Digital Census 2027: इस बार जनगणना में पूछे जाएंगे ये 33 सवाल, घर बैठे फॉर्म भरने की सुविधा; जानें क्या हैं नए नियम?

Preeti Nahar | Apr 02, 2026, 16:43 IST
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भारत में पहली बार पूरी तरह डिजिटल जनगणना शुरू हो गई है। यह प्रक्रिया 1 अप्रैल 2026 से शुरू हुई है। लोग अब मोबाइल ऐप या वेब पोर्टल पर खुद अपनी जानकारी भर सकते हैं। जानिए इस बार की जनगणना में पूछे जाएंगे कौैनसे सवाल?
Census 2027- जनगणना में घर और परिवार से जुड़े 33 सवाल पूछे जाएंगे
Census 2027- जनगणना में घर और परिवार से जुड़े 33 सवाल पूछे जाएंगे
Census 2027 portal login kaise kare: भारत में पहली बार पूरी तरह डिजिटल जनगणना की शुरुआत 1 अप्रैल 2026 की आधी रात से हो गई है। यह देश की 16वीं राष्ट्रीय जनगणना और आजादी के बाद 8वीं जनगणना है। इस बार पारंपरिक कागजी प्रक्रिया की जगह मोबाइल ऐप और वेब-आधारित सेल्फ-एन्यूमरेशन पोर्टल का इस्तेमाल किया जा रहा है। प्रधानमंत्री Narendra Modi, राष्ट्रपति Droupadi Murmu और गृह मंत्री Amit Shah ने खुद इस प्रक्रिया में भाग लेकर इसकी शुरुआत की।

कैसे चलेगी पूरी प्रक्रिया (दो चरणों में जनगणना)?

यह जनगणना जनगणना अधिनियम 1948 के तहत दो चरणों में पूरी होगी-

  1. पहला चरण (अप्रैल–सितंबर 2026) हाउस लिस्टिंग ऑपरेशन है, जिसमें घरों की स्थिति, सुविधाएं और संपत्ति से जुड़ी जानकारी ली जाएगी।
  2. दूसरा चरण (फरवरी 2027) जनसंख्या गणना का होगा, जिसमें लोगों की सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक जानकारी जुटाई जाएगी।
इस पूरी प्रक्रिया के लिए सरकार ने करीब ₹11,718 करोड़ का बजट मंजूर किया है।

Self Enumeration- घर बैठे खुद भरें जानकारी

इस बार सबसे बड़ा बदलाव सेल्फ-एन्यूमरेशन है। अब लोगों को सरकारी कर्मचारी के आने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। आप अपने मोबाइल नंबर से पोर्टल पर लॉग इन करके खुद ही अपनी जानकारी भर सकते हैं। यह सुविधा आपके इलाके में घर-घर सर्वे शुरू होने से 15 दिन पहले उपलब्ध हो जाती है। जानकारी भरने के बाद आपको एक SE ID (Self EnumerationID) मिलेगी, जिसे आप अधिकारी को दिखाकर अपना डेटा वेरिफाई करा सकते हैं।

टेक्नोलॉजी का बड़ा इस्तेमाल

इस डिजिटल जनगणना में टेक्नोलॉजी का बड़े पैमाने पर उपयोग किया जा रहा है। करीब 30 लाख फील्ड कर्मचारी मोबाइल ऐप (Android/iOS) के जरिए डेटा जुटाएंगे। यह ऐप 16 भाषाओं में काम करता है और इंटरनेट न होने पर भी ऑफलाइन डेटा सेव कर सकता है। साथ ही, पहली बार सभी घरों को डिजिटल लेआउट मैपिंग (DLM) के जरिए जियो-टैग किया जाएगा, जिससे डेटा ज्यादा सटीक होगा।

किन-किन राज्यों में शुरू हुई प्रक्रिया

पहले चरण में दिल्ली समेत 8 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। पहले ही दिन करीब 55,000 परिवारों ने ऑनलाइन स्व-गणना की। मिजोरम पूर्वोत्तर का पहला राज्य बना जहाँ यह प्रक्रिया शुरू हुई, जबकि लद्दाख जैसे ठंडे इलाकों में यह काम अक्टूबर 2026 से शुरू होगा।

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क्या-क्या जानकारी देनी होगी (33 सवाल)?

MRITUNJAY KUMAR NARAYAN, Registrar General and Census Commissioner, India के आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस बार जनगणना में घर और परिवार से जुड़े 33 सवाल पूछे जाएंगे, इनमें शामिल हैं:

क्रमांकजानकारी का विवरण
1भवन नंबर (नगर/स्थानीय प्राधिकरण द्वारा दिया गया)
2जनगणना मकान नंबर
3मकान के फर्श में इस्तेमाल मुख्य सामग्री
4मकान की दीवार में इस्तेमाल मुख्य सामग्री
5मकान की छत में इस्तेमाल मुख्य सामग्री
6मकान का उपयोग (रहने/दुकान/अन्य)
7मकान की स्थिति (अच्छी/सामान्य/खराब)
8परिवार क्रमांक
9परिवार में रहने वाले लोगों की कुल संख्या
10परिवार के मुखिया का नाम
11परिवार के मुखिया का लिंग
12क्या मुखिया SC/ST/अन्य वर्ग से है
13मकान का स्वामित्व (अपना/किराया/अन्य)
14रहने के लिए उपलब्ध कमरों की संख्या
15परिवार में विवाहित जोड़ों की संख्या
16पीने के पानी का मुख्य स्रोत
17पानी की उपलब्धता
18रोशनी का मुख्य स्रोत
19शौचालय की उपलब्धता
20शौचालय का प्रकार
21गंदे पानी की निकासी व्यवस्था
22स्नानघर की उपलब्धता
23रसोईघर और LPG/PNG कनेक्शन
24खाना बनाने का मुख्य ईंधन
25रेडियो/ट्रांजिस्टर
26टेलीविजन
27इंटरनेट सुविधा
28लैपटॉप/कंप्यूटर
29टेलीफोन/मोबाइल/स्मार्टफोन
30साइकिल/स्कूटर/मोटरसाइकिल/मोपेड
31कार/जीप/वैन
32परिवार द्वारा खाया जाने वाला मुख्य अनाज
33मोबाइल नंबर (सिर्फ जनगणना सूचना के लिए)

लिव-इन रिलेशनशिप पर नया नियम

इस बार जनगणना में एक बड़ा सामाजिक बदलाव भी किया गया है। अगर कोई कपल लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहा है और वह अपने रिश्ते को स्थिर मानता है, तो उसे विवाहित जोड़ा (Married Couple) के रूप में गिना जाएगा। यह पहली बार है जब जनगणना में इस तरह के रिश्तों को स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है।

डेटा रहेगा पूरी तरह सुरक्षित

जनगणना में दी गई सभी जानकारी पूरी तरह गोपनीय रहेगी। यह डेटा जनगणना अधिनियम 1948 के तहत सुरक्षित होता है। इसे न तो RTI के जरिए मांगा जा सकता है और न ही अदालत में सबूत के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है। इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त (RGI) करते हैं।

डिजिटल जनगणना से क्या होगा फायदा

डिजिटल सिस्टम के कारण डेटा तुरंत सर्वर पर अपलोड हो जाएगा और गलती या डुप्लीकेट एंट्री को तुरंत पकड़ा जा सकेगा। इससे सरकार को जल्दी और सटीक डेटा मिलेगा, जिससे स्कूल, अस्पताल और योजनाओं की बेहतर प्लानिंग हो सकेगी। पहले जहाँ डेटा आने में 2–3 साल लगते थे, अब उम्मीद है कि 2027 के अंत तक शुरुआती आंकड़े जारी हो जाएंगे।

सिर्फ गिनती नहीं, पूरी ‘डिजिटल तस्वीर’

यह जनगणना सिर्फ आबादी गिनने का काम नहीं है, बल्कि हर घर और परिवार की एक पूरी डिजिटल प्रोफाइल तैयार करेगी। घर की स्थिति से लेकर आपकी सुविधाओं और जीवनशैली तक, हर पहलू को इसमें शामिल किया जाएगा। इससे सरकार को देश की सही तस्वीर मिलेगी और नीतियां ज्यादा प्रभावी बन सकेंगी।
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