उत्तराखंड से पहली बार इराक पहुँची फ्रोजन फ्रेंच फ्राइज़, एपीडा की मदद से 24 टन उत्पाद का हुआ निर्यात, मिला नया विदेशी बाज़ार
Gaon Connection | Jul 20, 2026, 15:49 IST
उत्तराखंड के काशीपुर से पहली बार 24 मीट्रिक टन फ्रोजन फ्रेंच फ्राइज़ की खेप इराक भेजी गई है। इस निर्यात में एपीडा ने सहयोग किया है। सरकार का मानना है कि इससे उत्तराखंड के मूल्यवर्धित कृषि उत्पादों को नए विदेशी बाज़ार मिलेंगे और किसानों को बेहतर दाम मिलने में मदद मिलेगी। वर्ष 2025-26 में भारत का प्रसंस्कृत सब्ज़ियों का निर्यात भी बढ़ा है। एपीडा राज्य सरकारों और निर्यातकों के साथ मिलकर कृषि उत्पादों के निर्यात और बाज़ार तक पहुँच बढ़ाने पर लगातार काम कर रहा है।
उत्तराखंड के कृषि निर्यात को मिली नई उड़ान!
भारत अब सिर्फ़ अनाज, फल और सब्ज़ियों का ही नहीं, बल्कि उनसे बने तैयार खाद्य उत्पादों का निर्यात भी तेज़ी से बढ़ा रहा है। इसी दिशा में उत्तराखंड ने एक नई शुरुआत की है। राज्य के उधम सिंह नगर ज़िले के काशीपुर से पहली बार 24 मीट्रिक टन फ्रोजन फ्रेंच फ्राइज़ की खेप इराक भेजी गई है। इस निर्यात में कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) ने मदद की है। इससे उत्तराखंड के कृषि उत्पादों को विदेशों में नए बाज़ार मिलने की उम्मीद बढ़ी है।
सरकार का मानना है कि अगर राज्य में तैयार खाद्य उत्पादों का निर्यात बढ़ता है तो किसानों को अपनी उपज का बेहतर दाम मिलेगा। साथ ही खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को भी बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय स्तर पर रोज़गार के नए अवसर पैदा होंगे। इससे उत्तराखंड के कृषि निर्यात को भी नई रफ़्तार मिलने की उम्मीद है।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के तहत काम करने वाले एपीडा ने उत्तराखंड के काशीपुर से इराक के लिए 24 मीट्रिक टन फ्रोजन फ्रेंच फ्राइज़ के पहले निर्यात में सहयोग दिया। यह खेप वीरुन ग्लोबल ट्रेड प्राइवेट लिमिटेड ने भेजी है। यह उत्तराखंड से तैयार कृषि उत्पादों के निर्यात की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। कंपनी ने उम्मीद जताई है कि उत्पाद की अच्छी गुणवत्ता के कारण आगे भी विदेशों से ऑर्डर मिलेंगे। इससे लंबे समय तक व्यापार बढ़ेगा और उत्तराखंड से निर्यात के नए अवसर खुलेंगे।
एपीडा ने कंपनी को सियाल, गल्फूड, इंडसफूड और वर्ल्ड फ़ूड इंडिया जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेलों में हिस्सा लेने में भी मदद की। इससे विदेशी खरीदारों तक पहुँचना आसान हुआ और नए व्यापारिक संबंध बनाने का मौका मिला। वर्ष 2025-26 के दौरान भारत से 932.25 मिलियन डॉलर के प्रसंस्कृत सब्ज़ियों का निर्यात हुआ। इस दौरान कुल 7,26,874.70 मीट्रिक टन प्रसंस्कृत सब्ज़ियाँ विदेश भेजी गईं। इनमें आलू से बने तैयार उत्पादों का निर्यात 2,77,108.51 मीट्रिक टन रहा, जिसकी कीमत 289.40 मिलियन डॉलर थी। प्रसंस्कृत फल और सब्ज़ियों का एपीडा के कुल निर्यात में लगभग 10 प्रतिशत हिस्सा रहा।
एपीडा के अध्यक्ष अभिषेक देव ने कहा कि उत्तराखंड जैसे राज्यों में परिवहन की लागत ज़्यादा होने से निर्यात पर असर पड़ता है। इसे देखते हुए एपीडा, उत्तराखंड सरकार के साथ मिलकर राज्य कृषि निर्यात नीति पर काम कर रहा है। कोशिश है कि परिवहन में भी सहायता मिले, ताकि निर्यातकों की लागत कम हो और उन्हें विदेशों के बाज़ार तक आसानी से पहुँच मिल सके। उन्होंने कहा कि राज्य में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग बढ़ने से किसानों की अच्छी गुणवत्ता वाली उपज की मांग भी बढ़ेगी। इससे किसानों को बेहतर दाम मिलेंगे, स्थानीय स्तर पर ही कृषि उत्पादों का मूल्य बढ़ेगा और राज्य से कृषि उत्पादों का निर्यात भी तेज़ होगा।
एपीडा ने बताया कि वह राज्य सरकारों, निर्यातकों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), खाद्य प्रसंस्करण कंपनियों और अन्य संबंधित संस्थाओं के साथ मिलकर निर्यात की सुविधाएँ बेहतर बनाने और भारत के मूल्यवर्धित कृषि उत्पादों को वैश्विक बाज़ार तक पहुँचाने के लिए लगातार काम कर रहा है।
सरकार का मानना है कि अगर राज्य में तैयार खाद्य उत्पादों का निर्यात बढ़ता है तो किसानों को अपनी उपज का बेहतर दाम मिलेगा। साथ ही खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को भी बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय स्तर पर रोज़गार के नए अवसर पैदा होंगे। इससे उत्तराखंड के कृषि निर्यात को भी नई रफ़्तार मिलने की उम्मीद है।
पहली बार इराक भेजी गई फ्रोजन फ्रेंच फ्राइज़ की खेप, एपीडा ने की मदद
एपीडा की मदद से विदेशों में मिली पहचान, भारत का प्रसंस्कृत खाद्य निर्यात भी बढ़ा
किसानों को बेहतर दाम दिलाने और निर्यात बढ़ाने पर ज़ोर
एपीडा ने बताया कि वह राज्य सरकारों, निर्यातकों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), खाद्य प्रसंस्करण कंपनियों और अन्य संबंधित संस्थाओं के साथ मिलकर निर्यात की सुविधाएँ बेहतर बनाने और भारत के मूल्यवर्धित कृषि उत्पादों को वैश्विक बाज़ार तक पहुँचाने के लिए लगातार काम कर रहा है।