WMO Alert: अल नीनो हुआ बेहद ताक़तवर, 2026 के अंत में चरम पर पहुँचने का अनुमान; बारिश, सूखे और गर्मी का बढ़ेगा ख़तरा

Mansi | Sept 04, 2026, 13:38 IST
Share

प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह का तापमान तेजी से बढ़ रहा है, जिससे अल नीनो स्थिति का निर्माण हो चुका है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन ने बताया है कि यह प्रभाव 2026 के अंत तक अत्यंत शक्तिशाली हो सकता है। अल नीनो के चलते भारत में वर्षा के पैटर्न में बदलाव आएगा, जिससे विभिन्न क्षेत्रों में सूखा और बाढ़ जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

प्रशांत महासागर में मजृबूत हो रहे अल नीनो से दुनिया भर में बदलते मौसम के संकेत- कहीं सूखे का खतरा, तो कहीं  भारी बारिश और बाढ़ की आशंका
प्रशांत महासागर में मजृबूत हो रहे अल नीनो से दुनिया भर में बदलते मौसम के संकेत- कहीं सूखे का खतरा, तो कहीं भारी बारिश और बाढ़ की आशंका
प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह का तापमान लगातार बढ़ रहा है और अल नीनो अब पूरी तरह स्थापित हो चुका है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) के ताज़ा आकलन के मुताबिक़, आने वाले महीनों में यह और मज़बूत होकर बहुत शक्तिशाली स्थिति में पहुँच सकता है और 2026 के अंत के आसपास इसके चरम पर पहुँचने का अनुमान है। डब्ल्यूएमओ ने 3 सितंबर 2026 को जारी अपने ताज़ा अल नीनो-ला नीना अपडेट में कहा है कि सितंबर-नवंबर 2026 और दिसंबर 2026-फरवरी 2027, दोनों अवधियों में एल नीनो के बने रहने की संभावना करीब 100% है। डब्ल्यूएमओ के मुताबिक़, यह पहली बार है जब उसके अल नीनो पूर्वानुमान में इस तरह की लगभग पूरी निश्चितता दिखाई गई है।

भारत के लिए यह ख़बर इसलिए अहम है क्योंकि अल नीनो दुनिया के कई हिस्सों में तापमान और बारिश के सामान्य पैटर्न को बदल सकता है। डब्ल्यूएमओ के सितंबर-नवंबर 2026 के वैश्विक मौसमी जलवायु पूर्वानुमान में भारतीय उपमहाद्वीप के कई हिस्सों में सामान्य से कम बारिश की संभावना दिखाई गई है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि पूरे भारत में बारिश कम होगी या सूखा पड़ना तय है। हिंद महासागर द्विध्रुव (IOD) और दूसरे समुद्री-वायुमंडलीय कारक अल नीनो के असर को बढ़ा, घटा या बदल सकते हैं। इसलिए भारत में किसी राज्य या फसल पर संभावित असर का आकलन करते समय स्थानीय पूर्वानुमान को भी देखना ज़रूरी होगा।

समुद्र का तापमान 3.6°C तक बढ़ने का अनुमान

अल नीनो की ताक़त को समझने के लिए वैज्ञानिक भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर के अलग-अलग हिस्सों के समुद्री सतह तापमान पर नज़र रखते हैं। इनमें निन्यो 3.4 क्षेत्र अहम संकेतक है। डब्ल्यूएमओ के ताज़ा वैश्विक मौसमी जलवायु अपडेट के मुताबिक़, सितंबर-नवंबर 2026 के दौरान निन्यो 3.4 क्षेत्र में समुद्र की सतह के तापमान की मौसमी औसत विसंगति करीब 3.6°C तक पहुँच सकती है। पूर्वानुमान में अल नीनो की तीव्रता नवंबर-दिसंबर के आसपास चरम पर पहुँचने की संभावना जताई गई है।

डब्ल्यूएमओ के अल नीनो अपडेट के मुताबिक़, मई-जुलाई 2026 में निन्यो 3.4 क्षेत्र का समुद्री सतह तापमान सामान्य से औसतन 1.5°C अधिक था और जुलाई में यह अंतर करीब 2°C तक पहुँच गया था। इसके बाद जुलाई के आख़िर से अगस्त के मध्य तक समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से करीब 2.2°C से 2.6°C अधिक रहा। यह तेज़ बढ़ोतरी बताती है कि प्रशांत महासागर में एल नीनो की स्थिति कितनी तेज़ी से मज़बूत हुई है। डब्ल्यूएमओ का कहना है कि अगर मौजूदा पूर्वानुमान के मुताबिक़ अल नीनो बहुत मज़बूत स्तर तक पहुँचता है तो यह पिछले करीब 4 दशकों में देखी गई सबसे शक्तिशाली घटनाओं में शामिल हो सकता है। हालांकि, किसी घटना की ताक़त को सीधे किसी एक क्षेत्र में होने वाले नुकसान की गंभीरता से जोड़ना सही नहीं होगा।

प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह और उसके नीचे बढ़ती असामान्य गर्मी अल नीनो के और मज़बूत होने का संकेत दे रही है
प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह और उसके नीचे बढ़ती असामान्य गर्मी अल नीनो के और मज़बूत होने का संकेत दे रही है

समुद्र के भीतर भी बढ़ी गर्मी, कुछ जगह 8°C तक अधिक तापमान

अल नीनो की मौजूदा स्थिति की एक अहम विशेषता यह है कि असामान्य गर्मी सिर्फ़ समुद्र की सतह तक सीमित नहीं है। डब्ल्यूएमओ के अनुसार, प्रशांत महासागर की सतह के नीचे भी बड़ी मात्रा में गर्म पानी मौजूद है। कुछ क्षेत्रों में समुद्र की सतह के नीचे का तापमान सामान्य से करीब 8°C तक अधिक पाया गया है। समुद्र की सतह और उसके नीचे मौजूद यह अतिरिक्त गर्मी अल नीनो के आगे भी मज़बूत होने के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ बना रही है। डब्ल्यूएमओ के वैज्ञानिकों के मुताबिक़, समुद्र और वायुमंडल दोनों से मिलने वाले संकेत आने वाले महीनों में इसके और तीव्र होने की संभावना को मज़बूत कर रहे हैं।

अल नीनो को समझने के लिए यह जानना भी ज़रूरी है कि यह कोई अचानक पैदा होने वाली मौसम की घटना नहीं है। यह अल नीनो-दक्षिणी दोलन (ENSO) नाम की प्राकृतिक जलवायु प्रणाली का गर्म चरण है। इसमें भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से में समुद्र का तापमान सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है और इसके साथ वायुमंडलीय परिसंचरण में भी बदलाव आते हैं।

अल नीनो के बढ़ते असर के बीच दुनिया के कई हिस्सों में बारिश, सूखे और अत्यधिक गर्मी का ख़तरा बढ़ने की आशंका है
अल नीनो के बढ़ते असर के बीच दुनिया के कई हिस्सों में बारिश, सूखे और अत्यधिक गर्मी का ख़तरा बढ़ने की आशंका है

फरवरी 2027 तक रहने की करीब 100% संभावना, भारत में क्या होगा?

डब्ल्यूएमओ के ताज़ा पूर्वानुमान की सबसे बड़ी बात अल नीनो के लंबे समय तक बने रहने को लेकर इसकी बेहद अधिक संभावना है। संगठन के वैश्विक पूर्वानुमान केंद्रों के आकलन के मुताबिक़, सितंबर-नवंबर 2026 और दिसंबर 2026-फरवरी 2027 दोनों अवधियों में एल नीनो के बने रहने की संभावना करीब 100% है। यानी आने वाले महीनों में इसके समाप्त होने या ला नीना की स्थिति में बदलने की संभावना बेहद कम मानी जा रही है। भारत के लिए इसका असर समझना थोड़ा जटिल है। एल नीनो को आम तौर पर भारतीय उपमहाद्वीप में कम बारिश की बढ़ी हुई संभावना से जोड़ा जाता है। डब्ल्यूएमओ के सितंबर-नवंबर 2026 के पूर्वानुमान में भी भारतीय उपमहाद्वीप में सामान्य से कम बारिश की संभावना दिखाई गई है। दक्षिण-पूर्व एशिया और ऑस्ट्रेलिया के कई हिस्सों में भी सामान्य से कम बारिश की संभावना जताई गई है।

लेकिन यहाँ एक महत्वपूर्ण सावधानी है। अल नीनो जितना मज़बूत होगा, किसी एक देश या क्षेत्र में उसका असर उतना ही ज़्यादा होगा ऐसा ज़रूरी नहीं है। डब्ल्यूएमओ साफ़ कहता है कि अल नीनो की ताक़त किसी क्षेत्र में उसके प्रभाव की तीव्रता को सीधे निर्धारित नहीं करती। स्थानीय मौसम पर दूसरे समुद्री और वायुमंडलीय कारकों का भी असर पड़ता है। भारत और दक्षिण एशिया के लिए इनमें आईओडी महत्वपूर्ण है। डब्ल्यूएमओ के सितंबर-नवंबर 2026 के पूर्वानुमान में सकारात्मक आईओडी के विकसित होने की संभावना जताई गई है और इस अवधि के लिए इसका मौसमी औसत करीब 0.9°C रहने का अनुमान है। सकारात्मक आईओडी कुछ परिस्थितियों में दक्षिण एशिया पर अल नीनो के सामान्य प्रभाव को कम कर सकता है।

WMO ने अल नीनो के संभावित असर से निपटने के लिए देशों को समय रहते मौसम की चेतावनी और आपदा प्रबंधन की तैयारी मज़बूत करने की सलाह दी है
WMO ने अल नीनो के संभावित असर से निपटने के लिए देशों को समय रहते मौसम की चेतावनी और आपदा प्रबंधन की तैयारी मज़बूत करने की सलाह दी है

कहीं सूखा तो कहीं भारी बारिश और बाढ़ का जोखिम

अल नीनो को सिर्फ़ भारत में कम बारिश या सूखे से जोड़ना पूरी तस्वीर नहीं है। डब्ल्यूएमओ के मुताबिक़, यह दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में अलग तरह के मौसम को बढ़ावा दे सकता है। इसके प्रभाव से अत्यधिक गर्मी, सूखा, भारी बारिश और बाढ़ जैसी चरम मौसम स्थितियों का जोखिम बढ़ सकता है। सितंबर-नवंबर 2026 के लिए डब्ल्यूएमओ के पूर्वानुमान में भारतीय उपमहाद्वीप, दक्षिण-पूर्व एशिया और ऑस्ट्रेलिया के कई हिस्सों में सामान्य से कम बारिश की संभावना है। वहीं अफ्रीका के हॉर्न क्षेत्र तथा मध्य और दक्षिणी दक्षिण अमेरिका के कुछ हिस्सों में सामान्य से अधिक बारिश की संभावना जताई गई है। यानी एक ही अल नीनो घटना दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में बिल्कुल अलग मौसम पैदा कर सकती है।

तापमान के मामले में भी तस्वीर महत्वपूर्ण है। डब्ल्यूएमओ के सितंबर-नवंबर के पूर्वानुमान में दुनिया के लगभग सभी स्थलीय क्षेत्रों में सामान्य से अधिक तापमान की संभावना दिखाई गई है। ऐसे में अल नीनो का असर केवल बारिश तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि गर्मी और उससे जुड़े जोखिमों पर भी नज़र रखनी होगी। भारत में इसका सीधा संबंध खेती से भी जुड़ता है। बारिश के पैटर्न में बदलाव से मिट्टी की नमी, सिंचाई की ज़रूरत, फसल की बुवाई और उत्पादन प्रभावित हो सकते हैं। अगर किसी क्षेत्र में बारिश लंबे समय तक सामान्य से कम रहती है तो किसानों पर सिंचाई और पानी की अतिरिक्त ज़रूरत का दबाव बढ़ सकता है। वहीं कम समय में बहुत ज़्यादा बारिश होने पर खेतों में जलभराव और फसल को नुकसान का जोखिम रहता है।

समुद्र की बढ़ती गर्मी से अल नीनो हुआ ताक़तवर,

डब्ल्यूएमओ ने मौजूदा स्थिति को देखते हुए दुनिया के देशों से तैयारी और समय रहते चेतावनी की व्यवस्था मजबूत करने पर ज़ोर दिया है। संगठन के मुताबिक़, राष्ट्रीय मौसम और जल विज्ञान सेवाओं की मदद से पहले से मिलने वाली जानकारी सरकारों, किसानों, आपदा प्रबंधन एजेंसियों और मौसम पर निर्भर दूसरे क्षेत्रों को जोखिम कम करने के लिए तैयारी का समय दे सकती है।

फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि अल नीनो अब केवल बनने की संभावना नहीं, बल्कि स्थापित जलवायु स्थिति है। समुद्र की सतह और उसके नीचे असामान्य गर्मी मौजूद है, इसके आने वाले महीनों में और मज़बूत होने तथा 2026 के अंत के आसपास चरम पर पहुँचने का अनुमान है। फरवरी 2027 तक इसके बने रहने की संभावना करीब 100% है। भारत के लिए इसका असर कितना और कहाँ तक होगा, यह सिर्फ़ अल नीनो की ताक़त से तय नहीं होगा। आने वाले महीनों में आईओडी और दूसरे समुद्री-वायुमंडलीय कारकों की स्थिति भी उतनी ही महत्वपूर्ण होगी।
Tags:
  • El Nino
  • अल नीनो
  • WMO
  • विश्व मौसम विज्ञान संगठन
  • Climate Change
  • Sea Surface Temperature
  • गर्मी का खतरा
  • बारिश का पैटर्न
  • Drought
  • Indian Monsoon