अल नीनो के ख़तरे को लेकर तमिलनाडु सरकार अलर्ट, बनाई विशेषज्ञ सलाहकार समिति, जानें कैसे करेगी काम
Gaon Connection | Jul 30, 2026, 16:08 IST
तमिलनाडु सरकार ने वर्ष 2026 में संभावित तेज़ अल नीनो के प्रभावों की निगरानी और आकलन के लिए विशेषज्ञ सलाहकार समिति का गठन किया है। सरकार का मानना है कि अल नीनो के कारण दक्षिण-पश्चिम मानसून में सामान्य से कम बारिश, कावेरी नदी में जल प्रवाह में कमी और सिंचाई पर असर पड़ सकता है। वहीं उत्तर-पूर्व मानसून के दौरान भारी बारिश और बाढ़ जैसी चरम मौसमीय घटनाओं की आशंका को देखते हुए समिति सरकार को अर्ली वार्निंग, सूखा और बाढ़ प्रबंधन सहित आवश्यक एहतियाती उपायों पर सलाह देगी।
सूखा और बाढ़ दोनों से निपटने की तैयारी शुरू
तमिलनाडु सरकार ने वर्ष 2026 में संभावित तेज़ अल नीनो (El Niño) के प्रभावों की वैज्ञानिक आधार पर निगरानी और आकलन करने के लिए एक विशेषज्ञ सलाहकार समिति के गठन की घोषणा की है। सरकार का कहना है कि यह समिति संभावित जोखिमों का अध्ययन करेगी और एहतियाती उपायों के साथ आपदा प्रबंधन से जुड़े आवश्यक सुझाव देगी, ताकि राज्य किसी भी संभावित चुनौती से समय रहते निपट सके।
यह फ़ैसला अतिरिक्त मुख्य सचिव एवं राजस्व प्रशासन आयुक्त की उस चेतावनी के बाद लिया गया है, जिसमें वर्ष 2026 में गंभीर अल नीनो विकसित होने की आशंका जताई गई थी। सरकार के अनुसार, ऐसी स्थिति में दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान सामान्य से कम वर्षा हो सकती है, जिससे कावेरी नदी में जल प्रवाह और सिंचाई सुविधाएँ प्रभावित होने की संभावना है। वहीं उत्तर-पूर्व मानसून के दौरान भारी बारिश और बाढ़ जैसी चरम मौसमीय घटनाओं की आशंका भी बनी हुई है।
तमिलनाडु सरकार ने कहा कि संभावित तेज़ अल नीनो से पैदा होने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए यह समिति वैज्ञानिक आधार पर स्थिति की निगरानी और आकलन करेगी। समिति तमिलनाडु डिज़ास्टर रिस्क रिडक्शन एजेंसी (TNDRRA) को आवश्यक एहतियाती और आपदा प्रबंधन संबंधी उपायों पर सलाह देगी। सरकार ने 28 जुलाई को जारी आदेश में अतिरिक्त मुख्य सचिव, राजस्व प्रशासन आयुक्त एवं राज्य राहत आयुक्त, चेपॉक को समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया है।
सरकार के अनुसार, समिति में जलवायु परिवर्तन, आपदा प्रबंधन, पर्यावरण, तटीय संसाधन प्रबंधन और शहरी अवसंरचना जैसे क्षेत्रों का अनुभव रखने वाले विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। समिति के सदस्यों में अन्ना विश्वविद्यालय के सेंटर फ़ॉर क्लाइमेट चेंज एंड डिज़ास्टर मैनेजमेंट के विभागाध्यक्ष प्रो. एस. कण्मणि, आईआईटी मद्रास के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के हाइड्रोलिक्स एंड वॉटर रिसोर्सेज़ इंजीनियरिंग लैब के प्रोफ़ेसर बालाजी नरसिम्हन, आईआईटी मद्रास से जुड़े तमिलनाडु गवर्निंग काउंसिल ऑन क्लाइमेट चेंज के क्लाइमेट रेज़िलिएंस प्रैक्टिस के निदेशक अरिवुडई नंबी अप्पादुरई, तमिलनाडु ग्रीन क्लाइमेट कंपनी के सलाहकार प्रो. रमेश रामचंद्रन, राज्य पर्यावरण मूल्यांकन समिति के विशेषज्ञ सदस्य आर. वेंकटेशन, सुगंथी देवदासन मरीन रिसर्च इंस्टीट्यूट के निदेशक जे. के. पैटरसन एडवर्ड तथा तमिलनाडु अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर फ़ाइनेंशियल सर्विसेज़ लिमिटेड के वरिष्ठ प्रबंधक आर. प्रदीप जॉन शामिल हैं।
सरकारी आदेश के अनुसार, समिति वर्षा और सूखे की स्थिति की निगरानी करेगी, संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान करेगी और तमिलनाडु डिज़ास्टर रिस्क रिडक्शन एजेंसी को अर्ली वार्निंग सिस्टम के संबंध में सलाह देगी। इसके अलावा समिति सूखा और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लिए शमन उपायों पर भी सुझाव देगी, ताकि किसी भी प्रकार की आपदा से निपटने के लिए समय रहते पर्याप्त तैयारी सुनिश्चित की जा सके। यह समिति तमिलनाडु डिज़ास्टर रिस्क रिडक्शन एजेंसी के तहत वर्ष 2026-27 और 2027-28 तक कार्य करेगी।
यह फ़ैसला अतिरिक्त मुख्य सचिव एवं राजस्व प्रशासन आयुक्त की उस चेतावनी के बाद लिया गया है, जिसमें वर्ष 2026 में गंभीर अल नीनो विकसित होने की आशंका जताई गई थी। सरकार के अनुसार, ऐसी स्थिति में दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान सामान्य से कम वर्षा हो सकती है, जिससे कावेरी नदी में जल प्रवाह और सिंचाई सुविधाएँ प्रभावित होने की संभावना है। वहीं उत्तर-पूर्व मानसून के दौरान भारी बारिश और बाढ़ जैसी चरम मौसमीय घटनाओं की आशंका भी बनी हुई है।