0

लाल चंदन अब सिर्फ़ जंगल की नहीं, किसान की भी संपत्ति

Gaon Connection | Jan 02, 2026, 14:56 IST
Share
राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण ने आंध्र प्रदेश के लाल चंदन किसानों को 45 लाख रुपये वितरित कर संरक्षण और आजीविका को जोड़ने का उदाहरण पेश किया है। अभिगम और लाभ साझाकरण तंत्र के ज़रिए किसान अब लाल चंदन की वैध खेती से दोहरी आय पा रहे हैं और अवैध व्यापार पर भी लगाम लग रही है।
लाल चंदन उगाने वाले किसानों को इस व्यवस्था से दोहरी आय का लाभ मिलता है।
आंध्र प्रदेश के कई गाँवों में लाल चंदन के पेड़ सिर्फ़ जंगल या सरकारी नियंत्रण की चीज़ नहीं रहे। अब वे किसानों की ज़िंदगी में भरोसे और सम्मान का प्रतीक बनते जा रहे हैं। इसी दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) ने लाल चंदन उगाने वाले किसानों को 45 लाख रुपये की राशि वितरित की है। यह भुगतान अभिगम और लाभ साझाकरण (Access and Benefit Sharing – ABS) व्यवस्था के तहत किया गया है।

यह राशि केवल आर्थिक मदद नहीं है, बल्कि उस सोच की पुष्टि है जिसमें संरक्षण और किसान की आजीविका को एक-दूसरे के विरोध में नहीं, बल्कि साथ-साथ देखा जाता है।

किसान को दोहरी आय का भरोसा

लाल चंदन उगाने वाले किसानों को इस व्यवस्था से दोहरी आय का लाभ मिलता है। पहली - जब वे कानूनी रूप से उगाए गए लाल चंदन की लकड़ी या लट्ठों की बिक्री करते हैं। दूसरी - जैव विविधता अधिनियम, 2002 के तहत ABS तंत्र से मिलने वाला मौद्रिक लाभ।

इससे लाल चंदन जैसी बहुमूल्य और संवेदनशील प्रजाति को अवैध कटाई से बचाने में किसानों की भूमिका सीधे तौर पर मजबूत होती है। किसान अब केवल उत्पादक नहीं, बल्कि संरक्षक भी बनते हैं।

संरक्षण से आजीविका तक का सफ़र

अब तक भारत में 143.5 करोड़ रुपये से अधिक की ABS राशि विभिन्न राज्यों में वितरित की जा चुकी है। अकेले आंध्र प्रदेश को ही लाल चंदन संरक्षण और लाभ के दावेदारों के लिए 104 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जारी की गई है। इसके अलावा तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र, ओडिशा और तेलंगाना जैसे राज्यों को भी ABS के तहत सहायता मिली है।

पिछले तीन महीनों में ही आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और तेलंगाना के 220 से अधिक किसानों को 5.35 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है। यह आँकड़े दिखाते हैं कि ABS अब काग़ज़ी नीति नहीं, बल्कि ज़मीन पर असर दिखाने वाला मॉडल बन चुका है।

अवैध व्यापार पर लगाम

लाल चंदन लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में अवैध तस्करी का शिकार रहा है। ABS व्यवस्था इस समस्या का व्यावहारिक समाधान देती है। जब किसान को वैध खेती और संरक्षण से सीधा आर्थिक लाभ मिलता है, तो अवैध कटाई और काले बाज़ार का आकर्षण अपने आप कम होता है।

यह ढांचा लाल चंदन को “संरक्षित प्रजाति” की सीमित परिभाषा से बाहर निकालकर कृषि समुदायों के लिए आजीविका-सहायक संपत्ति में बदल देता है। राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण का यह प्रयास यह भी दिखाता है कि जैव विविधता संरक्षण केवल जंगलों तक सीमित नहीं है। जब नीति, किसान और समुदाय एक साथ जुड़ते हैं, तभी संरक्षण टिकाऊ बनता है।
Tags:
  • nba
  • Red Sandalwood farmers India
  • Access and Benefit Sharing ABS India
  • National Biodiversity Authority NBA
  • Red sandalwood cultivation Andhra Pradesh
  • Biodiversity Act 2002 India
  • Farmer income biodiversity conservation
  • Sustainable use of red sandalwood
  • ABS payment to farmers India
  • Biodiversity conservation livelihood model

Follow us
Contact
  • Gomti Nagar, Lucknow, Uttar Pradesh 226010
  • neelesh@gaonconnection.com

© 2025 All Rights Reserved.