Ebola outbreak: WHO ने कांगो-युगांडा में घोषित की वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल, 300 से अधिक मामले, 88 मौतें
Preeti Nahar | May 17, 2026, 11:40 IST
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कांगो और युगांडा में इबोला के फैलने पर वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया है। दोनों देशों में 300 से अधिक मामले और 88 मौतें दर्ज की गई हैं। यह दुर्लभ बुंडीबुग्यो स्ट्रेन से जुड़ा है। WHO का कहना है कि इस बार संक्रमण को रोकना एक बड़ी चुनौती है, जानिए क्यों इबोला बन रहा है इस बार चुनौती?
congo ibola
Ebola outbreak: विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी World Health Organization ने कांगो और युगांडा में फैल रहे इबोला संक्रमण को लेकर वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित कर दिया है। WHO के महानिदेशक Tedros Adhanom Ghebreyesus ने बताया कि दोनों देशों में अब तक 300 से ज्यादा संदिग्ध मामले सामने आए हैं, जबकि 88 लोगों की मौत हो चुकी है। यह संक्रमण इबोला के दुर्लभ “बुंडीबुग्यो” स्ट्रेन से जुड़ा है, जिसके लिए फिलहाल कोई स्वीकृत वैक्सीन या इलाज उपलब्ध नहीं है।
AP की रिपोर्ट के मुताबिक, सबसे ज्यादा मामले कांगो के पूर्वी इतुरी प्रांत में मिले हैं, जहाँ तेजी से सामुदायिक संक्रमण फैलने की आशंका जताई गई है। युगांडा की राजधानी कंपाला में भी दो संक्रमित मरीज पाए गए हैं, जिनमें एक की मौत हो चुकी है। WHO ने कहा है कि फिलहाल यह स्थिति कोविड-19 जैसी महामारी नहीं है, लेकिन संक्रमण के फैलाव और वास्तविक आंकड़ों को लेकर गंभीर अनिश्चितता बनी हुई है।
WHO ने अंतरराष्ट्रीय सीमाएं बंद न करने की सलाह दी है, लेकिन प्रभावित देशों में निगरानी, स्क्रीनिंग और कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग तेज कर दी गई है। अफ्रीका CDC और WHO की टीमें प्रभावित इलाकों में मेडिकल सपोर्ट और आपात संसाधन पहुंचाने में जुटी हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि संघर्षग्रस्त इलाकों और कमजोर स्वास्थ्य व्यवस्था के कारण इस बार संक्रमण को रोकना बड़ी चुनौती बन सकता है।
इबोला वायरस का संक्रमण शुरू होने पर मरीज में तेज बुखार, सिरदर्द, कमजोरी, मांसपेशियों में दर्द और गले में खराश जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। कुछ दिनों बाद उल्टी, दस्त, पेट दर्द और शरीर के अंदर या बाहर रक्तस्राव जैसी गंभीर समस्याएं भी हो सकती हैं। कई मामलों में मरीज की हालत तेजी से बिगड़ जाती है और समय पर इलाज न मिलने पर जान का खतरा बढ़ जाता है।
इबोला संक्रमण से बचने के लिए संक्रमित व्यक्ति के संपर्क से दूरी बनाना बेहद जरूरी है। बार-बार हाथ धोना, संक्रमित खून या शरीर के तरल पदार्थों को छूने से बचना और मास्क-ग्लव्स जैसे सुरक्षा उपकरणों का इस्तेमाल करना चाहिए। संक्रमित क्षेत्रों की यात्रा से बचने और किसी भी संदिग्ध लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करने की सलाह दी जाती है।
भारत में इबोला वायरस का संदिग्ध मामला पहले सामने आ चुका है, लेकिन देश में बड़े स्तर पर इसका संक्रमण नहीं फैला। वर्ष 2014 में पश्चिम अफ्रीका में इबोला महामारी के दौरान World Health Organization ने वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया था। उसी दौरान लाइबेरिया से भारत लौटे एक व्यक्ति में इबोला वायरस के अंश पाए गए थे। उसे दिल्ली एयरपोर्ट पर स्क्रीनिंग के बाद अलग निगरानी में रखा गया था। बाद में स्वास्थ्य अधिकारियों ने स्थिति को नियंत्रित कर लिया और संक्रमण फैलने नहीं दिया।
इसके अलावा भारत में अब तक इबोला का कोई बड़ा सामुदायिक प्रकोप दर्ज नहीं हुआ है। Ministry of Health and Family Welfare और एयरपोर्ट स्वास्थ्य एजेंसियाँ समय-समय पर अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की स्क्रीनिंग और निगरानी करती रही हैं, खासकर अफ्रीकी देशों से आने वाले यात्रियों पर। विशेषज्ञों का मानना है कि सतर्कता और त्वरित आइसोलेशन की वजह से भारत में इबोला को फैलने से रोका गया।
इबोला के सबसे ज्यादा मामले कांगो में
कमजोर स्वास्थ्य व्यवस्था के कारण संक्रमण रोकना बड़ी चुनौती
इबोला संक्रमण के लक्षण
इबोला से बचाव
भारत में इबोला के मामले
इसके अलावा भारत में अब तक इबोला का कोई बड़ा सामुदायिक प्रकोप दर्ज नहीं हुआ है। Ministry of Health and Family Welfare और एयरपोर्ट स्वास्थ्य एजेंसियाँ समय-समय पर अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की स्क्रीनिंग और निगरानी करती रही हैं, खासकर अफ्रीकी देशों से आने वाले यात्रियों पर। विशेषज्ञों का मानना है कि सतर्कता और त्वरित आइसोलेशन की वजह से भारत में इबोला को फैलने से रोका गया।