ़्तार पकड़ी है। दलहन, तिलहन और कपास जैसी अधिकांश फसलों की बुआई संतोषजनक ढंग से आगे बढ़ रही है। 14 अगस्त तक किसानों ने करीब 10.17 करोड़ हेक्टेयर में खरीफ फसलों की बुआई की थी। अगस्त और सितंबर में होने वाली बारिश फसलों की पैदावार के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगी।
जून में 40% कम बारिश
भारत में मानसून की बारिश में जून की कमी के बाद खरीफ फसलों की बुआई ने जुलाई में रफ़्तार पकड़ ली है। कृषि सचिव अतिश चंद्र के मुताबिक़, दलहन, तिलहन और कपास समेत ज़्यादातर फसलों की बुआई संतोषजनक ढंग से आगे बढ़ रही है। कुछ फसलों का रकबा पिछले साल से थोड़ा कम है, जबकि कुछ में बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने कहा कि अगस्त और सितंबर में होने वाली बारिश फसलों की पैदावार के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगी और कृषि मंत्रालय राज्य सरकारों के साथ मिलकर स्थिति पर लगातार नज़र रख रहा है।
बिज़नेस स्टैंडर्ड की एक रिपोर्ट के अनुसार, जून में 12 वर्षों की सबसे कम बारिश के बाद जुलाई में सामान्य से थोड़ी अधिक बारिश ने बुआई की स्थिति में सुधार किया है। 19 अगस्त तक देश में कुल मानसूनी बारिश सामान्य से 13 प्रतिशत कम रही। वहीं, 14 अगस्त तक किसानों ने करीब 10.17 करोड़ हेक्टेयर में खरीफ फसलों की बुआई की थी, जो पिछले साल की समान अवधि से करीब 2 प्रतिशत कम है। सरकार का कहना है कि अभी फसल उत्पादन का अनुमान लगाना जल्दबाज़ी होगी।
कृषि सचिव अतिश चंद्र ने सोमवार को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि जून के बाद बुआई में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। उन्होंने राज्यों से किसानों को इस सीज़न में उपलब्ध पूरी ज़मीन पर खेती करने के लिए प्रोत्साहित करने को कहा है, भले ही कुछ इलाक़ों में बुआई में देरी हुई हो। जून में बारिश सामान्य से 40 प्रतिशत कम रही थी। इसके पीछे एल नीनो मौसम पैटर्न के उभरने को एक प्रमुख कारण बताया गया। इसके बाद जुलाई में बारिश सामान्य से थोड़ी अधिक रही, जो खरीफ फसलों की बुआई के लिहाज़ से महत्वपूर्ण महीना है।
कृषि मंत्रालय के आँकड़ों के अनुसार, 14 अगस्त तक किसानों ने 10.17 करोड़ हेक्टेयर यानी करीब 25.1 करोड़ एकड़ में मानसूनी फसलों की बुआई कर ली थी। यह पिछले साल की समान अवधि की तुलना में लगभग 2 प्रतिशत कम है। कृषि सचिव के मुताबिक़, दलहन, तिलहन और कपास समेत ज़्यादातर फसलों की बुआई संतोषजनक गति से आगे बढ़ रही है। हालांकि, धान की बुआई अभी पिछले साल के स्तर से पीछे है। उन्होंने कहा कि धान की बुआई के लिए किसानों के पास अगस्त के अंत तक और कुछ इलाक़ों में सितंबर तक समय है। इसलिए अभी उत्पादन का अनुमान लगाना जल्दबाज़ी होगी।
अतिश चंद्र ने कहा कि अगस्त और सितंबर में होने वाली बारिश फसलों की पैदावार के लिए महत्वपूर्ण होगी। कृषि मंत्रालय राज्य सरकारों के साथ समय-समय पर समीक्षा कर रहा है और मौसम तथा फसल की स्थिति पर नज़र रखी जा रही है।
भारत की कुल सालाना बारिश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की हिस्सेदारी करीब तीन-चौथाई है। यह भूजल भंडार को फिर से भरने के साथ खेती के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है। जून से सितंबर के बीच उगाई जाने वाली खरीफ फसलें देश के सालाना खाद्यान्न उत्पादन में करीब आधी हिस्सेदारी रखती हैं। 19 अगस्त तक देश में संचयी बारिश सामान्य से 13 प्रतिशत कम रही। अगर बुआई में सुधार नहीं होता, तो अनाज की उपलब्धता पर दबाव बढ़ सकता था, जिससे खाद्य कीमतों में बढ़ोतरी और महंगाई को नियंत्रित करने की कोशिशों में चुनौती पैदा हो सकती थी। इसी बीच भारत करीब एक दशक बाद चीनी की आयात शुल्क दर में कटौती पर भी विचार कर रहा है। कृषि सचिव ने कहा कि मंत्रालय राज्यों के साथ समय-समय पर समीक्षा कर रहा है।
बिज़नेस स्टैंडर्ड की एक रिपोर्ट के अनुसार, जून में 12 वर्षों की सबसे कम बारिश के बाद जुलाई में सामान्य से थोड़ी अधिक बारिश ने बुआई की स्थिति में सुधार किया है। 19 अगस्त तक देश में कुल मानसूनी बारिश सामान्य से 13 प्रतिशत कम रही। वहीं, 14 अगस्त तक किसानों ने करीब 10.17 करोड़ हेक्टेयर में खरीफ फसलों की बुआई की थी, जो पिछले साल की समान अवधि से करीब 2 प्रतिशत कम है। सरकार का कहना है कि अभी फसल उत्पादन का अनुमान लगाना जल्दबाज़ी होगी।
जून की कमी के बाद जुलाई में बुआई ने पकड़ी रफ़्तार
10.17 करोड़ हेक्टेयर में हुई खरीफ बुआई
अगस्त-सितंबर की बारिश पर टिकी पैदावार
भारत की कुल सालाना बारिश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की हिस्सेदारी करीब तीन-चौथाई है। यह भूजल भंडार को फिर से भरने के साथ खेती के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है। जून से सितंबर के बीच उगाई जाने वाली खरीफ फसलें देश के सालाना खाद्यान्न उत्पादन में करीब आधी हिस्सेदारी रखती हैं। 19 अगस्त तक देश में संचयी बारिश सामान्य से 13 प्रतिशत कम रही। अगर बुआई में सुधार नहीं होता, तो अनाज की उपलब्धता पर दबाव बढ़ सकता था, जिससे खाद्य कीमतों में बढ़ोतरी और महंगाई को नियंत्रित करने की कोशिशों में चुनौती पैदा हो सकती थी। इसी बीच भारत करीब एक दशक बाद चीनी की आयात शुल्क दर में कटौती पर भी विचार कर रहा है। कृषि सचिव ने कहा कि मंत्रालय राज्यों के साथ समय-समय पर समीक्षा कर रहा है।