Jammu and Kashmir Fruit Export: जम्मू-कश्मीर की अरेको चेरी और सेंट्रोज़ प्लम को मिली विदेशों में पहचान, UAE भेजी गई पहली खेप
Lata Mishra | Jul 06, 2026, 14:53 IST
जम्मू-कश्मीर के बागवानों के लिए खुशखबरी! पहली बार अरेको चेरी और सेंट्रोज़ प्लम की खेप यूएई भेजी गई है। एपीईडीए की पहल पर शोपियाँ और पुलवामा के किसानों से खरीदे गए ये फल अबू धाबी और दुबई पहुंचे। इससे किसानों को अच्छे दाम मिले और बागवानी क्षेत्र के लिए नए रास्ते खुले।
सरकार और APEDA का लक्ष्य आने वाले वर्षों में जम्मू-कश्मीर से चेरी, प्लम और अन्य बागवानी उत्पादों के निर्यात को बढ़ाना है।
जम्मू-कश्मीर के बागवानी क्षेत्र के लिए यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। पहली बार राज्य में उगाई गई प्रीमियम अरेको चेरी (Areko Cherry ) और सेंट्रोज़ प्लम (Scentrose Plum ) की खेप संयुक्त अरब अमीरात (UAE) भेजी गई है। इस पहल को कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) और जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने मिलकर आगे बढ़ाया है। इसका उद्देश्य राज्य के उच्च गुणवत्ता वाले फलों को अंतरराष्ट्रीय बाज़ार तक पहुँचाना और किसानों की आय बढ़ाना है।
पहली खेप में लगभग 1 मीट्रिक टन प्रीमियम स्टोन फ्रूट्स भेजे गए। इनमें अरेको चेरी और सेंट्रोज़ प्लम शामिल हैं। ये फल जम्मू-कश्मीर के शोपियाँ और पुलवामा ज़िले के किसानों से खरीदे गए और इन्हें UAE के अबू धाबी और दुबई के बाज़ारों के लिए रवाना किया गया।
क्या है अरेको चेरी?
अरेको चेरी यूरोपीय मूल की स्वीट चेरी की एक प्रीमियम किस्म है। इसके फल आकार में बड़े, स्वाद में मीठे और गुणवत्ता में बेहतर माने जाते हैं। इसकी शेल्फ़ लाइफ़ भी अपेक्षाकृत अधिक होती है, जिससे इसे लंबी दूरी तक निर्यात करना आसान होता है।
सेंट्रोज़ प्लम क्यों है ख़ास?
सेंट्रोज़ प्लम उच्च गुणवत्ता वाली प्लम की एक किस्म है। इसका स्वाद, रंग और आकार इसे प्रीमियम फलों की श्रेणी में रखते हैं। अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में इसकी माँग लगातार बढ़ रही है, इसलिए निर्यात के लिहाज़ से इसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
किसानों को क्या फ़ायदा होगा?
इस निर्यात से जम्मू-कश्मीर के बागवानों को घरेलू मंडी की तुलना में बेहतर कीमत मिली है। सरकारी जानकारी के अनुसार-
निर्यात क्यों है महत्वपूर्ण?
जम्मू-कश्मीर में सेब, चेरी, अखरोट और अन्य बागवानी फ़सलों का उत्पादन लंबे समय से होता रहा है। लेकिन अब उच्च गुणवत्ता वाले फलों के निर्यात पर भी ज़ोर दिया जा रहा है। इससे किसानों को केवल स्थानीय मंडियों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय ख़रीदारों तक भी उनकी पहुँच बनेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि गुणवत्ता, ग्रेडिंग, पैकेजिंग और कोल्ड चेन व्यवस्था को और मज़बूत किया जाए, तो जम्मू-कश्मीर के फल वैश्विक बाज़ार में अपनी अलग पहचान बना सकते हैं।
आगे क्या?
सरकार और APEDA का लक्ष्य आने वाले वर्षों में जम्मू-कश्मीर से चेरी, प्लम और अन्य बागवानी उत्पादों के निर्यात को बढ़ाना है। इससे किसानों को बेहतर बाज़ार, बेहतर दाम और निर्यात आधारित खेती के नए अवसर मिल सकते हैं।
पहली खेप में लगभग 1 मीट्रिक टन प्रीमियम स्टोन फ्रूट्स भेजे गए। इनमें अरेको चेरी और सेंट्रोज़ प्लम शामिल हैं। ये फल जम्मू-कश्मीर के शोपियाँ और पुलवामा ज़िले के किसानों से खरीदे गए और इन्हें UAE के अबू धाबी और दुबई के बाज़ारों के लिए रवाना किया गया।
क्या है अरेको चेरी?
अरेको चेरी यूरोपीय मूल की स्वीट चेरी की एक प्रीमियम किस्म है। इसके फल आकार में बड़े, स्वाद में मीठे और गुणवत्ता में बेहतर माने जाते हैं। इसकी शेल्फ़ लाइफ़ भी अपेक्षाकृत अधिक होती है, जिससे इसे लंबी दूरी तक निर्यात करना आसान होता है।
सेंट्रोज़ प्लम क्यों है ख़ास?
सेंट्रोज़ प्लम उच्च गुणवत्ता वाली प्लम की एक किस्म है। इसका स्वाद, रंग और आकार इसे प्रीमियम फलों की श्रेणी में रखते हैं। अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में इसकी माँग लगातार बढ़ रही है, इसलिए निर्यात के लिहाज़ से इसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
किसानों को क्या फ़ायदा होगा?
इस निर्यात से जम्मू-कश्मीर के बागवानों को घरेलू मंडी की तुलना में बेहतर कीमत मिली है। सरकारी जानकारी के अनुसार-
- अरेको चेरी उत्पादकों को घरेलू मंडी की तुलना में लगभग 60% अधिक मूल्य मिला। उदाहरण के तौर पर, यदि घरेलू मंडी में चेरी ₹250–300 प्रति किलो बिक रही हो, तो निर्यात में इसकी कीमत करीब ₹400–480 प्रति किलो तक पहुँच सकती है।
- सेंट्रोज़ प्लम उत्पादकों को लगभग 120% अधिक मूल्य मिला। उदाहरण के तौर पर, यदि घरेलू मंडी में प्लम ₹100–150 प्रति किलो बिक रहा हो, तो निर्यात में इसकी कीमत करीब ₹220 ₹330 प्रति किलो तक पहुँच सकती है।
निर्यात क्यों है महत्वपूर्ण?
जम्मू-कश्मीर में सेब, चेरी, अखरोट और अन्य बागवानी फ़सलों का उत्पादन लंबे समय से होता रहा है। लेकिन अब उच्च गुणवत्ता वाले फलों के निर्यात पर भी ज़ोर दिया जा रहा है। इससे किसानों को केवल स्थानीय मंडियों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय ख़रीदारों तक भी उनकी पहुँच बनेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि गुणवत्ता, ग्रेडिंग, पैकेजिंग और कोल्ड चेन व्यवस्था को और मज़बूत किया जाए, तो जम्मू-कश्मीर के फल वैश्विक बाज़ार में अपनी अलग पहचान बना सकते हैं।
आगे क्या?
सरकार और APEDA का लक्ष्य आने वाले वर्षों में जम्मू-कश्मीर से चेरी, प्लम और अन्य बागवानी उत्पादों के निर्यात को बढ़ाना है। इससे किसानों को बेहतर बाज़ार, बेहतर दाम और निर्यात आधारित खेती के नए अवसर मिल सकते हैं।