पंजाब में धान की खेती का बदला ट्रेंड! DSR बुवाई का रकबा 36% बढ़कर 4 लाख एकड़ के पार, 31000 किसानों ने अपनाई तकनीक
Gaon Connection | Jul 20, 2026, 14:23 IST
पंजाब में खरीफ़ 2026 के दौरान डायरेक्ट सीडेड राइस (डीएसआर) के तहत धान की खेती का रकबा 36 प्रतिशत बढ़कर 4 लाख एकड़ से अधिक हो गया है। 31,478 किसानों ने यह तकनीक अपनाई है। सरकार प्रति एकड़ 1,500 रुपये की सहायता दे रही है और लगभग 61 करोड़ रुपये प्रोत्साहन राशि वितरित किए जाने का अनुमान है। डीएसआर तकनीक से 15-20 प्रतिशत तक सिंचाई के पानी की बचत होती है, जिससे भूजल संरक्षण को बढ़ावा मिल रहा है।
पंजाब में डीएसआर मॉडल हुआ हिट!
पंजाब में पानी की बचत और भूजल संरक्षण की दिशा में अपनाई जा रही डायरेक्ट सीडेड राइस (डीएसआर) तकनीक को किसानों का पहले से कहीं अधिक समर्थन मिल रहा है। खरीफ़ 2026 सीज़न में राज्य में डीएसआर के तहत धान की बुआई का रकबा 36 प्रतिशत बढ़कर 4 लाख एकड़ से अधिक हो गया है। पिछले वर्ष की तुलना में यह वृद्धि काफ़ी तेज़ रही है, जिससे साफ़ है कि किसान अब पारंपरिक धान रोपाई के बजाय इस नई तकनीक को तेज़ी से अपना रहे हैं। राज्य सरकार भी इस बदलाव को बढ़ावा देने के लिए प्रति एकड़ आर्थिक सहायता और तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध करा रही है।
पंजाब के कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने बताया कि डीएसआर तकनीक न सिर्फ़ किसानों की लागत कम करने में मदद कर रही है, बल्कि सिंचाई के पानी की बड़ी बचत कर भूजल स्तर को सुरक्षित रखने में भी अहम भूमिका निभा रही है। सरकार का कहना है कि इस वर्ष हज़ारों किसानों ने इस तकनीक को अपनाया है और आने वाले वर्षों में इसका दायरा और बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए ज़िला स्तर पर दावों के सत्यापन और प्रोत्साहन राशि के समय पर भुगतान के निर्देश भी जारी किए गए हैं।
कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां के मुताबिक, सत्यापित अंतिम आँकड़ों के अनुसार खरीफ़ 2026 सीज़न में राज्य के 31,478 पंजीकृत किसानों ने 4 लाख एकड़ से अधिक क्षेत्र में डायरेक्ट सीडेड राइस (डीएसआर) तकनीक अपनाई। वर्ष 2025 में यह रकबा 2.94 लाख एकड़ था, यानी इस बार डीएसआर क्षेत्र में 36 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। राज्य सरकार डीएसआर के तहत धान की खेती करने वाले किसानों को 1,500 रुपये प्रति एकड़ का प्रोत्साहन दे रही है। इस योजना के तहत किसानों को कुल मिलाकर लगभग 61 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता दिए जाने का अनुमान है।
गुरमीत सिंह खुड्डियां ने कहा कि डीएसआर अपनाने में आई तेज़ बढ़ोतरी इस बात का संकेत है कि किसान अब इसे पारंपरिक धान रोपाई का टिकाऊ और बेहतर विकल्प मान रहे हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 में डीएसआर क्षेत्र में 16 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी, जबकि इस बार यह बढ़कर 36 प्रतिशत हो गई है।
कृषि मंत्री ने कहा कि डीएसआर तकनीक से प्रति एकड़ 15 से 20 प्रतिशत तक सिंचाई के पानी की बचत होती है। पंजाब जैसे राज्य, जहाँ भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है, वहाँ यह तकनीक जल संरक्षण के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो रही है। ज़िलावार आँकड़ों के अनुसार, फ़ाज़िल्का डीएसआर अपनाने में राज्य में पहले स्थान पर रहा। यहाँ 12,063 किसानों ने 1,55,422.77 एकड़ क्षेत्र में डीएसआर तकनीक से धान की बुआई की।
दूसरे स्थान पर श्री मुक्तसर साहिब रहा, जहाँ 7,345 किसानों ने 1,06,038.81 एकड़ क्षेत्र में डीएसआर अपनाया। इसके बाद फ़िरोज़पुर में 1,929 किसानों ने 38,088.59 एकड़ क्षेत्र में इस तकनीक से खेती की। बठिंडा और संगरूर भी डीएसआर क्षेत्रफल के मामले में राज्य के शीर्ष पाँच ज़िलों में शामिल रहे।
गुरमीत सिंह खुड्डियां ने कहा कि राज्य सरकार आने वाले वर्षों में डीएसआर तकनीक का दायरा और बढ़ाने के लिए किसानों को लगातार तकनीकी मार्गदर्शन और खेत स्तर पर सहायता उपलब्ध करा रही है। उन्होंने ज़िला स्तर के कृषि अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि डीएसआर योजना के तहत किसानों द्वारा किए गए दावों का जल्द सत्यापन किया जाए और पात्र किसानों को प्रोत्साहन राशि समय पर उपलब्ध कराई जाए।
उन्होंने कहा कि सरकार की यह पहल केवल किसानों को आर्थिक सहायता देने तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्य में लंबे समय तक भूजल संरक्षण सुनिश्चित करना भी इसका प्रमुख उद्देश्य है।
पारंपरिक खेती में पहले नर्सरी में धान के पौधे तैयार किए जाते हैं, फिर भरे हुए खेतों में उनकी रोपाई की जाती है जिसके लिए बहुत ज़्यादा पानी की ज़रूरत होती है। इसके उलट, डायरेक्ट सीडेड राइस (DSR) तकनीक में पौधों को सीधे खेत में बोया जाता है। इसमें न तो रोपाई की झंझट होती है और न ही खेत में चौबीस घंटे पानी भरकर रखने की मजबूरी।
पंजाब के कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने बताया कि डीएसआर तकनीक न सिर्फ़ किसानों की लागत कम करने में मदद कर रही है, बल्कि सिंचाई के पानी की बड़ी बचत कर भूजल स्तर को सुरक्षित रखने में भी अहम भूमिका निभा रही है। सरकार का कहना है कि इस वर्ष हज़ारों किसानों ने इस तकनीक को अपनाया है और आने वाले वर्षों में इसका दायरा और बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए ज़िला स्तर पर दावों के सत्यापन और प्रोत्साहन राशि के समय पर भुगतान के निर्देश भी जारी किए गए हैं।
31 हज़ार से ज़्यादा किसानों ने अपनाई डीएसआर तकनीक, 4 लाख एकड़ से अधिक क्षेत्र में हुई बुआई
गुरमीत सिंह खुड्डियां ने कहा कि डीएसआर अपनाने में आई तेज़ बढ़ोतरी इस बात का संकेत है कि किसान अब इसे पारंपरिक धान रोपाई का टिकाऊ और बेहतर विकल्प मान रहे हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 में डीएसआर क्षेत्र में 16 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी, जबकि इस बार यह बढ़कर 36 प्रतिशत हो गई है।
भूजल संरक्षण में अहम भूमिका निभा रही डीएसआर, फ़ाज़िल्का सबसे आगे
दूसरे स्थान पर श्री मुक्तसर साहिब रहा, जहाँ 7,345 किसानों ने 1,06,038.81 एकड़ क्षेत्र में डीएसआर अपनाया। इसके बाद फ़िरोज़पुर में 1,929 किसानों ने 38,088.59 एकड़ क्षेत्र में इस तकनीक से खेती की। बठिंडा और संगरूर भी डीएसआर क्षेत्रफल के मामले में राज्य के शीर्ष पाँच ज़िलों में शामिल रहे।
सरकार दे रही तकनीकी सहायता, किसानों को समय पर मिलेगी प्रोत्साहन राशि
उन्होंने कहा कि सरकार की यह पहल केवल किसानों को आर्थिक सहायता देने तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्य में लंबे समय तक भूजल संरक्षण सुनिश्चित करना भी इसका प्रमुख उद्देश्य है।
क्या है डीएसआर तकनीक और इसके फ़ायदे?
- ड्राय डीएसआर (Dry DSR): इस विधि से प्रति एकड़ लगभग 11 से 12 लाख लीटर पानी की बचत होती है।
- वेट डीएसआर (Wet DSR): इससे प्रति एकड़ लगभग 4 से 5.5 लाख लीटर पानी बचाया जा सकता है।