“हम अभी जीरो पर हैं…” नेपाल बाढ़ में घर-दुकान सब बहा, बच्चों के पास सिर्फ़ स्कूल ड्रेस बची |Ground Report
Mansi | Aug 31, 2026, 19:24 IST
नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ ने कई परिवारों की जिंदगियां तबाह कर दी हैं। राजेश सुचकार जैसे लोग वर्षों की मेहनत से बनाए घर और दुकान खो चुके हैं। बाढ़ ने सब कुछ इतनी तेजी से खत्म किया कि संभलने का मौका तक नहीं मिला। सरकारी मदद पहुँच रही है, लेकिन रास्ते टूटने से राहत कार्य में बाधा आ रही है।
राजेश सुचकार अपने उजड़े घर के बीच बचे सामान की तलाश करते हुए
नेपाल में बाढ़ अपने पीछे जो छोड़ गया है, वह सिर्फ़ कीचड़ और मलबा नहीं, बल्कि उन परिवारों की उजड़ी हुई ज़िंदगी है, जिन्होंने वर्षों की मेहनत से अपना घर-बार बसाया था। गाँव कनेक्शन की टीम जब इस बाढ़ प्रभावित इलाके में पहुँची, तो कई जगह घरों की जगह मलबे के ढेर थे। सड़कें और पुल टूट चुके थे और लोग अपने बचे-खुचे सामान के बीच अपनी पुरानी ज़िंदगी तलाश रहे थे।
इन्हीं लोगों में 40 वर्षीय राजेश सुचकार भी हैं। कभी जिस घर और बाज़ार से उनका पूरा जीवन जुड़ा था, वहाँ अब कुछ भी पहले जैसा नहीं बचा। राजेश बताते हैं कि उनका जन्म भी इसी इलाके में हुआ, यहीं खेले, पढ़े और बड़े हुए। लेकिन कुछ ही देर में आई भयावह बाढ़ ने उनके वर्षों पुराने घर, दुकान और उस नए मकान को भी बहा दिया, जिसमें उनका परिवार जल्द ही रहने वाला था।
राजेश के लिए सबसे मुश्किल बात यह है कि परिवार सुरक्षित होने के बावजूद उनके पास अब रोज़मर्रा की ज़रूरतों के लिए भी कुछ नहीं बचा है। वह बताते हैं, “अभी मेरे पास ये कपड़ा है, बस यही है। इसके सिवा और कुछ भी नहीं है।” उनके बच्चे बाढ़ के समय स्कूल गए हुए थे। जान बच गई, लेकिन उनके पास स्कूल की ड्रेस के अलावा पहनने के लिए दूसरा कपड़ा तक नहीं बचा है। घर में रखा सामान, कपड़े और दूसरी ज़रूरी चीज़ें सब पानी और मलबे में दब गईं। राजेश कहते हैं कि उनके और उनके भाई ने मिलकर वर्षों की मेहनत से यह सब बनाया था। लेकिन बाढ़ ने सब कुछ इतनी तेजी से खत्म किया कि संभलने का मौका तक नहीं मिला। “एक ही सेकंड में पूरा खत्म हो गया। हम लोग तो अभी जीरो पर हैं।
राजेश ने गाँव कनेक्शन की टीम को बताया, बाढ़ आने से करीब 35 मिनट पहले लोगों को सूचना मिली थी कि पानी तेजी से बढ़ रहा है और सभी सुरक्षित जगह पर चले जाएँ। इलाके में बाढ़ पहले भी आती रही है, लेकिन इस बार पानी का स्तर और उसकी रफ़्तार लोगों की सोच से कहीं ज्यादा थी। वह बताते हैं कि इस बार का मंजर उन्हें सुनामी जैसा लगा। पानी अपने साथ घरों के अलावा सड़क पर खड़े वाहनों और दूसरी चीज़ों को भी बहाकर ले गया। जिस जगह कभी बाजार में लोगों की आवाजाही रहती थी, वहाँ अब तबाही के निशान दिखाई दे रहे हैं।
बाढ़ के बाद भी राजेश अपने पुराने घर में लौटे हैं। दूसरी मंज़िल पर खड़े होकर वह नीचे दबे सामान को देखते हैं। उन्हें उम्मीद है कि स्टील की एक अलमारी के अंदर कुछ पैसे और सोना बचा हो सकता है। उनकी मां ने बताया था कि अलमारी में कुछ ज़रूरी सामान रखा था। इसी उम्मीद में राजेश मलबे के बीच उसे निकालने की कोशिश कर रहे हैं। उनका नया घर भी लगभग तैयार था। सिर्फ़ कुछ फिनिशिंग का काम बाकी था और परिवार 2 महीने में वहाँ शिफ्ट होने वाला था। लेकिन बाढ़ ने उस घर को भी नहीं छोड़ा। दुकान और पुराना घर भी तबाह हो गया।
इस तबाही के बीच सिर्फ़ घर और सामान खोने का दर्द नहीं है। कई परिवार अब भी अपनों की तलाश में हैं। विष्णु विश्वकर्मा के भाई भी बाढ़ के बाद से लापता हैं। उन्हें गायब हुए करीब 5 दिन हो चुके हैं, लेकिन अभी तक कोई संपर्क नहीं हो पाया है। परिवार लगातार उनके बारे में जानकारी जुटाने की कोशिश कर रहा है। विष्णु बताते हैं कि उन्हें सरकारी स्तर पर तलाश और रेस्क्यू की जानकारी मिल रही है, लेकिन अभी तक उनके भाई के बारे में कोई पक्की खबर नहीं मिली है।
बाढ़ के बाद सरकार की ओर से प्रभावित लोगों तक खाना और दूसरी ज़रूरी मदद पहुंचाई जा रही है। लेकिन कई इलाकों में रास्ते टूट जाने से राहत सामग्री और बचाव दलों के लिए पहुंचना मुश्किल है। कुछ जगहों पर लोग अब भी फंसे हुए हैं और हेलीकॉप्टर के जरिए रेस्क्यू किया जा रहा है। गाँव कनेक्शन की टीम भी ऐसे इलाकों तक पहुँचने की कोशिश कर रही है, जहां गाड़ियां नहीं जा सकतीं। टीम को कई जगह पैदल पहाड़ी रास्तों से आगे बढ़ना पड़ा, ताकि बाढ़ के बाद की असली तस्वीर लोगों तक पहुंचाई जा सके।
इन्हीं लोगों में 40 वर्षीय राजेश सुचकार भी हैं। कभी जिस घर और बाज़ार से उनका पूरा जीवन जुड़ा था, वहाँ अब कुछ भी पहले जैसा नहीं बचा। राजेश बताते हैं कि उनका जन्म भी इसी इलाके में हुआ, यहीं खेले, पढ़े और बड़े हुए। लेकिन कुछ ही देर में आई भयावह बाढ़ ने उनके वर्षों पुराने घर, दुकान और उस नए मकान को भी बहा दिया, जिसमें उनका परिवार जल्द ही रहने वाला था।
“हम लोग अभी जीरो पर हैं”
बाढ़ के बाद तबाही का मंजर दिखाता मलबे से भरा इलाका
बाढ़ से पहले मिली थी चेतावनी
नेपाल बाढ़ के बाद मलबे में तब्दील हुआ घर
घर के मलबे में बची चीज़ें तलाश रहे राजेश
इस तबाही के बीच सिर्फ़ घर और सामान खोने का दर्द नहीं है। कई परिवार अब भी अपनों की तलाश में हैं। विष्णु विश्वकर्मा के भाई भी बाढ़ के बाद से लापता हैं। उन्हें गायब हुए करीब 5 दिन हो चुके हैं, लेकिन अभी तक कोई संपर्क नहीं हो पाया है। परिवार लगातार उनके बारे में जानकारी जुटाने की कोशिश कर रहा है। विष्णु बताते हैं कि उन्हें सरकारी स्तर पर तलाश और रेस्क्यू की जानकारी मिल रही है, लेकिन अभी तक उनके भाई के बारे में कोई पक्की खबर नहीं मिली है।
वर्षों की कमाई और सामान बाढ़ के तेज़ बहाव में बह गया