Lata Mishra

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Lata Mishra

    लता मिश्रा, गाँव कनेक्शन में मल्टीमीडिया पत्रकार और वीडियो प्रोड्यूसर हैं। ग्रामीण भारत की अनकही कहानियां, सामाजिक मुद्दे, महिला स्वास्थ्य, बाल कल्याण और कृषि पर रिपोर्ट करती हैं। एंकरिंग, वाइस ओवर और फील्ड रिपोर्टिंग में पिछले चार साल से योगदान दे रही हैं।

    लता मिश्रा, गाँव कनेक्शन में मल्टीमीडिया पत्रकार और वीडियो प्रोड्यूसर हैं। ग्रामीण भारत की अनकही कहानियां, सामाजिक मुद्दे, महिला स्वास्थ्य, बाल कल्याण और कृषि पर रिपोर्ट करती हैं। एंकरिंग, वाइस ओवर और फील्ड रिपोर्टिंग में पिछले चार साल से योगदान दे रही हैं।

    पश्चिम बंगाल चुनाव: 'परिवर्तन' की तलाश में थकी जनता, विकास और पहचान का संकट | West Bengal Elections: Tired Public in Search of 'Change', Crisis of Development and Identity
    पश्चिम बंगाल चुनाव: 'परिवर्तन' की तलाश में थकी जनता, विकास और पहचान का संकट | West Bengal Elections: Tired Public in Search of 'Change', Crisis of Development and Identity

    By Lata Mishra

    पश्चिम बंगाल की यात्रा ने सत्ता के शोर से दूर, जमीनी हकीकत को सामने लाया। लोगों के चेहरों पर बदलाव की चाहत और थकावट दिखी। सिलीगुड़ी से सुंदरबन तक, चाय बागानों की मजदूरिनों से लेकर गंगा के टापुओं पर रहने वाले लोगों तक, हर जगह बुनियादी सुविधाओं का अभाव और गरिमा की लड़ाई दिखी।

    पश्चिम बंगाल की यात्रा ने सत्ता के शोर से दूर, जमीनी हकीकत को सामने लाया। लोगों के चेहरों पर बदलाव की चाहत और थकावट दिखी। सिलीगुड़ी से सुंदरबन तक, चाय बागानों की मजदूरिनों से लेकर गंगा के टापुओं पर रहने वाले लोगों तक, हर जगह बुनियादी सुविधाओं का अभाव और गरिमा की लड़ाई दिखी।

    पश्चिम बंगाल का 'सोने की चिड़िया' से संघर्ष: 2026 चुनाव से पहले जानें इतिहास की दास्तान | West Bengal's Struggle from 'Golden Bird': Know the Historical Saga Before the 2026 Elections
    पश्चिम बंगाल का 'सोने की चिड़िया' से संघर्ष: 2026 चुनाव से पहले जानें इतिहास की दास्तान | West Bengal's Struggle from 'Golden Bird': Know the Historical Saga Before the 2026 Elections

    By Lata Mishra

    एक समय था जब बंगाल भारत की आर्थिक राजधानी था। राजनीतिक बदलावों और 1947 के बंटवारे ने इसकी अर्थव्यवस्था को तोड़ दिया। जूट उद्योग बुरी तरह प्रभावित हुआ। लाखों शरणार्थी आए, जिससे संसाधनों पर भारी बोझ पड़ा। 1971 के युद्ध ने स्थिति को और बिगाड़ा। यह सब बंगाल के पीछे छूटने का कारण बना।

    एक समय था जब बंगाल भारत की आर्थिक राजधानी था। राजनीतिक बदलावों और 1947 के बंटवारे ने इसकी अर्थव्यवस्था को तोड़ दिया। जूट उद्योग बुरी तरह प्रभावित हुआ। लाखों शरणार्थी आए, जिससे संसाधनों पर भारी बोझ पड़ा। 1971 के युद्ध ने स्थिति को और बिगाड़ा। यह सब बंगाल के पीछे छूटने का कारण बना।

    आम की थैलाबंदी: कीटनाशकों से मुक्ति, दोगुना दाम और निर्यात में आसानी | Mango Bagging: Freedom from Pesticides, Double Price, and Easy Export
    आम की थैलाबंदी: कीटनाशकों से मुक्ति, दोगुना दाम और निर्यात में आसानी | Mango Bagging: Freedom from Pesticides, Double Price, and Easy Export

    By Lata Mishra

    अगर किसानों को आम की फलत अच्छी और मंडी में अच्छा दाम मिलने के साथ ही निर्यात में आसानी चाहिए तो फलों की बैगिंग जरूर करनी जाहिए। इससे फल कीटों और कीटनाशकों से सुरक्षित रहता है। बैगिंग पर थोड़ा खर्च करके बाजार में रेट अच्छा मिल जाता है।

    अगर किसानों को आम की फलत अच्छी और मंडी में अच्छा दाम मिलने के साथ ही निर्यात में आसानी चाहिए तो फलों की बैगिंग जरूर करनी जाहिए। इससे फल कीटों और कीटनाशकों से सुरक्षित रहता है। बैगिंग पर थोड़ा खर्च करके बाजार में रेट अच्छा मिल जाता है।

    सर्वाइकल कैंसर: एक टीका लाखों महिलाओं की जान कैसे बचा सकता है? | Cervical Cancer: How one vaccine can save millions of women's lives?
    सर्वाइकल कैंसर: एक टीका लाखों महिलाओं की जान कैसे बचा सकता है? | Cervical Cancer: How one vaccine can save millions of women's lives?

    By Lata Mishra

    सर्वाइकल कैंसर दुनिया भर में महिलाओं के लिए एक बड़ा खतरा है। भारत जैसे देशों में इसके मामले अधिक हैं। यह कैंसर ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV) से फैलता है। समय पर टीका लगवाने और नियमित जांच कराने से इस बीमारी को रोका जा सकता है। सरकार भी इस दिशा में प्रयास कर रही है।

    सर्वाइकल कैंसर दुनिया भर में महिलाओं के लिए एक बड़ा खतरा है। भारत जैसे देशों में इसके मामले अधिक हैं। यह कैंसर ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV) से फैलता है। समय पर टीका लगवाने और नियमित जांच कराने से इस बीमारी को रोका जा सकता है। सरकार भी इस दिशा में प्रयास कर रही है।

    AGRO-TOURISM: समंदर किनारे चूल्हे का खाना, मेहमाननवाज़ी के साथ कमाई भी ज़्यादा
    AGRO-TOURISM: समंदर किनारे चूल्हे का खाना, मेहमाननवाज़ी के साथ कमाई भी ज़्यादा

    By Lata Mishra

    रोजी-रोटी की तलाश में हर साल लाखों लोग अपना गाँव छोड़कर बड़े शहरों की और पलायन करते हैं। लेकिन ये रोजगार अगर गाँव में ही मिल जाए, तो गाँव गुलजार रहेंगे और युवाओं पलायन नहीं करना पड़ेगा। एग्रो टूरिज्म से ऐसी ही राह दिखाई है महाराष्ट्र के कर्दे गाँव ने।

    रोजी-रोटी की तलाश में हर साल लाखों लोग अपना गाँव छोड़कर बड़े शहरों की और पलायन करते हैं। लेकिन ये रोजगार अगर गाँव में ही मिल जाए, तो गाँव गुलजार रहेंगे और युवाओं पलायन नहीं करना पड़ेगा। एग्रो टूरिज्म से ऐसी ही राह दिखाई है महाराष्ट्र के कर्दे गाँव ने।

    शहर की नौकरी छोड़ गाँव लौटा दंपति, लड़कियों को आधुनिक खेती से कर रहा सशक्त | Couple returns to village after leaving city job, empowering girls with modern farming
    शहर की नौकरी छोड़ गाँव लौटा दंपति, लड़कियों को आधुनिक खेती से कर रहा सशक्त | Couple returns to village after leaving city job, empowering girls with modern farming

    By Lata Mishra

    ‘द गुड हार्वेस्ट स्कूल’ ग्रामीण लड़कियों के लिए पढ़ाई का एक अलग ही मॉडल पेश कर रहा है, जहां क्लासरूम की दीवारें खेत हैं और किताबों के साथ कुदाल भी थमाई जाती है। इस स्कूल में बच्चियां हल चलाना, पौध तैयार करना, बीज चयन और जैविक खेती जैसे कौशल सीखती हैं।

    ‘द गुड हार्वेस्ट स्कूल’ ग्रामीण लड़कियों के लिए पढ़ाई का एक अलग ही मॉडल पेश कर रहा है, जहां क्लासरूम की दीवारें खेत हैं और किताबों के साथ कुदाल भी थमाई जाती है। इस स्कूल में बच्चियां हल चलाना, पौध तैयार करना, बीज चयन और जैविक खेती जैसे कौशल सीखती हैं।

    भारत-यूरोप व्यापार समझौता: किसानों, व्यापारियों और MSMEs को मिलेगा बंपर फायदा, आयुष को भी मिलेगी नई उड़ान! | India-Europe Trade Agreement: Farmers, Traders, and MSMEs to Get Bumper Benefits, AYUSH to Get New Wings!
    भारत-यूरोप व्यापार समझौता: किसानों, व्यापारियों और MSMEs को मिलेगा बंपर फायदा, आयुष को भी मिलेगी नई उड़ान! | India-Europe Trade Agreement: Farmers, Traders, and MSMEs to Get Bumper Benefits, AYUSH to Get New Wings!

    By Lata Mishra

    भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच हुए समझौता के जरिए यूरोप के 27 देशों में भारत की चाय, मसाले, फल और समुद्री उत्पादों पर टैक्स कम लगेगा, जिससे वहां भारतीय सामान सस्ता होगा और ज्यादा बिकेगा। खास बात यह है कि सरकार ने दूध (डेयरी) और अनाज जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को इस लिस्ट से बाहर रखा है ताकि छोटे किसानों की कमाई पर कोई आंच न आए।

    भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच हुए समझौता के जरिए यूरोप के 27 देशों में भारत की चाय, मसाले, फल और समुद्री उत्पादों पर टैक्स कम लगेगा, जिससे वहां भारतीय सामान सस्ता होगा और ज्यादा बिकेगा। खास बात यह है कि सरकार ने दूध (डेयरी) और अनाज जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को इस लिस्ट से बाहर रखा है ताकि छोटे किसानों की कमाई पर कोई आंच न आए।