गिरेगा भू-जलस्तर या डराएगी बाढ़, प्रभावित होंगी मसालों-नारियल जैसी खेती या बढ़ेगी बिजली की माँग! जानें El Nino 2026 का भारत पर असर
Preeti Nahar | May 27, 2026, 18:41 IST
साल 2026 में अल नीनो की दस्तक भारत में नई चुनौतियां लेकर आएगी। कई राज्यों में लू से राहत की उम्मीद नहीं है तो कहीं वर्षा की कमी से संकट गहरा सकता है। खासकर उत्तर भारत में जल संकट की स्थिति बन सकती है। मध्य भारत के कृषि क्षेत्र में भीषण गर्मी से कपास, सोयाबीन और गन्ने की फसलें प्रभावित होंगी। जानिए देश के किस हिस्से में कितना गंभीर होगा अल नीनो का असर?
El Nino 2026 का भारत पर असर
Super El Nino 2026 India: El Nino एक ऐसी जलवायु स्थिति है, जिसमें प्रशांत महासागर का पानी सामान्य से ज्यादा गर्म हो जाता है। इसका असर पूरी दुनिया के मौसम पर पड़ता है और भारत में सबसे बड़ा प्रभाव मानसून, तापमान और खेती पर देखने को मिल सकता है। अगर 2026 में मजबूत El Nino आता है, तो देश के अलग-अलग राज्यों में / El Nino Impact on Indian States इसका असर अलग रूप में दिखाई दे सकता है। कहीं सूखा और हीटवेव बढ़ सकती है, तो कहीं बारिश कम होने से खेती और जल संकट गहरा सकता है।
उत्तर भारत के राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान में El Nino का सबसे बड़ा असर भीषण गर्मी और कमजोर मानसून/Weak Monsoon Alert के रूप में दिख सकता है। राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली में तापमान 48°C के आसपास पहुंचने का खतरा बढ़ सकता है। यूपी और पंजाब जैसे कृषि प्रधान राज्यों में धान और गन्ने की खेती प्रभावित हो सकती है क्योंकि इन फसलों को ज्यादा पानी की जरूरत होती है। भूजल स्तर और बिजली की मांग भी तेजी से बढ़ सकती है।
मध्य भारत यानी मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में बारिश कम होने से सोयाबीन, धान और दालों की खेती प्रभावित हो सकती है। लंबे समय तक सूखे जैसे हालात बनने पर किसानों की लागत बढ़ेगी और उत्पादन घट सकता है। जंगलों वाले इलाकों में आग लगने की घटनाएं भी बढ़ सकती हैं। महाराष्ट्र में विदर्भ और मराठवाड़ा क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं, जहां पहले से ही पानी का संकट रहता है। यहाँ कपास, सोयाबीन और गन्ने की फसल पर बड़ा असर पड़ सकता है।
पूर्वी भारत के बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में मानसून की अनियमितता सबसे बड़ी चिंता बन सकती है। बिहार और झारखंड में धान की खेती बारिश पर निर्भर रहती है, इसलिए कम बारिश होने पर किसानों को भारी नुकसान हो सकता है। पश्चिम बंगाल और ओडिशा में गर्म और उमस भरा मौसम बढ़ सकता है, जिससे लोगों में स्वास्थ्य समस्याएं और बिजली की मांग दोनों बढ़ेंगी।
दक्षिण भारत के राज्यों जैसे तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और केरल पर भी El Nino का बड़ा असर पड़ सकता है। कर्नाटक और तेलंगाना में सूखे जैसी स्थिति/Drought Risk बनने की आशंका रहती है, जिससे जलाशयों का स्तर घट सकता है। तमिलनाडु में गर्मी और उमस दोनों बढ़ सकती हैं। केरल में मानसून कमजोर पड़ने पर मसाले, रबर और नारियल की खेती प्रभावित हो सकती है।
पूर्वोत्तर भारत आमतौर पर भारी बारिश वाला क्षेत्र माना जाता है, लेकिन El Nino की स्थिति में यहां भी बारिश का पैटर्न बिगड़ सकता है। असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश में कभी अचानक भारी बारिश तो कभी लंबे सूखे जैसे हालात बन सकते हैं। इससे बाढ़ और भूस्खलन का खतरा भी बना रहेगा।
हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर जैसे पहाड़ी राज्यों में तापमान सामान्य से ज्यादा/India Heatwave Alert रह सकता है। ग्लेशियरों के पिघलने की रफ्तार बढ़ सकती है और सेब जैसी फसलों की गुणवत्ता पर असर पड़ सकता है। कई जगह पानी के प्राकृतिक स्रोत कमजोर पड़ने की भी आशंका रहती है। कृषि और मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि अगर 2026 में मजबूत El Nino विकसित होता है, तो भारत में खेती, पानी, बिजली और स्वास्थ्य सभी क्षेत्रों पर दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में किसानों को मौसम आधारित खेती, कम पानी वाली फसलें और वैज्ञानिक सलाह अपनाने की जरूरत होगी। वहीं सरकार के लिए जल संरक्षण और आपदा प्रबंधन सबसे बड़ी चुनौती बन सकते हैं।