खाद की कमी से परेशान किसान! बाराबंकी की खाद समिति में रिकॉर्ड और वितरण व्यवस्था पर उठे सवाल, जानें ज़मीनी हक़ीक़त
Umang | Jul 30, 2026, 14:32 IST
उत्तर प्रदेश के कई ज़िलों में यूरिया और डीएपी खाद की कमी को लेकर किसानों की परेशानियाँ बढ़ रही हैं। 'गाँव कनेक्शन' की ग्राउंड रिपोर्ट में बाराबंकी के बी-पैक्स समिति लिमिटेड, निंदूरा में किसानों ने खाद की कमी, वितरण में देरी और निजी बाज़ार में महँगे दाम पर खाद मिलने की शिकायत की। वहीं समिति में खाद वितरण के दौरान रजिस्टर में प्रविष्टि नहीं मिलने और कंप्यूटर ऑपरेटर द्वारा सचिव की अनुपस्थिति में खाद वितरण किए जाने जैसे सवाल भी सामने आए। हालांकि कुछ किसानों ने समय पर खाद मिलने की बात भी कही।
बाराबंकी में किसानों ने खोली व्यवस्था की पोल
उत्तर प्रदेश के कई ज़िलों में इन दिनों यूरिया और डीएपी खाद को लेकर किसानों के सामने बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। कई स्थानों से खाद की कमी और कालाबाज़ारी की शिकायतें सामने आ रही हैं। समय पर खाद नहीं मिलने से किसान लगातार समितियों और बिक्री केंद्रों के चक्कर लगा रहे हैं, जबकि कई किसानों का कहना है कि ज़रूरत के मुताबिक खाद उपलब्ध नहीं हो पा रही है। इसी स्थिति का जायज़ा लेने के लिए 'गाँव कनेक्शन' की टीम ग्राउंड पर पहुँची और किसानों से खाद की उपलब्धता, वितरण व्यवस्था और उनकी परेशानियों को लेकर बातचीत की।
इसी क्रम में 'गाँव कनेक्शन' ने बाराबंकी ज़िले की बी-पैक्स समिति लिमिटेड, निंदूर का भी जायज़ा लिया। यहाँ किसानों ने खाद की कमी, वितरण में देरी और निजी दुकानों पर अधिक दाम वसूले जाने जैसी समस्याएँ बताईं। वहीं समिति में खाद वितरण, स्टॉक रजिस्टर की प्रविष्टियों और कर्मचारियों की ज़िम्मेदारियों को लेकर भी कई सवाल उठे। किसानों और समिति कर्मचारियों से बातचीत के दौरान खाद वितरण व्यवस्था से जुड़ी कई बातें सामने आईं।
समिति पर मौजूद कई किसानों ने बताया कि वे दो-दो दिन से खाद लेने के लिए चक्कर लगा रहे थे, लेकिन समय पर खाद नहीं मिल रही थी। कुछ किसानों का कहना था कि उनकी ज़मीन के हिसाब से जितनी खाद मिलनी चाहिए, उतनी उपलब्ध नहीं कराई जा रही है। एक किसान ने कहा कि पाँच बीघा खेती के लिए तीन बोरी खाद पर्याप्त नहीं है, जबकि फसल में दो बार खाद डालनी पड़ती है। किसानों का कहना था कि पहली बार खाद मिल भी जाए तो दूसरी बार 15 से 20 दिन बाद ज़रूरत पड़ने पर समिति से खाद मिलने की संभावना नहीं रहती और उन्हें निजी दुकानों का रुख करना पड़ता है।
![खाद की लिमिट पर्याप्त नहीं है: किसान]()
मौके पर खाद वितरण कर रहे कंप्यूटर ऑपरेटर अंकित ने बताया कि समिति सचिव मनोज कुमार बाराबंकी गए हुए हैं और उनके निर्देश पर वह खाद का वितरण कर रहे हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि वह कंप्यूटर ऑपरेटर हैं और सामान्य तौर पर खाद वितरण का कार्य उनकी ज़िम्मेदारी नहीं है। इस दौरान यह भी सामने आया कि रजिस्टर में 28 जुलाई की प्रविष्टि दर्ज नहीं थी, जबकि उसी दिन 60 से 65 किसानों को खाद वितरित किए जाने की बात कही गई। कंप्यूटर ऑपरेटर ने इसे अपनी गलती बताते हुए कहा कि भीड़ अधिक होने के कारण समय पर प्रविष्टि नहीं हो सकी। उन्होंने बताया कि उस समय समिति में लगभग 55 बोरी खाद का स्टॉक मौजूद था और नया आवंटन भी हो चुका है, जो जल्द पहुँचने की उम्मीद है।
![किसानों की डिटेल भरे बिना कराये गये साइन]()
एक किसान ने आरोप लगाया कि ₹266 प्रति बोरी वाली खाद ₹280 दी जा रही है। हालांकि समिति की ओर से इस आरोप से इनकार किया गया और कहा गया कि ऐसी कोई अनियमितता नहीं है।
![₹280 में बोरी बेचने की बात बताता किसान]()
किसानों ने यह भी कहा कि जब समिति से खाद उपलब्ध नहीं होती तो उन्हें निजी दुकानों से अधिक कीमत पर खाद खरीदनी पड़ती है। किसानों के अनुसार, सरकारी दर लगभग ₹1,350 प्रति बोरी होने के बावजूद निजी बाज़ार में यही खाद करीब ₹1,850 तक में मिल रही है। उनका कहना था कि सबसे बड़ी समस्या समय पर दूसरी खेप में खाद नहीं मिलना है, जिसके कारण उन्हें मजबूरी में महँगे दाम चुकाने पड़ते हैं।
ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान कुछ किसानों ने बताया कि उन्हें खाद बिना किसी परेशानी के मिल गई, जबकि अन्य किसानों ने खाद की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था को लेकर असंतोष जताया। कुल मिलाकर समिति में खाद वितरण को लेकर किसानों की मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिली।
इसी क्रम में 'गाँव कनेक्शन' ने बाराबंकी ज़िले की बी-पैक्स समिति लिमिटेड, निंदूर का भी जायज़ा लिया। यहाँ किसानों ने खाद की कमी, वितरण में देरी और निजी दुकानों पर अधिक दाम वसूले जाने जैसी समस्याएँ बताईं। वहीं समिति में खाद वितरण, स्टॉक रजिस्टर की प्रविष्टियों और कर्मचारियों की ज़िम्मेदारियों को लेकर भी कई सवाल उठे। किसानों और समिति कर्मचारियों से बातचीत के दौरान खाद वितरण व्यवस्था से जुड़ी कई बातें सामने आईं।
खाद वितरण को लेकर किसानों ने क्या शिकायतें कीं?
खाद की लिमिट पर्याप्त नहीं है: किसान
समिति में खाद वितरण और रिकॉर्ड को लेकर क्या मिला?
किसानों की डिटेल भरे बिना कराये गये साइन
किसानों ने महँगी खाद और निजी बाज़ार को लेकर क्या कहा?
₹280 में बोरी बेचने की बात बताता किसान
किसानों ने यह भी कहा कि जब समिति से खाद उपलब्ध नहीं होती तो उन्हें निजी दुकानों से अधिक कीमत पर खाद खरीदनी पड़ती है। किसानों के अनुसार, सरकारी दर लगभग ₹1,350 प्रति बोरी होने के बावजूद निजी बाज़ार में यही खाद करीब ₹1,850 तक में मिल रही है। उनका कहना था कि सबसे बड़ी समस्या समय पर दूसरी खेप में खाद नहीं मिलना है, जिसके कारण उन्हें मजबूरी में महँगे दाम चुकाने पड़ते हैं।
ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान कुछ किसानों ने बताया कि उन्हें खाद बिना किसी परेशानी के मिल गई, जबकि अन्य किसानों ने खाद की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था को लेकर असंतोष जताया। कुल मिलाकर समिति में खाद वितरण को लेकर किसानों की मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिली।