धान छोड़ लगायें ये फसलें, इस राज्य की सरकार देगी ₹15,000 प्रति एकड़ का अनुदान, कहीं आवेदन करने की भी ज़रूरत नहीं
Gaon Connection | Jul 14, 2026, 17:34 IST
छत्तीसगढ़ सरकार की कृषक उन्नति योजना के तहत खरीफ़ सीज़न में धान की जगह दलहन, तिलहन, कोदो, कुटकी, रागी, सोयाबीन, कपास और अन्य वैकल्पिक फसलों की खेती करने वाले किसानों को प्रति एकड़ 15,000 रुपये की सहायता दी जाएगी। योजना का लाभ लेने के लिए अलग से आवेदन नहीं करना होगा। कृषि विभाग फसल का सत्यापन कर पात्र किसानों को अनुदान देगा और गाँव-गाँव अभियान चलाकर किसानों को जागरूक कर रहा है।
किसानों के लिए सुनहरा मौका!
छत्तीसगढ़ सरकार खरीफ़ सीज़न में किसानों को धान पर निर्भरता कम कर वैकल्पिक फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित कर रही है। राज्य की कृषक उन्नति योजना के तहत धान की जगह दलहन, तिलहन और अन्य वैकल्पिक फसलें उगाने वाले किसानों को प्रति एकड़ 15,000 रुपये की सहायता दी जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे उन इलाक़ों के किसानों को राहत मिलेगी, जहाँ धान की खेती अपेक्षित उत्पादन नहीं दे पाती और हर साल आर्थिक नुकसान की स्थिति बन जाती है।
कृषि विभाग के अनुसार, योजना का उद्देश्य फसल विविधीकरण को बढ़ावा देना, खेती की लागत कम करना और किसानों की आय में वृद्धि करना है। इसके साथ ही मिट्टी की उर्वरता सुधारने और स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप अधिक लाभदायक फसलों की खेती को बढ़ावा देने पर भी ज़ोर दिया जा रहा है। विभाग गाँव-गाँव जाकर किसानों को योजना की जानकारी दे रहा है, ताकि अधिक से अधिक किसान इसका लाभ उठा सकें।
कृषक उन्नति योजना के तहत यदि किसान खरीफ़ सीज़न में धान की बजाय दलहन, तिलहन, कोदो, कुटकी, रागी, सोयाबीन या कपास जैसी फसलों की खेती करते हैं, तो उन्हें प्रति एकड़ 15,000 रुपये की सहायता राशि दी जाएगी। बालोद के वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी केशव राम पिद्दा ने बताया कि जिले के कई ऐसे क्षेत्र हैं, जहाँ धान की अपेक्षा अरहर, उड़द, मूंग, कोदो, कुटकी और सोयाबीन जैसी फसलें बेहतर उत्पादन देती हैं। ऐसे क्षेत्रों में किसानों को इन फसलों की खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। उनका कहना है कि फसल विविधीकरण से किसानों की लागत कम होगी, मिट्टी की उर्वरता बेहतर होगी और आय बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।
उन्होंने बताया कि बालोद जिले के कुछ किसानों ने इस वर्ष अपने लगभग पाँच एकड़ धान वाले खेतों में मक्के की खेती की है। ऐसे किसान भी योजना की पात्रता के अनुसार सहायता राशि प्राप्त करेंगे। विभाग लगातार किसानों से वैकल्पिक फसलों की खेती अपनाने की अपील कर रहा है।
योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को अलग से आवेदन करने या कृषि विभाग के कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं होगी। कृषि विभाग के अधिकारी गिरदावरी के दौरान खेतों में पहुँचकर बोई गई फसल का सत्यापन करेंगे और उसी के आधार पर पात्र किसानों को सहायता राशि प्रदान की जाएगी।केशव राम पिद्दा ने बताया कि जिले के कुछ क्षेत्रों में फसलों का रिकॉर्ड डिजिटल सर्वे के माध्यम से तैयार किया जा रहा है, जबकि अन्य स्थानों पर मैन्युअल सर्वे किया जाता है। दोनों ही स्थितियों में खेत में वास्तव में बोई गई फसल की पुष्टि होने के बाद ही योजना का लाभ मिलेगा। उन्होंने बताया कि कृषि विभाग गाँव-गाँव जाकर किसानों को योजना की जानकारी दे रहा है, ताकि अधिक से अधिक किसान इसका लाभ उठा सकें और धान की बजाय अधिक लाभकारी फसलों की खेती कर आर्थिक रूप से मजबूत बन सकें।
कृषि विभाग के अनुसार, योजना का उद्देश्य फसल विविधीकरण को बढ़ावा देना, खेती की लागत कम करना और किसानों की आय में वृद्धि करना है। इसके साथ ही मिट्टी की उर्वरता सुधारने और स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप अधिक लाभदायक फसलों की खेती को बढ़ावा देने पर भी ज़ोर दिया जा रहा है। विभाग गाँव-गाँव जाकर किसानों को योजना की जानकारी दे रहा है, ताकि अधिक से अधिक किसान इसका लाभ उठा सकें।
धान की जगह इन फसलों की खेती पर मिलेगा अनुदान, बालोद में किसानों ने भी बदली फसल
उन्होंने बताया कि बालोद जिले के कुछ किसानों ने इस वर्ष अपने लगभग पाँच एकड़ धान वाले खेतों में मक्के की खेती की है। ऐसे किसान भी योजना की पात्रता के अनुसार सहायता राशि प्राप्त करेंगे। विभाग लगातार किसानों से वैकल्पिक फसलों की खेती अपनाने की अपील कर रहा है।