मध्य प्रदेश में 100% मूंग खरीदी की मांग पर अड़े किसान, भोपाल में डाला डेरा; किसानों को मिला Gen-Z का साथ
Umang | Jul 29, 2026, 13:45 IST
मध्य प्रदेश में मूंग की 100 प्रतिशत सरकारी खरीद की मांग को लेकर किसानों का आंदोलन तेज़ हो गया है। हज़ारों किसान भोपाल के बाहरी इलाके में डेरा डाले हुए हैं और एमएसपी पर पूरी खरीद, खाद वितरण व्यवस्था में सुधार तथा किसानों से जुड़े लंबित मुद्दों के समाधान की मांग कर रहे हैं। इस बीच पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने एमएसपी पर मूंग खरीद में तेज़ी लाने की अपील की है, जबकि राज्य सरकार ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से हस्तक्षेप की मांग की है। कांग्रेस ने भी किसानों की मांगों का समर्थन करते हुए सरकार से उनसे बातचीत कर उनकी जायज़ मांगों पर कार्रवाई करने की अपील की है।
भोपाल में किसानों का बड़ा आंदोलन
मध्य प्रदेश में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर मूंग की 100 प्रतिशत सरकारी खरीद की मांग को लेकर किसानों का आंदोलन लगातार तेज़ हो रहा है। मंगलवार को संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में चल रहे 'किसान क्रांति' मार्च के तहत हज़ारों किसान अनाज की बोरियाँ, बिस्तर, खाना पकाने के बर्तन और एक हफ़्ते का राशन लेकर भोपाल के बाहरी इलाक़े में पहुँचे और सावरकर सेतु के पास डेरा डाल दिया। किसानों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
आंदोलन के बीच राज्य सरकार ने भी केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है। मुख्यमंत्री मोहन यादव की सरकार ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर इस मामले में दख़ल देने का अनुरोध किया है। दूसरी ओर, किसान मुख्यमंत्री आवास तक मार्च की तैयारी कर रहे हैं। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर प्रभावित इलाक़ों के स्कूलों में छुट्टी की घोषणा भी की है।
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने राज्य सरकार से एमएसपी पर मूंग की खरीद में तेज़ी लाने की मांग की है। उनका कहना है कि मध्य प्रदेश देश का सबसे बड़ा मूंग उत्पादक राज्य है और वर्ष 2025-26 सीज़न के लिए केंद्र सरकार ने राज्य से लगभग 4.54 लाख मीट्रिक टन मूंग खरीद को मंज़ूरी दी है, जो देशभर में स्वीकृत कुल मात्रा का लगभग 87 प्रतिशत है।
कमलनाथ ने मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा कि 16 जुलाई तक राज्य में स्वीकृत मात्रा का केवल लगभग 2 प्रतिशत ही खरीदा जा सका था। उनके अनुसार, इस वजह से लाखों किसान एमएसपी पर फसल बेचने का इंतज़ार कर रहे हैं, जबकि धीमी खरीद प्रक्रिया के कारण उन्हें अपनी उपज औने-पौने दामों पर बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
किसानों का मार्च बरखेड़ा से शुरू हुआ था। ओबेदुल्लागंज टोल प्लाज़ा के पास पुलिस ने उन्हें कुछ समय के लिए रोका, लेकिन बाद में भोपाल की ओर आगे बढ़ने की अनुमति दे दी। किसान नेताओं के अनुसार, आंदोलन में 2,000 से अधिक किसान और सैकड़ों ट्रैक्टर-ट्रॉलियाँ शामिल हैं। संयुक्त किसान मोर्चा का कहना है कि राज्यभर के 19 किसान संगठनों ने इस आंदोलन में हिस्सा लिया है। किसान नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस ने विदिशा, रायसेन, हरदा, नर्मदापुरम और बुधनी जिलों में बैरिकेडिंग कर कई किसानों को गाँवों से बाहर निकलने से रोका।
आंदोलन कर रहे किसानों की प्रमुख मांगों में मूंग फसल की 100 प्रतिशत सरकारी खरीद, खाद वितरण व्यवस्था में तत्काल सुधार और किसानों से जुड़े लंबित मुद्दों पर ठोस निर्णय शामिल हैं।
किसानों का कहना है कि वे अनाज, बिस्तर, बर्तन और राशन के साथ धरना दे रहे हैं और जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक आंदोलन समाप्त नहीं करेंगे। किसान नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी मांगें नहीं मानीं तो मुख्यमंत्री आवास का घेराव किया जाएगा।
इस बीच भोपाल में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। शहर के प्रवेश मार्गों पर पुलिस बल तैनात है और किसान मार्च पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।
इस किसान आंदोलन में युवाओं की मौजूदगी भी लगातार बढ़ती दिख रही है। बड़ी संख्या में Gen-Z प्रदर्शन स्थल पर पहुँचकर किसानों के समर्थन में तख्तियाँ और पोस्टर लेकर खड़े नज़र आ रहे हैं। हाल ही में दिल्ली में हुए CJP प्रदर्शन में भी युवाओं की उल्लेखनीय भागीदारी देखने को मिली थी। अब भोपाल में किसानों के आंदोलन में भी युवाओं की बढ़ती मौजूदगी इस बात का संकेत मानी जा रही है कि सामाजिक और जनसरोकार से जुड़े आंदोलनों में नई पीढ़ी की भागीदारी बढ़ रही है।
कांग्रेस ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा कि भोपाल में किसान अपने हक़ की आवाज़ उठा रहे हैं और उन्होंने अपनी मांगें सरकार के सामने रखकर बीच सड़क पर डेरा डाल दिया है। पार्टी ने कहा कि किसान मूंग फसल की 100 प्रतिशत सरकारी खरीद, खाद वितरण की लचर व्यवस्था में तत्काल सुधार और किसानों से जुड़े लंबित मुद्दों पर ठोस फ़ैसले की मांग कर रहे हैं।
कांग्रेस ने अपने बयान में कहा कि हज़ारों किसान अनाज, बिस्तर, बर्तन और राशन लेकर धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं और उनका कहना है कि मांगें पूरी होने तक वे धरना समाप्त नहीं करेंगे। पार्टी ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार में किसान, युवा, ग़रीब, मज़दूर और महिलाएँ समेत हर वर्ग परेशान है और अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहा है। कांग्रेस ने सरकार से किसानों से बातचीत करने और उनकी जायज़ मांगों पर संज्ञान लेने की अपील करते हुए कहा कि पार्टी देश के अन्नदाताओं के साथ है और उनके हक़ की आवाज़ उठाती रहेगी।
आंदोलन के बीच राज्य सरकार ने भी केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है। मुख्यमंत्री मोहन यादव की सरकार ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर इस मामले में दख़ल देने का अनुरोध किया है। दूसरी ओर, किसान मुख्यमंत्री आवास तक मार्च की तैयारी कर रहे हैं। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर प्रभावित इलाक़ों के स्कूलों में छुट्टी की घोषणा भी की है।
कमलनाथ ने एमएसपी पर तेज़ खरीद की मांग उठाई
कमलनाथ ने मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा कि 16 जुलाई तक राज्य में स्वीकृत मात्रा का केवल लगभग 2 प्रतिशत ही खरीदा जा सका था। उनके अनुसार, इस वजह से लाखों किसान एमएसपी पर फसल बेचने का इंतज़ार कर रहे हैं, जबकि धीमी खरीद प्रक्रिया के कारण उन्हें अपनी उपज औने-पौने दामों पर बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
किसानों का मार्च बरखेड़ा से शुरू हुआ था। ओबेदुल्लागंज टोल प्लाज़ा के पास पुलिस ने उन्हें कुछ समय के लिए रोका, लेकिन बाद में भोपाल की ओर आगे बढ़ने की अनुमति दे दी। किसान नेताओं के अनुसार, आंदोलन में 2,000 से अधिक किसान और सैकड़ों ट्रैक्टर-ट्रॉलियाँ शामिल हैं। संयुक्त किसान मोर्चा का कहना है कि राज्यभर के 19 किसान संगठनों ने इस आंदोलन में हिस्सा लिया है। किसान नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस ने विदिशा, रायसेन, हरदा, नर्मदापुरम और बुधनी जिलों में बैरिकेडिंग कर कई किसानों को गाँवों से बाहर निकलने से रोका।
किसानों की ये हैं प्रमुख मांगें
किसानों का कहना है कि वे अनाज, बिस्तर, बर्तन और राशन के साथ धरना दे रहे हैं और जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक आंदोलन समाप्त नहीं करेंगे। किसान नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी मांगें नहीं मानीं तो मुख्यमंत्री आवास का घेराव किया जाएगा।
इस बीच भोपाल में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। शहर के प्रवेश मार्गों पर पुलिस बल तैनात है और किसान मार्च पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।
Gen-Z भी शामिल
कांग्रेस ने सरकार से किसानों की मांगों पर कार्रवाई की अपील की
मध्य प्रदेश के भोपाल में किसान अपने हक की आवाज उठा रहे हैं। किसानों ने अपनी मांग सरकार के सामने रखी हैं और बीच सड़क पर डेरा डाल दिया।
— Congress (@INCIndia) July 29, 2026
किसानों की मांग है:
• मूंग फसल की 100% सरकारी खरीदी
• खाद वितरण की लचर व्यवस्था में तुरंत सुधार
• किसानों से जुड़े लंबित मुद्दों पर ठोस फैसला… pic.twitter.com/VShav2qHbi
कांग्रेस ने अपने बयान में कहा कि हज़ारों किसान अनाज, बिस्तर, बर्तन और राशन लेकर धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं और उनका कहना है कि मांगें पूरी होने तक वे धरना समाप्त नहीं करेंगे। पार्टी ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार में किसान, युवा, ग़रीब, मज़दूर और महिलाएँ समेत हर वर्ग परेशान है और अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहा है। कांग्रेस ने सरकार से किसानों से बातचीत करने और उनकी जायज़ मांगों पर संज्ञान लेने की अपील करते हुए कहा कि पार्टी देश के अन्नदाताओं के साथ है और उनके हक़ की आवाज़ उठाती रहेगी।