Nepal Flood: 15 मिनट में बह गई ज़िंदगी, 2 साल से मिल रही थी बाढ़ की चेतावनी; त्रिशूली से ‘गाँव कनेक्शन’ की आंखोंदेखी रिपोर्ट

Mansi | Aug 31, 2026, 14:55 IST
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त्रिशूली बाजार में अचानक आई बाढ़ ने तबाही मचा दी और कई लोग लापता हो गए हैं। सुजीत भंडारी ने पूर्व में ही अपने दोस्तों को सचेत किया था, लेकिन कुछ ही पलों में स्थिति भयावह हो गई। हर कोई जान बचाने के लिए भागा और अपनी संपत्ति छोड़ दी। पिछले दो वर्षों से बाढ़ का खतरा था, लेकिन इस तरह की तबाही का किसी ने अनुमान नहीं लगाया था।

सुजीत भंडारी ने ‘गाँव कनेक्शन’ की टीम को बाढ़ के दिन की पूरी कहानी बताई<br>
सुजीत भंडारी ने ‘गाँव कनेक्शन’ की टीम को बाढ़ के दिन की पूरी कहानी बताई
त्रिशूली बाजार में ‘गाँव कनेक्शन’ की टीम जब बाढ़ से तबाह इलाक़े में पहुँची, तो सामने सिर्फ़ मलबा नहीं था, बल्कि उन परिवारों और लोगों की कहानियां थीं जो अब भी अपने अपनों की तलाश में हैं। टूटी सड़कें, बह चुके घर, मलबे में दबे रास्ते और दूर तक पसरी तबाही के बीच हमारी टीम ने स्थानीय लोगों से बात की और उस दिन क्या हुआ, इसकी आंखोंदेखी समझने की कोशिश की।

इसी दौरान टीम की मुलाक़ात सुजीत भंडारी से हुई। इंश्योरेंस कंपनी में काम करने वाले सुजीत ने ‘गाँव कनेक्शन’ को बताया कि घटना वाले दिन उन्हें एक दोस्त का फ़ोन आया था। संदेश साफ़ था बाढ़ का पानी नीचे की तरफ़ आ रहा है, जल्दी सुरक्षित जगह चले जाइए। इसके बाद सुजीत ने आसपास के लोगों और दोस्तों को फोन कर चेतावनी देना शुरू किया। लेकिन किसी को अंदाज़ा नहीं था कि यह चेतावनी मिलने के महज़ 15-20 मिनट बाद त्रिशूली का यह इलाक़ा मलबे के ढेर में बदल जाएगा।

कुछ ही मिनटों में तेज़ लहर ने पूरे इलाके़ की तस्वीर बदल दी
कुछ ही मिनटों में तेज़ लहर ने पूरे इलाके़ की तस्वीर बदल दी

एक फोन आया और कुछ ही मिनट में बदल गई ज़िंदगी

‘गाँव कनेक्शन’ की टीम से बातचीत में सुजीत ने बताया कि घटना वाले दिन सुबह करीब 9 बजे वह ऑफिस के काम से त्रिशूली बाजार की ओर जा रहे थे। तभी उनके एक दोस्त ने फोन किया। दोस्त ने उन्हें बताया कि ऊपर से बाढ़ का पानी आ रहा है और जिस इलाके़ में वे हैं, वहाँ भी पानी पहुँच सकता है। सुजीत ने देर नहीं की। उन्होंने अपने दोस्तों और आसपास के लोगों को फोन करना शुरू किया और सुरक्षित जगह पर जाने को कहा। लेकिन वक़्त बहुत कम था। सुजीत के मुताबिक़, करीब 15-20 मिनट के अंदर तेज़ बहाव और मलबे ने इलाके़ को अपनी चपेट में ले लिया। जो जगह कुछ देर पहले लोगों की आवाजाही से भरी थी, वहाँ देखते ही देखते तबाही फैल गई। सुजीत ने बताया कि उनके करीब 60-65 दोस्त अब तक लापता हैं। उनके मुताबिक़, ये सभी लोग बाढ़ के दौरान इसी इलाके़ में फंस गए थे। नेटवर्क टूटने के बाद उनसे संपर्क नहीं हो सका।

‘सामान तो दूर, काग़ज़ भी नहीं बचा पाए’

‘गाँव कनेक्शन’ की टीम ने जब सुजीत से पूछा कि बाढ़ के दौरान लोग क्या-क्या बचा पाए, तो उनका जवाब उस पल की भयावहता समझाने के लिए काफ़ी था। उनके मुताबिक़, लोग कुछ भी नहीं बचा पाए। कई लोग ज़रूरी काग़ज़ात और जमीन के दस्तावेज़ लेने के लिए वापस जाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन हालात ऐसे थे कि वह सामान भी वहीं छूट गया। उस वक़्त किसी को घर, दुकान या सामान की चिंता नहीं थी। सामने सिर्फ़ एक ही लक्ष्य था किसी तरह जान बचाना।

सुजीत ने बताया कि बाढ़ से पहले नदी इस जगह से काफी दूर और नीचे थी। लोगों को नदी इतनी नज़दीक दिखाई भी नहीं देती थी। लेकिन इस बार ऊपर से आई तेज़ लहर अपने साथ भारी मात्रा में मलबा लेकर आई। पानी और मलबे ने इलाके़ की शक्ल बदल दी। सुजीत के मुताबिक़, पानी करीब 70-80 फीट तक ऊपर पहुंच गया था। दो मंज़िल तक के हिस्से भी इसकी चपेट में आ गए।

कुछ ही मिनटों में तेज़ लहर ने पूरे इलाके़ की तस्वीर बदल दी
कुछ ही मिनटों में तेज़ लहर ने पूरे इलाके़ की तस्वीर बदल दी

दो साल पहले से मिल रही थी खतरे की चेतावनी

सुजीत ने टीम को बताया कि संभावित ख़तरे को लेकर करीब दो साल पहले से चेतावनियां मिल रही थीं। चीन की तरफ़ से भी बांध टूटने की आशंका और सुरक्षित रहने को लेकर जानकारी आने की बात उन्होंने कही। लेकिन कब और कितनी बड़ी बाढ़ आएगी, इसका अंदाज़ा किसी को नहीं था। सुजीत बताते हैं कि लोगों को लगता था कि अगर पानी बढ़ा भी तो कुछ देर बाद कम हो जाएगा। लेकिन इस बार बाढ़ ने कुछ ही मिनटों में पूरा मंजर बदल दिया।

त्रिशूली से आगे जाने वाला रास्ता बंद

‘गाँव कनेक्शन’ की टीम ने मौके पर देखा कि बाढ़ ने मुख्य रास्तों और पुलों को भी बुरी तरह प्रभावित किया है। यही मार्ग रसुवा और आसपास के इलाक़ों की ओर जाता है और कैलाश मानसरोवर जाने वाले यात्रियों के लिए भी महत्वपूर्ण रास्ता है। कई जगहों पर सड़क पूरी तरह बंद है। जहां सड़क से पहुंचना संभव नहीं है, वहां लोगों को हेलीकॉप्टर के ज़रिए निकालने की कोशिश की जा रही है। बाढ़ से करीब 7 किलोमीटर आगे बेत्रावती बाजार भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है। सुजीत के मुताबिक़, वहां करीब 70-80 घर पूरी तरह तबाह हो गए हैं और बड़ी संख्या में लोग राहत शिविरों में रह रहे हैं।

नाम तलाश रहे परिवार
नाम तलाश रहे परिवार

अस्पताल पहुँचना भी बना चुनौती

इलाके़ का प्रमुख अस्पताल नदी के दूसरी तरफ़ है। बाढ़ में रास्ते और संपर्क मार्ग क्षतिग्रस्त होने से घायलों को अस्पताल पहुँचाना भी मुश्किल हो गया है। मौके पर राहत और संपर्क बहाल करने की कोशिशें जारी हैं। नेपाल सेना की ओर से बेली ब्रिज बनाने का काम भी शुरू किया गया है, ताकि लोगों की आवाजाही और राहत कार्य को आसान बनाया जा सके।
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