रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता घटाने की सलाह, हरियाणा में किसानों को सिखाए गए टिकाऊ खेती के तरीके
Gaon Connection | Jun 24, 2026, 19:19 IST
हरियाणा के रेवाड़ी ज़िले में ‘खेत बचाओ अभियान 2026’ के तहत आयोजित कार्यक्रम में किसानों को सतत खेती, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन और संतुलित उर्वरक उपयोग की जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने वर्मी कम्पोस्ट, जैव उर्वरक और फसल विविधीकरण अपनाने की सलाह दी। कृषि विज्ञान संकाय की डीन पूजा पंत ने नियमित मृदा परीक्षण को मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने के लिए आवश्यक बताया।
मिट्टी की सेहत सुधरेगी, बढ़ेगी किसानों की आमदनी (सांकेतिक तस्वीर)
बढ़ती उत्पादन लागत, मिट्टी की गिरती उर्वरता और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच किसानों को टिकाऊ कृषि पद्धतियों से जोड़ने के प्रयास तेज़ हो रहे हैं। इसी कड़ी में हरियाणा के रेवाड़ी ज़िले में आयोजित एक जागरूकता कार्यक्रम में किसानों को सतत खेती, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन और संतुलित उर्वरक उपयोग के बारे में जानकारी दी गई। कार्यक्रम में किसानों को वैज्ञानिक खेती, मृदा संरक्षण और पोषक तत्वों के संतुलित उपयोग के बारे में विस्तार से बताया गया।
कृषि विज्ञान संकाय की डीन पूजा पंत ने किसानों से मिट्टी की सेहत बनाए रखने के लिए नियमित मृदा परीक्षण कराने की अपील की। वहीं, कार्यक्रम में मौजूद विशेषज्ञों ने रासायनिक उर्वरकों पर अत्यधिक निर्भरता कम करने और पर्यावरण-अनुकूल कृषि तकनीकों को अपनाने पर ज़ोर दिया।
बुधवार को रेवाड़ी ज़िले के खालियावास और खटवाली गाँवों में एसजीटी यूनिवर्सिटी, गुरुग्राम ने कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), रेवाड़ी और इफको हरियाणा के सहयोग से ‘खेत बचाओ अभियान 2026’ के तहत जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया।
विज्ञप्ति के अनुसार, कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग, मृदा संरक्षण, जैविक खेती और कृषि समुदाय के लिए संचालित विभिन्न सरकारी योजनाओं के बारे में जागरूक करना था।
कार्यक्रम में किसानों को एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन (आईएनएम) के बारे में जानकारी दी गई। बताया गया कि जैविक और रासायनिक उर्वरकों का संतुलित उपयोग मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और फसल उत्पादकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके साथ ही वैज्ञानिक पोषक तत्व प्रबंधन, मिट्टी में कार्बन संरक्षण और दीर्घकालिक मृदा स्वास्थ्य के महत्व पर भी चर्चा की गई।
किसानों को वर्मी कम्पोस्ट, जैव उर्वरकों और फसल विविधीकरण जैसी कम लागत वाली तथा पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया। कार्यक्रम में बताया गया कि फलों, विदेशी सब्ज़ियों और फूलों की खेती किसानों की आय बढ़ाने में मददगार हो सकती है, जबकि इससे पर्यावरण पर पड़ने वाला प्रभाव भी कम होगा।
पूजा पंत ने किसानों को एसजीटी यूनिवर्सिटी की मृदा परीक्षण प्रयोगशाला के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि यहाँ मिट्टी परीक्षण और परामर्श सेवाएँ उपलब्ध हैं, जिससे किसान पोषक तत्वों का कुशल प्रबंधन कर सकते हैं और फसल उत्पादन बढ़ा सकते हैं। उन्होंने कहा कि मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने के लिए नियमित मृदा परीक्षण अत्यंत आवश्यक है।
कृषि विज्ञान संकाय की डीन पूजा पंत ने किसानों से मिट्टी की सेहत बनाए रखने के लिए नियमित मृदा परीक्षण कराने की अपील की। वहीं, कार्यक्रम में मौजूद विशेषज्ञों ने रासायनिक उर्वरकों पर अत्यधिक निर्भरता कम करने और पर्यावरण-अनुकूल कृषि तकनीकों को अपनाने पर ज़ोर दिया।
खेत बचाओ अभियान के तहत आयोजित हुआ कार्यक्रम
विज्ञप्ति के अनुसार, कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग, मृदा संरक्षण, जैविक खेती और कृषि समुदाय के लिए संचालित विभिन्न सरकारी योजनाओं के बारे में जागरूक करना था।