Makhana Export 2026: बिहार का मिथिला मखाना अब विदेशी बाज़ारों में, किसानों के लिए खुलेंगे कमाई के नए रास्ते
Mansi | Aug 07, 2026, 16:54 IST
बिहार के GI टैग प्राप्त मिथिला मखाना की पहली खेप अब ऑस्ट्रेलिया के लिए रवाना कर दी गई है। बिहटा के पैकहाउस से करीब 18 मीट्रिक टन मखाना का निर्यात किया गया है। यह कदम न केवल बिहार के कृषि उत्पादों को वैश्विक बाजार से जोड़ने का कार्य करता है, बल्कि इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी, जिससे किसानों को बेहतर मूल्य मिलने की उम्मीद है।
बिहार के मिथिला मखाना की पहली खेप ऑस्ट्रेलिया के लिए रवाना
बिहार के प्रसिद्ध जीआई (GI) टैग प्राप्त मिथिला मखाना ने वैश्विक बाज़ार की ओर एक और बड़ा कदम बढ़ाया है। पटना के बिहटा स्थित इंटीग्रेटेड यूनिट ऑफ इरेडिएशन कम पैकहाउस से लगभग 18 मीट्रिक टन (सात कंटेनर) मखाना की पहली निर्यात खेप ऑस्ट्रेलिया के लिए रवाना की गई। इस अवसर पर बिहार के उपमुख्यमंत्री एवं कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने खेप को हरी झंडी दिखाई।
यह सिर्फ़ एक निर्यात खेप नहीं, बल्कि बिहार के कृषि उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाज़ार तक पहुँचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण शुरुआत मानी जा रही है। इससे मखाना उत्पादक किसानों के लिए नए बाज़ार खुलने और बेहतर दाम मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
बिहार सरकार के अनुसार, पहली बार GI टैग प्राप्त मिथिला मखाना की लगभग 18 मीट्रिक टन की खेप ऑस्ट्रेलिया भेजी गई है। यह निर्यात बिहटा स्थित आधुनिक इरेडिएशन कम पैकहाउस से किया गया, जहाँ निर्यात से पहले उत्पाद की गुणवत्ता, पैकेजिंग और अन्य आवश्यक प्रक्रियाएँ पूरी की जाती हैं। सरकार का कहना है कि यह पहल बिहार के कृषि उत्पादों को वैश्विक बाज़ार से जोड़ने की दिशा में एक अहम कदम है। इससे राज्य के अन्य कृषि उत्पादों के निर्यात की संभावनाएँ भी बढ़ सकती हैं।
राज्य सरकार किसानों को केवल उत्पादन तक सीमित रखने के बजाय उन्हें 'प्रोडक्शन टू एक्सपोर्ट' मॉडल से जोड़ने पर ज़ोर दे रही है। इसका उद्देश्य किसानों की उपज को सीधे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों तक पहुँचाना है, ताकि उन्हें बेहतर मूल्य मिल सके। सरकार का मानना है कि यदि कृषि उत्पाद वैश्विक गुणवत्ता मानकों के अनुरूप तैयार होंगे तो उनकी माँग विदेशों में भी बढ़ेगी, जिसका सीधा लाभ किसानों को मिलेगा।
बिहटा स्थित इंटीग्रेटेड यूनिट ऑफ इरेडिएशन कम पैकहाउस में कृषि उत्पादों की इरेडिएशन, गुणवत्ता परीक्षण, वैज्ञानिक पैकेजिंग और लॉजिस्टिक्स जैसी सुविधाएँ उपलब्ध हैं। इन प्रक्रियाओं के बाद उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप तैयार किया जाता है, जिससे निर्यात आसान होता है। ऐसी आधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध होने से कृषि उत्पादों की गुणवत्ता बनाए रखने के साथ-साथ उनकी शेल्फ लाइफ़ भी बेहतर होती है, जिससे विदेशी बाज़ारों तक सुरक्षित ढंग से उत्पाद पहुँचाना संभव हो पाता है।
यदि मखाना का निर्यात लगातार बढ़ता है, तो इसका लाभ केवल किसानों तक सीमित नहीं रहेगा। मखाना की सफ़ाई, ग्रेडिंग, पैकेजिंग, परिवहन और भंडारण जैसे क्षेत्रों में भी रोज़गार के अवसर बढ़ सकते हैं। इसके अलावा, बेहतर बाज़ार मिलने से किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलने की संभावना रहेगी, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मज़बूती मिल सकती है।
मखाना की खेती मुख्य रूप से बिहार के मिथिला क्षेत्र के कई ज़िलों में होती है। यह क्षेत्र लंबे समय से देश में मखाना उत्पादन का प्रमुख केंद्र रहा है। अपने स्वाद, गुणवत्ता और पोषण गुणों के कारण मिथिला के मखाना को पहले ही GI टैग मिल चुका है, जिससे इसकी विशिष्ट पहचान स्थापित हुई। अब ऑस्ट्रेलिया को पहली खेप भेजे जाने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में इसकी पहचान और मज़बूत होने की उम्मीद है।
सरकार का कहना है कि मखाना के बाद बिहार के अन्य कृषि और बागवानी उत्पादों को भी वैश्विक बाज़ार तक पहुँचाने की दिशा में प्रयास किए जाएंगे। इसके लिए गुणवत्ता मानकों, प्रसंस्करण और निर्यात से जुड़ी सुविधाओं को लगातार मज़बूत किया जा रहा है। यदि यह प्रयास सफल होते हैं, तो आने वाले समय में बिहार के कई कृषि उत्पाद विदेशी बाज़ारों में अपनी अलग पहचान बना सकते हैं और किसानों के लिए आय के नए अवसर तैयार हो सकते हैं।
यह सिर्फ़ एक निर्यात खेप नहीं, बल्कि बिहार के कृषि उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाज़ार तक पहुँचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण शुरुआत मानी जा रही है। इससे मखाना उत्पादक किसानों के लिए नए बाज़ार खुलने और बेहतर दाम मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।