IAS-PCS अफसर बनने का सपना अब गाँव में होगा पूरा! यूपी के इन 32 ज़िलों के 11,350 गाँवों में बनीं हाईटेक डिजिटल लाइब्रेरियाँ

Gaon Connection | Jul 11, 2026, 18:30 IST
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उत्तर प्रदेश सरकार ने ग्रामीण युवाओं को आईएएस, पीसीएस और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए 32 ज़िलों की 11,350 ग्राम पंचायतों में हाईटेक डिजिटल लाइब्रेरियाँ विकसित की हैं। प्रत्येक लाइब्रेरी पर करीब चार लाख रुपये खर्च किए गए हैं। इनमें 20 हज़ार से अधिक ई-बुक्स, वीडियो लेक्चर, ऑडियो सामग्री और डिजिटल क्विज उपलब्ध हैं। अब तक 10,406 ग्राम पंचायतों में पुस्तकें और 32 ज़िलों में किताबों व फर्नीचर की आपूर्ति पूरी हो चुकी है।

अब गाँव में भी मिलेगी शहर जैसी पढ़ाई
अब गाँव में भी मिलेगी शहर जैसी पढ़ाई
उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में रहने वाले होनहार युवाओं को अब प्रशासनिक अधिकारी बनने की तैयारी के लिए बड़े शहरों का रुख़ नहीं करना पड़ेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर राज्य सरकार ने गांवों में ही ज्ञान की एक नई डिजिटल दुनिया तैयार करने का एक मेगा प्लान शुरू किया है। इस महत्वाकांक्षी योजना के पहले चरण में प्रदेश के 32 जिलों की ग्राम पंचायतों में हाईटेक डिजिटल लाइब्रेरीज़ स्थापित की जा चुकी हैं जहाँ छात्र-छात्राओं को भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS), प्रांतीय सिविल सेवा (PCS) और अन्य सरकारी नौकरियों की प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए आधुनिक संसाधन मुहैय्या कराए जा रहे हैं।

इस अनूठी पहल के तहत ग्रामीण युवाओं को पारंपरिक किताबों के साथ-साथ तकनीक से जोड़ने के लिए लगभग 20 हज़ार डिजिटल शैक्षणिक सामग्रियाँ उपलब्ध कराई जा रही हैं। पंचायतीराज विभाग द्वारा तैयार कराई गई इन लाइब्रेरियों में छात्रों के लिए ई-बुक्स, वीडियो लेक्चर्स, ऑडियो कंटेंट और इंटरैक्टिव डिजिटल क्विज़ जैसी आधुनिक सुविधाएँ दी गई हैं। सरकार का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा के स्तर को ऊँचा उठाना, डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देना और गाँवों के बच्चों की प्रतिस्पर्धी क्षमता को मज़बूत करना है ताकि वे बिना किसी आर्थिक या भौगोलिक बाधा के देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षाओं में अपनी क़ाबलियत का लोहा मनवा सकें।

चार लाख की लागत से आईटी इक्यूपमेंट और फ़र्नीचर की व्यवस्था

पंचायतीराज निदेशक अमित कुमार सिंह के अनुसार, इस योजना के पहले चरण में 11,350 ग्राम पंचायतों को चुना गया है, जहाँ प्रत्येक डिजिटल लाइब्रेरी को विकसित करने पर लगभग चार लाख रुपए खर्च किए जा रहे हैं। हर एक लाइब्रेरी को पूरी तरह हाईटेक और आरामदायक बनाने के लिए बजट को बेहद व्यवस्थित तरीक़े से बाँटा गया है। इसमें करीब दो लाख रुपए की लागत से महत्वपूर्ण प्रतियोगी पुस्तकें उपलब्ध कराई गई हैं, जबकि तकनीकी रूप से सुदृढ़ बनाने के लिए 1.30 लाख रुपए के आधुनिक आईटी इक्यूपमेंट (उपकरण) दिए गए हैं। इसके साथ ही, छात्र-छात्राओं के बैठने और पढ़ने के अनुकूल माहौल तैयार करने के लिए लगभग 70 हज़ार रुपए की लागत से अत्याधुनिक फ़र्नीचर की व्यवस्था भी की गई है।

इस योजना के तहत ज़मीनी स्तर पर काम तेज़ी से चल रहा है, जिसके अंतर्गत अब तक 10,406 ग्राम पंचायतों की लाइब्रेरियों में किताबें पहुँचाई जा चुकी हैं, जबकि 9,372 ग्राम पंचायतों में बेहतरीन फ़र्नीचर सेटअप का काम भी पूरा कर लिया गया है। बाक़ी बची ग्राम पंचायतों की लाइब्रेरियों को भी चरणबद्ध तरीक़े से इन डिजिटल सुविधाओं से तेज़ी से जोड़ा जा रहा है।

ग्राम स्तर पर संचालन और 32 जिलों में शत-प्रतिशत आपूर्ति पूरी

इन सभी डिजिटल लाइब्रेरियों के सुचारू रूप से संचालन और सुरक्षा की ज़िम्मेदारी स्थानीय स्तर पर ग्राम प्रधान और ग्राम सचिव को सौंपी गई है, जो अपनी देखरेख में इसे संचालित करेंगे। इसके अलावा, योजना में किसी भी प्रकार की कोताही न हो और छात्रों को इसका पूरा लाभ मिले, इसके लिए संबंधित सहायक अधिकारी नियमित रूप से इन सेंटर्स की निगरानी और निरीक्षण करेंगे। सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से न केवल स्थानीय समुदायों की भागीदारी बढ़ेगी बल्कि ग्रामीण युवाओं को आगे बढ़ने के बेहतर और सुरक्षित अवसर भी मिलेंगे।

निदेशक ने बताया कि राज्य के 32 जिलों में पुस्तकों और फ़र्नीचर की 100 प्रतिशत यानी शत-प्रतिशत आपूर्ति का काम पूरी तरह मुकम्मल किया जा चुका है। जिन जिलों में यह काम पूरी तरह संपन्न हो चुका है, उनमें राजधानी लखनऊ के आस-पास सहित अयोध्या, प्रयागराज, गोरखपुर, सुल्तानपुर, अमेठी, आगरा, कानपुर देहात, गौतम बुद्ध नगर, बांदा, ग़ाज़ियाबाद, शाहजहाँपुर, देवरिया, हरदोई, शामली, एटा, सहारनपुर, फ़िरोज़ाबाद, कौशाम्बी, प्रतापगढ़, वाराणसी, ललितपुर, अमरोहा, कासगंज, इटावा, फ़र्रुख़ाबाद, बुलंदशहर, श्रावस्ती, रामपुर, लखीमपुर खीरी, जौनपुर, संभल और उन्नाव शामिल हैं। इन सभी जिलों के गाँवों में डिजिटल दुनिया पूरी तरह से तैयार हो चुकी है।
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