Digital Farming: अब डिजिटल होगी खेती की पहचान, 10.33 करोड़ किसान ID बनीं और करोड़ों भूखंडों का हुआ सर्वे
Mansi | Aug 11, 2026, 19:15 IST
कृषि क्षेत्र में डिजिटल प्रौद्योगिकी की शक्ति का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है, जैसे कि ड्रोन, सेंसर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस। सरकार ने कृषि मशीनीकरण को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय सहायता की व्यवस्था की है, जिससे किसान आईडी विकसित की जा रही है। यह आईडी किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ पहुँचाने में मदद करेगी।
कृषि में एआई, ड्रोन और डिजिटल तकनीकों के बढ़ते इस्तेमाल से खेती अब ज्यादा स्मार्ट और सटीक होती जा रही है
खेती अब सिर्फ़ हल, ट्रैक्टर और पारंपरिक तरीक़ों तक सीमित नहीं रह गई है। खेतों में ड्रोन, सेंसर, रिमोट सेंसिंग, एआई, इंटरनेट ऑफ़ थिंग्स (आईओटी) और डिजिटल तकनीकों का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। सरकार का कहना है कि इन तकनीकों की मदद से खेती को अधिक उत्पादक बनाने के साथ-साथ पानी, खाद, कीटनाशक और दूसरे संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे खेती की लागत कम करने और किसानों की मेहनत घटाने में भी मदद मिल रही है।
कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने लोकसभा में एक लिखित जवाब में कृषि क्षेत्र में बढ़ते तकनीकी इस्तेमाल की जानकारी दी। सरकार के मुताबिक़ आधुनिक तकनीक अब खेती के अलग-अलग चरणों में अपनी जगह बना रही है। इसका मक़सद सिर्फ़ उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि खेती को बदलते मौसम और बढ़ती चुनौतियों के लिहाज़ से ज़्यादा टिकाऊ बनाना भी है।
कृषि मशीनीकरण को बढ़ावा देने के लिए सरकार राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत कृषि मशीनीकरण उप-मिशन चला रही है। इसके ज़रिए किसानों को आधुनिक कृषि मशीनरी और उपकरण खरीदने के लिए वित्तीय सहायता दी जाती है। इसके अलावा कस्टम हायरिंग सेंटर, हाई-टेक हब और कृषि मशीनरी बैंक बनाने में भी मदद दी जा रही है। इस व्यवस्था का एक बड़ा फ़ायदा छोटे और सीमांत किसानों को हो सकता है। महंगी मशीनें हर किसान के लिए ख़रीदना आसान नहीं होतीं, ऐसे में कस्टम हायरिंग सेंटर जैसी सुविधाओं से उन्हें किराये पर आधुनिक मशीनें मिल सकती हैं। सरकार प्रशिक्षण, मशीनों के प्रदर्शन और परीक्षण के ज़रिए किसानों तथा कृषि कर्मियों की तकनीकी क्षमता बढ़ाने पर भी ज़ोर दे रही है।
कृषि ड्रोन भी खेती में तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल का एक अहम हिस्सा बन रहे हैं। सरकार ड्रोन की ख़रीद और प्रदर्शन के लिए सहायता उपलब्ध करा रही है। इनका इस्तेमाल खेतों में कीटनाशक और पोषक तत्वों के छिड़काव के साथ-साथ डिजिटल कृषि डेटा तैयार करने में किया जा रहा है। ड्रोन के इस्तेमाल से बड़े क्षेत्र में कम समय में काम करना आसान हो सकता है। साथ ही, ज़रूरत के हिसाब से छिड़काव करने से इनपुट के इस्तेमाल को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिल सकती है।
डिजिटल खेती की दिशा में किसान आईडी को भी महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है। सरकार के अनुसार, एग्रीस्टैक के तहत किसान रजिस्ट्री तैयार की जा रही है, ताकि किसानों को कृषि सेवाओं और सरकारी योजनाओं का लाभ अधिक पारदर्शी और लक्षित तरीक़े से मिल सके। 6 अगस्त 2026 तक देश में 10.33 करोड़ से अधिक किसान आईडी तैयार हो चुकी हैं। इन्हें पीएम-किसान, किसान क्रेडिट कार्ड के लिए जन समर्थ प्लेटफ़ॉर्म और न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसल ख़रीद जैसी किसान-केंद्रित सेवाओं से जोड़ने की सुविधा विकसित की जा रही है।
डिजिटल फसल सर्वेक्षण भी कृषि व्यवस्था को डेटा आधारित बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। इसमें खेत में बोई गई फसल की जानकारी फोटो और जियो-टैग के साथ डिजिटल रूप से दर्ज की जाती है। सरकार के मुताबिक़ खरीफ़ 2025 के दौरान 604 ज़िलों में 28.5 करोड़ से अधिक भूखंडों को डिजिटल फसल सर्वेक्षण के तहत कवर किया गया। इस डेटा से फसल उत्पादन का अनुमान लगाने, सरकारी ख़रीद की तैयारी करने, इनपुट की आपूर्ति और लॉजिस्टिक्स की बेहतर योजना बनाने में मदद मिल सकती है।
कृषि में एआई का इस्तेमाल भी बढ़ रहा है। भारत विस्तार नाम का बहुभाषी एआई आधारित डिजिटल सार्वजनिक ढाँचा किसानों को स्थानीय परिस्थितियों के हिसाब से कृषि सलाह और सरकारी योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराने के लिए तैयार किया गया है। सरकार के अनुसार, अब तक 5.9 लाख से अधिक किसानों को इससे सहायता मिली है और 93 लाख से अधिक किसान सवालों का समाधान किया गया है। इससे किसानों को अपनी भाषा में खेती से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराने की कोशिश को बढ़ावा मिला है।
तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के बावजूद बागवानी फसलों की कटाई का मशीनीकरण अभी चुनौती बना हुआ है। अलग-अलग फसलों की बनावट, पकने का समय, खेत का आकार और उपज की गुणवत्ता अलग होती है। इसलिए हर फसल के लिए एक जैसी मशीन का इस्तेमाल आसान नहीं है। इसी वजह से फसल के हिसाब से कटाई की तकनीक विकसित करने पर काम किया जा रहा है। एकीकृत बागवानी विकास मिशन के तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को आधुनिक उपकरण और मशीनरी अपनाने के लिए वित्तीय सहायता दी जाती है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद और उसके संस्थान भी इस क्षेत्र में शोध, परीक्षण, प्रशिक्षण और तकनीक के प्रसार पर काम कर रहे हैं।
आधुनिक कृषि अब कई क्षेत्रों के मेल से आगे बढ़ रही है। मशीन इंजीनियरिंग से लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स, रोबोटिक्स, कंप्यूटर, डेटा साइंस और ऑटोमेशन तक की तकनीकें खेती से जुड़ रही हैं। एआई, आईओटी, जीआईएस, जीएनएसएस, रिमोट सेंसिंग और डेटा एनालिटिक्स के इस्तेमाल से स्मार्ट कृषि उपकरण और सटीक खेती की प्रणालियाँ विकसित की जा रही हैं। कुल मिलाकर, खेती में तकनीक का यह बदलाव किसानों के लिए सिर्फ़ नई मशीनें आने तक सीमित नहीं है। अब खेतों से मिलने वाला डेटा भी खेती के फ़ैसलों का हिस्सा बन रहा है। सरकार का ज़ोर ऐसी तकनीकों पर है, जो उत्पादन बढ़ाने के साथ पानी और दूसरे संसाधनों की बचत करें, लागत कम करें और खेती को बदलती जलवायु के लिए अधिक मज़बूत बनाएँ।
कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने लोकसभा में एक लिखित जवाब में कृषि क्षेत्र में बढ़ते तकनीकी इस्तेमाल की जानकारी दी। सरकार के मुताबिक़ आधुनिक तकनीक अब खेती के अलग-अलग चरणों में अपनी जगह बना रही है। इसका मक़सद सिर्फ़ उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि खेती को बदलते मौसम और बढ़ती चुनौतियों के लिहाज़ से ज़्यादा टिकाऊ बनाना भी है।