सुबह चाय के साथ 2-4 बिस्किट? जानिए क्यों रोज़ का ये नाश्ता सेहत पर पड़ सकता है भारी, डाइटीशियन ने बताया क्या खाना चाहिए
Mansi | Aug 13, 2026, 13:23 IST
सुबह की शुरुआत चाय और बिस्किट से करना एक स्वास्थ्यवर्धक विकल्प नहीं है। पैकेट वाले बिस्किट में रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट और हानिकारक फैट की मात्रा ज्यादा होती है। इसके बजाय, नाश्ते में साबुत अनाज, दालें, फल और ताजगी भरी सब्जियाँ शामिल करनी चाहिए। सुबह सात से आठ बजे नाश्ता करना और शाम सात बजे तक खाने का समय रखना बेहतर होता है।
डाइटीशियन के अनुसार, नाश्ते में चाय-बिस्किट की जगह प्रोटीन और फाइबर से भरपूर चीज़ें शामिल करें
सुबह उठते ही चाय और उसके साथ दो-चार बिस्किट कई घरों में दिन की शुरुआत इसी तरह होती है। जल्दी ऑफिस जाना हो, बच्चों को स्कूल भेजना हो या सुबह के साय नाश्ता निपटाने हों, ऐसे में चाय-बिस्किट को सबसे सरल नाश्ता माना जाता है। लेकिन क्या रोज़ केवल यही नाश्ता शरीर के लिए पर्याप्त है? क्या इससे पूरे दिन की गतिविधियों के लिए आवाश्यक एनर्जी और पोषण मिल पाता है?
स्वरूप रानी हॉस्पिटल प्रयागराज की कंसल्टेंट डीइटीशियन और डायबिटीज़ एजुकेटर कौसेन हफ़ीज़ ने बताया बिस्किट को कभी- कभार खाया जा सकता है, लेकिन इसे रोज़ नाश्ते का विकल्प के रूप में अपनाना सही नहीं है। पैकेड़ बिस्किट में रिफ़ाइंट कार्बोहाइट्रेड, एक्स्ट्रा शुगर, अनहेल्दी फैट और सोडियम की मात्रा अधिक होती है, जबकि प्रोटीन व अन्य आवश्यक पोषक तत्व अपेक्षाकृत कम होते हैं।
![डॉ. कौसैन हफ़ीज़]()
चाय के साथ बिस्किट खाने से कुछ समय के लिए तृप्ति अनुभव हो सकती है, लेकिन यह संतुलित आहार नहीं है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भी संतुलित आहार में साबुत आनाज, दालें, फल, सब्जियाँ और नट्स को शामिल को कहता है। 10 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्तियों के लिए रोज़ कम से कम 400 ग्राम फल और सब्ज़ियों के सेवन की सलाह दी जाती है। इसिलिए अगर नाश्ता केवल बिस्किट और चाय तक सीमित है, तो उसमें प्रोटीन, फाइबर और अन्य आवश्यक पोषण तत्वों की कमी रह जाती है। इसका मतलब यह नहीं है कि बिस्किट खाना पूरी तरह वर्जित है, बल्कि इसे कभी-कभार सीमित मात्रा में लेना स्वास्थ्य की दृष्टी से उचित माना जाता है।
डीइटीशियन कौसेन हफ़ीज़ के अनुसार सुबह के नाश्ते में कार्बोहाइड्रेट के साथ-साथ प्रोटीन और फाइबर का समावेश ज़रूरी है। इसके लिए महंगे या एक्सोटिक विक्लपों की आवश्यकता नहीं होती। घर में उपलब्ध सामान्य खाने की चीज़ों से संतुलित नाश्ता तैयार किया जा सकता है। मूंग दाला चीला, दलिया, मूंगफली के साथ पोहा, अंकुरित मूंग, भुना चना जैसे विकल्प उपयुक्त हैं। अंडा सेवन करने वाले व्यक्ति इसे भी नाश्ते में शामिल कर सकते हैं।
अगर समय सीमित हो, तो भुना चना, मखाना, मूंखफली या मौसमी फल उपयोगी हो सकते हैं। WHO के अनुसार, कार्बोहाइड्रेट का प्रमुख स्त्रोत साबुत अनाज, सब्ज़ियाँ, फल और दलें होनी चाहिए। साथ ही पर्याप्त मात्रा में फाइबर का सेवन भी ज़रूरी है।
डाइटीशियन के अनुसार अगर कोई व्यक्ति सुबह लगभग 7 से 8 बजे के बीच जागता है, तो पानी पीने से 20 से 30 मिनट के भीतर नाश्ता किया जा सकता है। हमें नाश्ता लगातार टालने की आदत से बचना चाहिए। कुछ अध्ययनों में नाश्ता ने करने की और बढ़ते वजन बीच संबंध पाया गया है, हालांकि इसे सीधे मोटापे का कारण नहीं माना जा सकता, क्योंकि विभिन्न अध्ययनों के निष्कर्ष भिन्न हैं।
खाने के बीच अत्यधिक अंतराल से बचने के लिए एक नियमित दिनचर्या अपनाना लाभकारी होता है। डाइटीशियन अनुसार, अगर नाश्ता सुबह 7 से 8 बजे के बीच किया गया है, तो लंच लगभग 1:30 से 2 बजे के बीच किया जा सकता है। लंच में केवल चावल या रोटी की मात्रा बढ़ाने के बजाय दाल, चना, मूंग, सब्ज़ियाँ और अन्य प्रोटीन स्रोतों को शामिल करना अधिक संतुलित विकल्प है। भारतीय आहार में अक्सर अनाज की मात्रा अधिक हो जाती है, इसलिए प्लेट में सब्ज़ियों और प्रोटीन का अनुपात बढ़ाना अधिक स्वास्थ्यकर माना जाता है।
डाइटीशियन के अनुसार, रात के खाने को देर तक टालने के बजाय शाम लगभग 7 बजे तक कर लेना बेहतर होता है। डिनर को लंच की तुलना में हल्का रखा जा सकता है। खाने के बाद लगभग 10 मिनट टहलने की भी सलाह दी जाती है। हालांकि, भोजन की मात्रा और समय व्यक्ति की दिनचर्या एवं स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करता है।अगर दिनचर्या इस प्रकार हो-नाश्ता 7–8 बजे, लंच 1:30–2 बजे और डिनर लगभग 7 बजे, तो एक संतुलित फूड पैटर्न बन सकता है।
कई लोगों को सुबह चाय या नाश्ते के साथ मीठा खाने की आदत होती है। ऐसे में चीनी का सेवन सीमित रखना बेहतर होता है। दलिया या अन्य नाश्ते में मिठास के लिए कभी-कभी खजूर या किशमिश का उपयोग किया जा सकता है। हालाँकि, खजूर, किशमिश, शहद या गुड़ को भी सीमित मात्रा में ही खाना चाहिए। WHO के अनुसार, फ्री शुगर का सेवन कुल डेली एनर्जी से 10% से कम होना चाहिए।
शहरी क्षेत्रों में व्यस्त जीवनशैली के कारण पैकेज्ड फूड पर निर्भरता बढ़ी है। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में भी कई बार लोग नाश्ता देर से करते हैं या सीधे दोपहर के भोजन पर निर्भर रहते हैं। डाइटीशियन ने बताया, नाश्ता जटिल या महंगा होना आवश्यक नहीं है। घर में उपलब्ध साधारण समानों से भी पौष्टिक नाश्ता तैयार किया जा सकता है। अंकुरित अनाज, दाल, चना, दलिया, पोहा और मूंगफली जैसे विकल्प कम लागत में भी संतुलित आहार प्रदान कर सकते हैं।
प्रश्न केवल चाय-बिस्किट छोड़ने का नहीं है, बल्कि यह है कि सुबह के नाश्ते में क्या शामिल किया जा रहा है। ऐसा नाश्ता चुनना चाहिए जो न केवल पेट भरने में सहायक हो, बल्कि शरीर को आवश्यक प्रोटीन, फाइबर और अन्य पोषक तत्व भी प्रदान करे। क्योंकि दिन की शुरुआत जितनी संतुलित होगी, उसका सकारात्मक प्रभाव पूरी दिनचर्या पर उतना ही अधिक पड़ेगा। सेहत से जुड़ी ऐसी ही उपयोगी जानकारी के लिए जुड़े रहिए गाँव कनेक्शन के साथ।
स्वरूप रानी हॉस्पिटल प्रयागराज की कंसल्टेंट डीइटीशियन और डायबिटीज़ एजुकेटर कौसेन हफ़ीज़ ने बताया बिस्किट को कभी- कभार खाया जा सकता है, लेकिन इसे रोज़ नाश्ते का विकल्प के रूप में अपनाना सही नहीं है। पैकेड़ बिस्किट में रिफ़ाइंट कार्बोहाइट्रेड, एक्स्ट्रा शुगर, अनहेल्दी फैट और सोडियम की मात्रा अधिक होती है, जबकि प्रोटीन व अन्य आवश्यक पोषक तत्व अपेक्षाकृत कम होते हैं।
डॉ. कौसैन हफ़ीज़
क्यों पर्याप्त नहीं है केवल चाय-बिस्किट?
सुबह के नाश्ते में क्या शामिल करें?
अगर समय सीमित हो, तो भुना चना, मखाना, मूंखफली या मौसमी फल उपयोगी हो सकते हैं। WHO के अनुसार, कार्बोहाइड्रेट का प्रमुख स्त्रोत साबुत अनाज, सब्ज़ियाँ, फल और दलें होनी चाहिए। साथ ही पर्याप्त मात्रा में फाइबर का सेवन भी ज़रूरी है।
खाने का सही समय क्या है?
खाने के बीच अत्यधिक अंतराल से बचने के लिए एक नियमित दिनचर्या अपनाना लाभकारी होता है। डाइटीशियन अनुसार, अगर नाश्ता सुबह 7 से 8 बजे के बीच किया गया है, तो लंच लगभग 1:30 से 2 बजे के बीच किया जा सकता है। लंच में केवल चावल या रोटी की मात्रा बढ़ाने के बजाय दाल, चना, मूंग, सब्ज़ियाँ और अन्य प्रोटीन स्रोतों को शामिल करना अधिक संतुलित विकल्प है। भारतीय आहार में अक्सर अनाज की मात्रा अधिक हो जाती है, इसलिए प्लेट में सब्ज़ियों और प्रोटीन का अनुपात बढ़ाना अधिक स्वास्थ्यकर माना जाता है।
डाइटीशियन के अनुसार, रात के खाने को देर तक टालने के बजाय शाम लगभग 7 बजे तक कर लेना बेहतर होता है। डिनर को लंच की तुलना में हल्का रखा जा सकता है। खाने के बाद लगभग 10 मिनट टहलने की भी सलाह दी जाती है। हालांकि, भोजन की मात्रा और समय व्यक्ति की दिनचर्या एवं स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करता है।अगर दिनचर्या इस प्रकार हो-नाश्ता 7–8 बजे, लंच 1:30–2 बजे और डिनर लगभग 7 बजे, तो एक संतुलित फूड पैटर्न बन सकता है।
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ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में नाश्ते की आदतों में अंतर
प्रश्न केवल चाय-बिस्किट छोड़ने का नहीं है, बल्कि यह है कि सुबह के नाश्ते में क्या शामिल किया जा रहा है। ऐसा नाश्ता चुनना चाहिए जो न केवल पेट भरने में सहायक हो, बल्कि शरीर को आवश्यक प्रोटीन, फाइबर और अन्य पोषक तत्व भी प्रदान करे। क्योंकि दिन की शुरुआत जितनी संतुलित होगी, उसका सकारात्मक प्रभाव पूरी दिनचर्या पर उतना ही अधिक पड़ेगा। सेहत से जुड़ी ऐसी ही उपयोगी जानकारी के लिए जुड़े रहिए गाँव कनेक्शन के साथ।