"उर्वरक नहीं, जहर डाल रहे हैं?" जरूरत से 25 गुना ज्यादा N:P:K का इस्तेमाल, जानिए सबसे खराब स्थिति किन राज्यों में
Preeti Nahar | May 31, 2026, 18:16 IST
देश में रासायनिक उर्वरकों का असंतुलित उपयोग चिंता का विषय है। नाइट्रोजन का अत्यधिक प्रयोग मिट्टी की सेहत बिगाड़ रहा है। नागालैंड, राजस्थान और झारखंड जैसे राज्यों में स्थिति गंभीर है। कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने के लिए संतुलित उर्वरक प्रयोग आवश्यक है। खेत बचाने के साथ-साथ मिट्टी बचाना भी जरूरी हो गया है।
भारत सरकार, रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय
देश में फसल उत्पादन बढ़ाने की दौड़ में रासायनिक उर्वरकों का असंतुलित उपयोग एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार नाइट्रोजन (N), फॉस्फोरस (P) और पोटाश (K) का संतुलित अनुपात 4:2:1 माना जाता है, लेकिन कई राज्यों में किसान इस अनुपात से कहीं अधिक नाइट्रोजन आधारित उर्वरकों का प्रयोग कर रहे हैं। इसका असर मिट्टी की उर्वरता, फसल की गुणवत्ता और पर्यावरण पर पड़ रहा है। ऐसे में ‘खेत बचाओ अभियान’ के साथ-साथ ‘मिट्टी बचाओ अभियान’ को भी तेज करने की जरूरत महसूस की जा रही है।
उर्वरक मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024-25 में देश का औसत NPK अनुपात 9.3:3.5:1 रहा, जो आदर्श अनुपात 4:2:1 से काफी अधिक है। नागालैंड, राजस्थान, झारखंड, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में नाइट्रोजन का उपयोग बेहद ज्यादा दर्ज किया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक असंतुलित उर्वरक उपयोग से मिट्टी की सेहत खराब हो सकती है और उत्पादन लागत भी बढ़ सकती है।
भारतीय कृषि में रासायनिक उर्वरकों का उपयोग लगातार बढ़ रहा है, लेकिन संतुलित उपयोग की कमी चिंता का विषय बन गई है। कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि फसलों को पोषक तत्वों की सही मात्रा देने के लिए NPK का आदर्श अनुपात 4:2:1 होना चाहिए। इसका मतलब है कि 4 भाग नाइट्रोजन, 2 भाग फॉस्फोरस और 1 भाग पोटाश का उपयोग किया जाए।
हालांकि उर्वरक मंत्रालय के 2024-25 के आंकड़े बताते हैं कि कई राज्यों में नाइट्रोजन का उपयोग जरूरत से कहीं अधिक हो रहा है। इससे मिट्टी में सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी, जैविक कार्बन में गिरावट और उत्पादन क्षमता पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
आंकड़ों के अनुसार नागालैंड में NPK अनुपात 101:5.8:1 दर्ज किया गया, जो देश में सबसे अधिक असंतुलित है। इसके बाद राजस्थान (45.7:15:1) और झारखंड (37.3:11:1) का स्थान है। पंजाब और हरियाणा जैसे कृषि प्रधान राज्यों में भी नाइट्रोजन आधारित उर्वरकों का अत्यधिक उपयोग सामने आया है।
उत्तर प्रदेश का NPK अनुपात 22.7:6.7:1 है, जो राष्ट्रीय औसत से काफी अधिक है। इससे स्पष्ट होता है कि राज्य में भी संतुलित उर्वरक उपयोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार लगातार अधिक मात्रा में यूरिया और अन्य नाइट्रोजन आधारित उर्वरकों के प्रयोग से मिट्टी की संरचना प्रभावित होती है। इससे मिट्टी में जैविक पदार्थों की मात्रा घटती है, सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी होती है और जल धारण क्षमता भी कम हो सकती है।
असंतुलित उर्वरक उपयोग से फसलों की रोग प्रतिरोधक क्षमता घटती है और किसानों की लागत बढ़ती है। कई क्षेत्रों में मिट्टी की उर्वरता घटने के कारण उत्पादन स्थिर होने या कम होने की समस्या भी सामने आ रही है।
कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि केवल उत्पादन बढ़ाने पर ध्यान देने के बजाय मिट्टी की सेहत सुधारने पर भी जोर देना होगा। इसके लिए मृदा स्वास्थ्य कार्ड की सिफारिशों के अनुसार उर्वरकों का उपयोग, जैविक खाद, हरी खाद, गोबर खाद और सूक्ष्म पोषक तत्वों का संतुलित प्रयोग बढ़ाना जरूरी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते उर्वरकों के संतुलित उपयोग पर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले वर्षों में मिट्टी की गुणवत्ता और कृषि उत्पादन दोनों प्रभावित हो सकते हैं। इसलिए अब ‘खेत बचाओ अभियान’ के साथ ‘मिट्टी बचाओ अभियान’ को भी राष्ट्रीय स्तर पर गति देने की आवश्यकता है।
(भारत सरकार, रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय (Department of Fertilizers), वर्ष 2024-25 के राज्यवार NPK अनुपात के आंकड़े)
उर्वरक मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024-25 में देश का औसत NPK अनुपात 9.3:3.5:1 रहा, जो आदर्श अनुपात 4:2:1 से काफी अधिक है। नागालैंड, राजस्थान, झारखंड, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में नाइट्रोजन का उपयोग बेहद ज्यादा दर्ज किया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक असंतुलित उर्वरक उपयोग से मिट्टी की सेहत खराब हो सकती है और उत्पादन लागत भी बढ़ सकती है।
पूरी रिपोर्ट
हालांकि उर्वरक मंत्रालय के 2024-25 के आंकड़े बताते हैं कि कई राज्यों में नाइट्रोजन का उपयोग जरूरत से कहीं अधिक हो रहा है। इससे मिट्टी में सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी, जैविक कार्बन में गिरावट और उत्पादन क्षमता पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
किन राज्यों में कितना है NPK अनुपात?
| राज्य | NPK अनुपात |
|---|---|
| नागालैंड | 101 : 5.8 : 1 |
| राजस्थान | 45.7 : 15 : 1 |
| झारखंड | 37.3 : 11 : 1 |
| पंजाब | 29.8 : 6.5 : 1 |
| हरियाणा | 29.2 : 7.3 : 1 |
| उत्तर प्रदेश | 22.7 : 6.7 : 1 |
| उत्तराखंड | 22.2 : 5.1 : 1 |
| मध्य प्रदेश | 15.3 : 6.8 : 1 |
| गुजरात | 14.7 : 4.6 : 1 |
| तेलंगाना | 12.6 : 4.8 : 1 |
| छत्तीसगढ़ | 11.2 : 5.1 : 1 |
| बिहार | 11 : 3.3 : 1 |
| राष्ट्रीय औसत | 9.3 : 3.5 : 1 |
सबसे खराब स्थिति किन राज्यों में?
उत्तर प्रदेश का NPK अनुपात 22.7:6.7:1 है, जो राष्ट्रीय औसत से काफी अधिक है। इससे स्पष्ट होता है कि राज्य में भी संतुलित उर्वरक उपयोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता है।
मिट्टी पर क्या पड़ता है असर?
असंतुलित उर्वरक उपयोग से फसलों की रोग प्रतिरोधक क्षमता घटती है और किसानों की लागत बढ़ती है। कई क्षेत्रों में मिट्टी की उर्वरता घटने के कारण उत्पादन स्थिर होने या कम होने की समस्या भी सामने आ रही है।
क्यों जरूरी है ‘मिट्टी बचाओ अभियान’?
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते उर्वरकों के संतुलित उपयोग पर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले वर्षों में मिट्टी की गुणवत्ता और कृषि उत्पादन दोनों प्रभावित हो सकते हैं। इसलिए अब ‘खेत बचाओ अभियान’ के साथ ‘मिट्टी बचाओ अभियान’ को भी राष्ट्रीय स्तर पर गति देने की आवश्यकता है।
(भारत सरकार, रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय (Department of Fertilizers), वर्ष 2024-25 के राज्यवार NPK अनुपात के आंकड़े)