अल नीनो को लेकर नई चेतावनी, फसल उत्पादन घटने और कीमतें बढ़ने का खतरा, इन चीज़ों की कीमतों पर मंडराया संकट

Gaon Connection | Jun 09, 2026, 11:32 IST
Share

प्रशांत महासागर में विकसित हो रहा एल नीनो भारत की खरीफ फसलों, किसानों की आय और महंगाई के लिए चुनौती बन सकता है। मौसम विभाग ने सामान्य से कम मानसून का अनुमान जताया है। विशेषज्ञों के अनुसार ज्वार, बाजरा, अरहर, मक्का और तिलहन फसलें सबसे अधिक प्रभावित हो सकती हैं, हालांकि बेहतर सिंचाई सुविधाओं से जोखिम कुछ हद तक कम हो सकता है।

अल नीनो ने  बढ़ाई चिंता
अल नीनो ने बढ़ाई चिंता
प्रशांत महासागर में विकसित हो रहे अल नीनो (El Niño) की स्थिति इस वर्ष भारत की कृषि, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और महंगाई के लिए चिंता का कारण बन सकती है। ET की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मौसम विशेषज्ञों और अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यदि मानसून सामान्य से कमजोर रहता है तो खरीफ फसलों के उत्पादन में गिरावट आ सकती है जिससे किसानों की आय प्रभावित होने के साथ-साथ खाद्य महंगाई भी बढ़ सकती है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने इस वर्ष मानसून के दौरान सामान्य से कम वर्षा का अनुमान जताया है। विभाग के अनुसार, इस बार मानसून की बारिश दीर्घकालिक औसत (एलपीए) के 90 प्रतिशत रहने की संभावना है। ऐसे में खरीफ सीजन की बुवाई और उत्पादन को लेकर आशंकाएं बढ़ गई हैं।

खरीफ फसलों पर सबसे ज्यादा असर का खतरा

विशेषज्ञों के अनुसार अल नीनो के दौरान वर्षा कम और अनियमित रहने के साथ तापमान सामान्य से अधिक रहता है। इसका सीधा असर खरीफ फसलों पर पड़ता है। अतीत के मजबूत एल नीनो वर्षों के आंकड़ों से पता चलता है कि ज्वार, बाजरा, अरहर, मक्का और मूंगफली जैसी फसलें सबसे अधिक प्रभावित होती हैं। विश्लेषण के अनुसार मजबूत अल नीनो वाले वर्षों में ज्वार उत्पादन में औसतन 28 प्रतिशत, अरहर में 17.1 प्रतिशत और बाजरा उत्पादन में 15.7 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई। वहीं मक्का उत्पादन में 5.4 प्रतिशत और मूंगफली में 5.8 प्रतिशत की कमी देखी गई। नकदी फसलों में कपास का उत्पादन भी लगभग 13 प्रतिशत तक घटा था। हालांकि धान पर इसका प्रभाव अपेक्षाकृत कम माना जाता है क्योंकि देश में धान की लगभग 70 प्रतिशत खेती सिंचाई सुविधाओं से जुड़ी हुई है। इसके अलावा देश के पास चावल और गेहूं का पर्याप्त भंडार भी उपलब्ध है।

विश्व मौसम संगठन ने जताई 80 प्रतिशत संभावना

विश्व मौसम संगठन (डब्ल्यूएमओ) के अनुसार जून से अगस्त के बीच अल नीनो विकसित होने की संभावना 80 प्रतिशत है, जबकि इसके नवंबर तक बने रहने की संभावना 90 प्रतिशत से अधिक आंकी गई है। भारत में खरीफ फसलों की बुवाई मानसून के साथ जून में शुरू होती है। देश की लगभग 80 प्रतिशत वार्षिक वर्षा जून से सितंबर के बीच होती है। ऐसे में मानसून में किसी भी तरह की कमी या अनियमितता का कृषि उत्पादन पर सीधा प्रभाव पड़ सकता है।

सरकार ने जताया भरोसा

हालांकि केंद्र सरकार के अधिकारियों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में सिंचाई सुविधाओं का काफी विस्तार हुआ है, जिससे अल नीनो के प्रभाव को कम करने में मदद मिलेगी। सरकारी अधिकारियों के अनुसार जलवायु अनुकूल और कम अवधि वाली फसल किस्मों का उपयोग बढ़ाया गया है, जिससे बारिश में कमी की स्थिति से बेहतर तरीके से निपटा जा सकेगा।

बुवाई और उत्पादन दोनों पर पड़ सकता है असर

ET की रिपोर्ट में एचडीएफसी बैंक की प्रमुख अर्थशास्त्री साक्षी गुप्ता के अनुसार बताया गया है कि मानसून में हर एक प्रतिशत की कमी फसल क्षेत्र के सकल मूल्य वर्धन (क्रॉप जीवीए) की वृद्धि दर को लगभग 0.4 प्रतिशत तक प्रभावित कर सकती है। उन्होंने कहा कि यदि सीजन की शुरुआत में बारिश कमजोर रहती है तो बुवाई का रकबा प्रभावित हो सकता है। वहीं यदि अल नीनो का असर सीजन के दूसरे हिस्से में ज्यादा दिखता है तो उत्पादन और पैदावार पर असर पड़ सकता है।

कीट और बीमारियों का भी बढ़ सकता है खतरा

क्रिसिल की एक रिपोर्ट के अनुसार अधिक तापमान और असमान वर्षा के कारण मिर्च, कपास, सोयाबीन, दलहन और सब्जियों में कीट एवं रोगों का प्रकोप बढ़ सकता है। इससे किसानों की लागत बढ़ने और उत्पादन घटने की आशंका है।

महंगाई बढ़ने का भी खतरा

अल नीनो का असर केवल खेती तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका प्रभाव महंगाई पर भी पड़ता है। वर्ष 2015-16 के एल नीनो वर्ष में औसत खुदरा महंगाई 4.9 प्रतिशत रही थी, जबकि दालों की महंगाई 31.7 प्रतिशत तक पहुंच गई थी। सब्जियां, दालें और खाद्य तेल उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ऐसे में फसल उत्पादन में कमी का असर सीधे बाजार कीमतों पर दिखाई दे सकता है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है प्रभाव

विशेषज्ञों का कहना है कि कृषि उत्पादन में कमी का असर ग्रामीण रोजगार और किसानों की आय पर भी पड़ता है। चूंकि देश की बड़ी आबादी कृषि और उससे जुड़े व्यवसायों पर निर्भर है, इसलिए कमजोर मानसून और एल नीनो की स्थिति ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती बन सकती है। हालांकि बेहतर सिंचाई सुविधाओं, आधुनिक बीजों और सरकारी तैयारियों के चलते इस बार अल नीनो के प्रभाव को सीमित करने की उम्मीद भी जताई जा रही है।
Tags:
  • El Nino
  • Kharif Crops
  • Monsoon 2026
  • Farmer Income
  • Agricultural Output
  • Inflation
  • IMD
  • WMO
  • Rural Economy
  • Crop Yield