किसानों के लिए सरकार का बड़ा प्लान! ‘मिशन मौसम’ में AI और रडार से मिलेगी बारिश, लू और तूफ़ान की पहले जानकारी
Mansi | Aug 13, 2026, 18:37 IST
भारत सरकार ने मौसम की सटीकता को बढ़ाने के लिए मिशन मौसम की घोषणा की है, जो 2026 से 2031 तक चलेगा। इस मिशन के अंतर्गत रडार और सैटेलाइट तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे मौसम की जानकारी और पूर्वानुमान पहले से कहीं अधिक सटीक होंगे। इससे किसानों, मछुआरों और विमानन क्षेत्र को कई लाभ होंगे और गंभीर मौसम की घटनाओं के लिए पूर्व चेतावनी प्रणाली में सुधार होगा।
मिशन मौसम के तहत AI, रडार और सैटेलाइट से किसानों को समय पर मौसम की सटीक चेतावनी मिलेगी
मौसम अब सिर्फ़ बारिश या धूप का अनुमान लगाने तक सीमित नहीं रहा है। तेज़ बारिश, चक्रवात, लू, आकाशीय बिजली और शहरी बाढ़ जैसी घटनाएँ आम ज़िंदगी के साथ-साथ खेती, मछली पालन, विमानन और आपदा प्रबंधन को भी प्रभावित करती हैं। ऐसे में समय रहते मौसम की सही जानकारी मिलना बेहद ज़रूरी है। इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ‘मिशन मौसम’ के ज़रिए देश की मौसम निगरानी और पूर्वानुमान प्रणाली को आधुनिक बनाने पर काम कर रही है।
पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने 13 अगस्त को राज्यसभा में लिखित जवाब में मिशन की प्रगति और आगे की योजना की जानकारी दी। सरकार का लक्ष्य ऐसी व्यवस्था तैयार करना है, जिससे देश मौसम से जुड़ी चुनौतियों के लिए पहले से तैयार रहे और बदलती जलवायु के प्रभावों को बेहतर तरीके से समझ सके।
मिशन मौसम को आगे बढ़ाने के लिए 2026 से 2031 के बीच छह प्रमुख क्षेत्रों पर काम करने की योजना है। इनमें मौसम की निगरानी को बेहतर बनाना, पृथ्वी प्रणाली से जुड़े उन्नत मॉडल तैयार करना और मौसम में बदलाव से जुड़े वैज्ञानिक शोध को बढ़ावा देना शामिल है। इसके अलावा वायुमंडल की लगातार निगरानी, नई मौसम तकनीकों का विकास और वायुमंडलीय विज्ञान से जुड़े राष्ट्रीय कार्यक्रमों को भी आगे बढ़ाया जाएगा। इसका मक़सद मौसम से जुड़ी जानकारी को ज़्यादा सटीक बनाना और अलग-अलग क्षेत्रों की ज़रूरत के हिसाब से उपयोगी पूर्वानुमान उपलब्ध कराना है।
सरकार ने 2026-27 के लिए मिशन मौसम का अनुमानित बजट 1,342.29 करोड़ रखा है। इसमें 855.29 करोड़ राजस्व खर्च और 487 करोड़ पूंजीगत खर्च के लिए प्रस्तावित हैं। इससे पहले मिशन को 2024 में केंद्रीय मंत्रिमंडल से मंज़ूरी मिली थी। 2024-25 और 2025-26 के लिए इसके लिए कुल 2,000 करोड़ का बजट निर्धारित किया गया था। प्रधानमंत्री ने 14 जनवरी 2025 को मिशन का शुभारंभ किया था।
मिशन मौसम के तहत देश में मौसम की निगरानी के मौजूदा ढाँचे को और मजबूत किया जाएगा। इसके लिए मौसम रडार, सैटेलाइट, समुद्री और ज़मीनी निगरानी उपकरणों के साथ विमानन क्षेत्र से जुड़े मौसम संबंधी सिस्टम को भी बेहतर बनाया जाएगा। जितनी अधिक और सटीक जानकारी उपलब्ध होगी, उतना ही बेहतर मौसम मॉडल तैयार किया जा सकेगा। इसके लिए उच्च क्षमता वाले कंप्यूटिंग सिस्टम और आधुनिक मॉडलिंग तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा, ताकि मौसम का पूर्वानुमान पहले के मुकाबले अधिक सटीक बनाया जा सके।
मौसम पूर्वानुमान को बेहतर बनाने में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग की भी अहम भूमिका होगी। इन तकनीकों की मदद से बड़ी मात्रा में मौसम संबंधी आँकड़ों का विश्लेषण किया जाएगा और किसी ख़ास क्षेत्र के लिए अधिक उपयोगी पूर्वानुमान तैयार करने की कोशिश की जाएगी। इसका सीधा फ़ायदा उन परिस्थितियों में हो सकता है, जब मौसम तेजी़ से बदलता है। भारी बारिश, चक्रवात, गरज-चमक, आकाशीय बिजली, लू और शहरी बाढ़ जैसी घटनाओं के लिए पहले से चेतावनी देने की क्षमता को मजबूत किया जाएगा।
मौसम की सही जानकारी खेती में सीधे काम आती है। बारिश कब होगी, तापमान कैसा रहेगा और मौसम में अचानक बदलाव की संभावना है या नहीं, इन जानकारियों के आधार पर किसान बुआई, सिंचाई और फसल प्रबंधन से जुड़े फ़ैसले बेहतर तरीके से ले सकते हैं। मौसम से जुड़े जोखिमों की पहले जानकारी मिलने पर किसान अपनी फसल को संभावित नुकसान से बचाने के लिए समय रहते तैयारी भी कर सकेंगे। इससे मौसम आधारित कृषि सलाह को अधिक उपयोगी बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
मिशन मौसम का दायरा खेती तक सीमित नहीं है। समुद्र की स्थिति और खराब मौसम की जानकारी पहले मिलने से मछुआरों को समुद्र में जाने से जुड़े जोखिमों को समझने में मदद मिलेगी। वहीं विमानन क्षेत्र में कोहरे, तेज़ हवाओं और तूफ़ान जैसी परिस्थितियों की बेहतर जानकारी मिलने से उड़ानों के संचालन और सुरक्षा को बेहतर ढंग से संभालने में मदद मिल सकती है।
मौसम की चेतावनी तभी सबसे उपयोगी होती है, जब वह समय पर और लोगों की ज़रूरत के मुताबिक़ मिले। मिशन मौसम के तहत आपदा प्रबंधन एजेंसियों को गंभीर मौसम की घटनाओं से पहले अधिक सटीक और असर-आधारित जानकारी उपलब्ध कराने पर भी ध्यान दिया जा रहा है। इससे प्रशासन को राहत और बचाव की तैयारी पहले शुरू करने में मदद मिल सकती है। सरकार का उद्देश्य केवल यह बताना नहीं है कि मौसम ख़राब होने वाला है, बल्कि यह समझने में भी मदद करना है कि किसी क्षेत्र में इसका संभावित असर कितना हो सकता है।
मिशन मौसम को देश की मौसम पूर्वानुमान व्यवस्था को नई तकनीक से जोड़ने की एक बड़ी पहल के तौर पर देखा जा रहा है। रडार, सैटेलाइट, AI, मशीन लर्निंग और आधुनिक मौसम मॉडल के इस्तेमाल से पूर्वानुमान को बेहतर बनाने की कोशिश की जा रही है। इसका लाभ किसान, मछुआरे, विमानन क्षेत्र और आपदा प्रबंधन एजेंसियों के साथ आम लोगों को भी मिल सकता है। आने वाले वर्षों में इसका बड़ा उद्देश्य यही है कि मौसम की गंभीर घटनाओं की जानकारी पहले मिले और उनके असर को कम करने के लिए तैयारी का पर्याप्त समय मिल सके।
पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने 13 अगस्त को राज्यसभा में लिखित जवाब में मिशन की प्रगति और आगे की योजना की जानकारी दी। सरकार का लक्ष्य ऐसी व्यवस्था तैयार करना है, जिससे देश मौसम से जुड़ी चुनौतियों के लिए पहले से तैयार रहे और बदलती जलवायु के प्रभावों को बेहतर तरीके से समझ सके।
2026-31 में 6 क्षेत्रों पर रहेगा फोकस
सरकार ने 2026-27 के लिए मिशन मौसम का अनुमानित बजट 1,342.29 करोड़ रखा है। इसमें 855.29 करोड़ राजस्व खर्च और 487 करोड़ पूंजीगत खर्च के लिए प्रस्तावित हैं। इससे पहले मिशन को 2024 में केंद्रीय मंत्रिमंडल से मंज़ूरी मिली थी। 2024-25 और 2025-26 के लिए इसके लिए कुल 2,000 करोड़ का बजट निर्धारित किया गया था। प्रधानमंत्री ने 14 जनवरी 2025 को मिशन का शुभारंभ किया था।
रडार और सैटेलाइट से मिलेगी मौसम की बेहतर तस्वीर
मौसम पूर्वानुमान को बेहतर बनाने में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग की भी अहम भूमिका होगी। इन तकनीकों की मदद से बड़ी मात्रा में मौसम संबंधी आँकड़ों का विश्लेषण किया जाएगा और किसी ख़ास क्षेत्र के लिए अधिक उपयोगी पूर्वानुमान तैयार करने की कोशिश की जाएगी। इसका सीधा फ़ायदा उन परिस्थितियों में हो सकता है, जब मौसम तेजी़ से बदलता है। भारी बारिश, चक्रवात, गरज-चमक, आकाशीय बिजली, लू और शहरी बाढ़ जैसी घटनाओं के लिए पहले से चेतावनी देने की क्षमता को मजबूत किया जाएगा।