₹9 तक पहुँची अंडे की कीमत, चिकन भी महंगा! जानिए पोल्ट्री की बढ़ती कीमतों के पीछे क्या है असली वजह
Gaon Connection | Aug 29, 2026, 18:16 IST
भारत में इस साल अंडे और चिकन की कीमतें बढ़ी हैं। इसकी बड़ी वजह पोल्ट्री फीड की बढ़ती लागत है। फीड में मक्का और सोयाबीन मील अहम सामग्री हैं और उत्पादन लागत का करीब दो-तिहाई हिस्सा फीड पर आता है। मक्के की इथेनॉल में बढ़ती मांग, सोयाबीन मील की सीमित आपूर्ति और मौसम की चुनौतियों ने लागत बढ़ाई है। तेज़ गर्मी से पोल्ट्री उत्पादन भी प्रभावित हुआ। जब तक फीड कीमतें स्थिर नहीं होतीं, पोल्ट्री उत्पाद महंगे रह सकते हैं।
इस साल अंडे और चिकन क्यों महंगे हुए?
भारत में इस साल अंडे और चिकन की कीमतों में तेज़ बढ़ोतरी ने उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ाई है। मौसम में बदलाव और मौसमी आपूर्ति पर दबाव को इसकी एक वजह माना जा रहा है, लेकिन कीमत बढ़ने की एक बड़ी वजह पोल्ट्री फीड की बढ़ती लागत भी है। मक्का, सोयाबीन मील और फीड में इस्तेमाल होने वाली दूसरी चीज़ों के महंगे होने से अंडे और चिकन के उत्पादन की लागत बढ़ गई है।
पोल्ट्री उद्योग में फीड उत्पादन लागत का सबसे बड़ा हिस्सा है। अंडे और ब्रॉयलर चिकन के उत्पादन की लागत में फीड की हिस्सेदारी करीब दो-तिहाई है। इसलिए कृषि जिंसों की कीमतों में बढ़ोतरी का असर लंबे समय तक किसान और पोल्ट्री उत्पादक अपने स्तर पर नहीं झेल सकते। जब फीड महंगा होता है तो इसका असर उत्पादन लागत से होते हुए अंततः अंडे और चिकन की कीमतों पर दिखाई देता है।
मक्का पोल्ट्री फीड का अहम हिस्सा है और इसकी हिस्सेदारी करीब 55-60 प्रतिशत बताई गई है। सोयाबीन मील प्रोटीन का प्रमुख स्रोत है। बिजनेस लाइन की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, पोल्ट्री फीड की कीमत करीब 15 प्रतिशत बढ़कर 4,400 रुपये प्रति क्विंटल हो गई, जो एक साल पहले 3,600 रुपये थी। सोयाबीन मील की कीमत 62,000-65,000 रुपये प्रति टन बनी हुई है। उद्योग के मुताबिक़, नई फसल आने से पहले करीब 15 लाख टन की कमी हो सकती है। मक्के की मांग इथेनॉल बनाने में भी बढ़ी है। इससे उपलब्ध मक्के के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ी और फीड की लागत पर दबाव आया।
सोयाबीन उत्पादन में कमी और बारिश को लेकर अनिश्चितता ने भी आपूर्ति की चिंता बढ़ाई है। जून में ऑल इंडिया पोल्ट्री ब्रीडर्स एसोसिएशन ने कहा था कि बढ़ती सोयाबीन मील लागत और कम मार्जिन के कारण उद्योग के एक बड़े हिस्से ने उत्पादन 25 प्रतिशत तक घटाने की योजना बनाई है। तेज़ गर्मी ने भी पोल्ट्री उत्पादन को प्रभावित किया। अधिक तापमान से पक्षियों पर तनाव पड़ता है, जिससे फीड खाने, बढ़ने और अंडे देने पर असर पड़ सकता है। अनियमित बारिश से मक्का और सोयाबीन की उपलब्धता को लेकर भी चिंता बढ़ी।
जुलाई में हैदराबाद में फार्म से निकलने वाले अंडों की कीमत महीने-दर-महीने 15 प्रतिशत और साल-दर-साल करीब 40 प्रतिशत बढ़ी। कई बाजारों में खुदरा अंडा 8.5-9 रुपये तक पहुंच गया। गर्मी से ब्रॉयलर उत्पादन प्रभावित होने के कारण चिकन की कीमतों पर भी दबाव पड़ा।
पशुपालन एवं डेयरी विभाग के अनुसार, भारत में 2024-25 में 149.11 अरब अंडों का उत्पादन हुआ। इसमें वाणिज्यिक पोल्ट्री की हिस्सेदारी 84.49 प्रतिशत थी।मौजूदा महंगाई के पीछे महंगा फीड, मक्के की बढ़ती मांग, सोयाबीन मील की सीमित आपूर्ति, मौसम संबंधी चुनौतियाँ और कुछ जगहों पर कम उत्पादन जैसे कारण हैं। उपभोक्ताओं को इसका असर अंडे और चिकन की कीमत में दिख रहा है, जबकि पोल्ट्री किसानों के लिए महंगाई की शुरुआत पक्षियों को खिलाने की लागत से होती है। जब तक फीड की कीमतें स्थिर नहीं होतीं और फसलों की आपूर्ति को लेकर चिंता कम नहीं होती, पोल्ट्री कीमतों पर कृषि बाज़ार और मौसम का असर बना रह सकता है।
पोल्ट्री उद्योग में फीड उत्पादन लागत का सबसे बड़ा हिस्सा है। अंडे और ब्रॉयलर चिकन के उत्पादन की लागत में फीड की हिस्सेदारी करीब दो-तिहाई है। इसलिए कृषि जिंसों की कीमतों में बढ़ोतरी का असर लंबे समय तक किसान और पोल्ट्री उत्पादक अपने स्तर पर नहीं झेल सकते। जब फीड महंगा होता है तो इसका असर उत्पादन लागत से होते हुए अंततः अंडे और चिकन की कीमतों पर दिखाई देता है।
मक्का महंगा तो फीड की लागत बढ़ी
सोयाबीन और गर्मी ने बढ़ाई परेशानी
जुलाई में हैदराबाद में फार्म से निकलने वाले अंडों की कीमत महीने-दर-महीने 15 प्रतिशत और साल-दर-साल करीब 40 प्रतिशत बढ़ी। कई बाजारों में खुदरा अंडा 8.5-9 रुपये तक पहुंच गया। गर्मी से ब्रॉयलर उत्पादन प्रभावित होने के कारण चिकन की कीमतों पर भी दबाव पड़ा।