छत्तीसगढ़ में बिजली हुई महंगी, खरीफ़ सीज़न के बीच किसानों को झटका, 1 जुलाई से लागू होंगी नई दरें
Gaon Connection | Jun 16, 2026, 15:13 IST
छत्तीसगढ़ में 1 जुलाई 2026 से बिजली दरें औसतन 6.23 प्रतिशत बढ़ जाएंगी। नए टैरिफ का असर घरेलू उपभोक्ताओं, व्यापारियों, उद्योगों और किसानों पर पड़ेगा। कृषि एवं सिंचाई पंपों की बिजली दरों में भी बढ़ोतरी की गई है जिससे खेती की लागत बढ़ सकती है। वहीं छात्रावासों और कुछ उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए विशेष प्रावधान भी किए गए हैं।
बिजली टैरिफ में बढ़ोतरी, खेती से उद्योग तक बढ़ेगी लागत
छत्तीसगढ़ में 1 जुलाई से बिजली महंगी होने जा रही है जिसका असर आम उपभोक्ताओं के साथ-साथ किसानों की जेब पर भी पड़ेगा। राज्य विद्युत नियामक आयोग ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए नया बिजली टैरिफ जारी करते हुए दरों में औसतन 6.23 प्रतिशत की बढ़ोतरी को मंजूरी दी है। ऐसे समय में यह फैसला आया है जब राज्य के कई हिस्सों में खरीफ़ फसलों की बुआई और सिंचाई कार्य शुरू हो चुके हैं तथा किसान खेती-किसानी की तैयारियों में जुटे हुए हैं।
नई दरों के लागू होने के बाद घरेलू उपभोक्ताओं, दुकानदारों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और उद्योगों के साथ कृषि पंप संचालकों को भी अधिक बिजली बिल चुकाना होगा। खासकर सिंचाई के लिए बिजली पर निर्भर किसानों की लागत बढ़ने की आशंका है। हालांकि आयोग ने छात्रावासों और कुछ श्रेणी के उपभोक्ताओं को राहत भी दी है। साथ ही बिजली बिल के विलंब भुगतान से जुड़े नियमों में भी बदलाव किया गया है।
नए टैरिफ के अनुसार कृषि पंप और सिंचाई पंप चलाने वाले किसानों को अब पहले की तुलना में अधिक बिजली शुल्क देना होगा। आयोग ने कृषि श्रेणी की दरों में 40 पैसे प्रति यूनिट तक की बढ़ोतरी की है। ऐसे में जिन किसानों की खेती सिंचाई पंपों पर निर्भर है, उनकी लागत बढ़ सकती है, खासकर खरीफ़ सीज़न के दौरान जब खेतों में पानी की आवश्यकता अधिक रहती है।
घरेलू बिजली दरों में औसतन 30 पैसे प्रति यूनिट की बढ़ोतरी की गई है। 0 से 200 यूनिट तक बिजली खपत करने वाले उपभोक्ताओं के लिए 30 पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि लागू होगी। 201 से 600 यूनिट तक की खपत पर 40 पैसे प्रति यूनिट और 600 यूनिट से अधिक खपत करने वालों को 50 पैसे प्रति यूनिट अतिरिक्त भुगतान करना होगा।
गैर-घरेलू और व्यावसायिक उपभोक्ताओं के लिए बिजली दरों में 20 से 40 पैसे प्रति यूनिट तक बढ़ोतरी की गई है। वहीं उच्च दाब वाले स्टील उद्योगों के लिए ऊर्जा शुल्क और डिमांड चार्ज भी बढ़ाए गए हैं। आयोग का कहना है कि बढ़ती लागत, महँगाई और बिजली कंपनियों के पुराने घाटे को देखते हुए यह संशोधन आवश्यक था।
नई व्यवस्था में बस्तर और सरगुजा क्षेत्र के आदिवासी विकास प्राधिकरण के अंतर्गत संचालित सरकारी और निजी छात्रावासों को बड़ी राहत दी गई है। इन्हें अब व्यावसायिक श्रेणी के बजाय घरेलू श्रेणी में रखा जाएगा, जिससे इनके बिजली बिल कम हो सकेंगे। इसके अलावा 10 किलोवाट से अधिक स्वीकृत लोड वाले घरेलू और व्यावसायिक उपभोक्ताओं को सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे के बीच बिजली उपयोग करने पर 20 पैसे प्रति यूनिट की विशेष छूट मिलेगी।
बिजली बिल जमा करने में देरी करने वाले उपभोक्ताओं के लिए भी नया नियम लागू किया गया है। अब तक 1.5 प्रतिशत मासिक की निश्चित लेट फीस लगती थी, लेकिन अब 0.04 प्रतिशत प्रतिदिन के हिसाब से शुल्क लिया जाएगा। यानी जितने दिन की देरी होगी, उतने ही दिनों का अतिरिक्त भुगतान करना होगा।
नई दरों के लागू होने के बाद घरेलू उपभोक्ताओं, दुकानदारों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और उद्योगों के साथ कृषि पंप संचालकों को भी अधिक बिजली बिल चुकाना होगा। खासकर सिंचाई के लिए बिजली पर निर्भर किसानों की लागत बढ़ने की आशंका है। हालांकि आयोग ने छात्रावासों और कुछ श्रेणी के उपभोक्ताओं को राहत भी दी है। साथ ही बिजली बिल के विलंब भुगतान से जुड़े नियमों में भी बदलाव किया गया है।