15 अगस्त तक भूलकर भी न पकड़ें मछली! जाल फेंकने से पहले पढ़ लें ये खबर, नहीं तो जेल और जुर्माना दोनों तय
Gaon Connection | Jun 08, 2026, 18:12 IST
मछलियों के प्राकृतिक प्रजनन और जलीय संसाधनों के संरक्षण के लिए इस राज्य में नदियों एवं उनसे जुड़े जलाशयों में मछली पकड़ने पर अस्थायी प्रतिबंध लगाया गया है। इस अवधि के दौरान अवैध रूप से मछली पकड़ने या परिवहन करने पर जेल और जुर्माने की कार्रवाई हो सकती है। सरकार का उद्देश्य मत्स्य उत्पादन बढ़ाना, जैव विविधता की रक्षा करना और जलीय पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत बनाना है।
मछली पकड़ने वालों के लिए चेतावनी!
मछलियों के प्राकृतिक प्रजनन और जलीय जैव विविधता के संरक्षण को ध्यान में रखते हुए मध्य प्रदेश सरकार ने राज्यभर में मछली पकड़ने पर अस्थायी प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है। मत्स्य संसाधनों को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से 16 जून से 15 अगस्त 2026 तक की अवधि को ‘क्लोज सीजन’ घोषित किया गया है। इस दौरान प्रदेश की नदियों और उनसे जुड़े जलाशयों में मछली पकड़ना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।
मत्स्योद्योग संचालनालय की ओर से जारी निर्देशों में सभी जिला प्रशासन और संबंधित विभागों को नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है। सरकार का मानना है कि प्रजनन काल के दौरान मछलियों को संरक्षण मिलने से भविष्य में मत्स्य उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी और जलीय पारिस्थितिकी तंत्र भी मजबूत होगा।
हर साल मानसून के दौरान अधिकांश मछलियां प्रजनन करती हैं। इसी अवधि में मछलियों की संख्या और गुणवत्ता बनाए रखने के लिए कई राज्यों में मछली पकड़ने पर रोक लगाई जाती है। मध्य प्रदेश में भी 16 जून से 15 अगस्त तक सभी नदियों और उनसे जुड़े जलाशयों में मत्स्याखेट पर पूर्ण प्रतिबंध लागू रहेगा। सरकार का कहना है कि यह कदम प्राकृतिक मत्स्य बीज उत्पादन को बढ़ावा देने और जल संसाधनों में मछलियों की उपलब्धता बनाए रखने के लिए जरूरी है।
मत्स्योद्योग विभाग ने स्पष्ट किया है कि प्रतिबंध अवधि के दौरान यदि कोई व्यक्ति अवैध रूप से मछली पकड़ते या उनका परिवहन करते हुए पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। दोषी पाए जाने पर जेल और आर्थिक दंड दोनों का प्रावधान है। प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि मछुआरा समुदाय और संबंधित लोगों को समय रहते नियमों की जानकारी दी जाए ताकि अनजाने में उल्लंघन की स्थिति न बने।
सरकार के आदेश के अनुसार यह प्रतिबंध केवल नदियों और उनसे जुड़े जलाशयों पर लागू होगा। ऐसे छोटे तालाब या निजी जल स्रोत, जिनका किसी नदी से कोई संपर्क नहीं है और जो ‘निर्दिष्ट जल’ की श्रेणी में नहीं आते, उन्हें इस नियम से बाहर रखा गया है। इन जल स्रोतों में सामान्य रूप से मत्स्य पालन और मछली पकड़ने की गतिविधियां जारी रह सकेंगी।
मछलियों के प्रजनन काल के दौरान संरक्षण देने के लिए देश के विभिन्न राज्यों में हर वर्ष क्लोज सीजन लागू किया जाता है। इसकी अवधि क्षेत्र और भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग होती है। उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य भारत के कई हिस्सों में आमतौर पर जून से अगस्त के बीच मछली पकड़ने पर प्रतिबंध रहता है। वहीं केरल, कर्नाटक, गोवा और महाराष्ट्र जैसे तटीय राज्यों में समुद्री मछलियों के संरक्षण के लिए प्रायः 1 जून से 31 जुलाई तक क्लोज सीजन लागू किया जाता है। तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में यह अवधि आमतौर पर अप्रैल से जून के बीच रहती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रजनन काल में मछलियों को संरक्षण देने से जलाशयों में उनकी संख्या बढ़ती है, जिससे भविष्य में मत्स्य उत्पादन और मछुआरों की आय दोनों को लाभ मिलता है। इसी उद्देश्य से सरकारें हर साल कुछ समय के लिए मछली पकड़ने पर प्रतिबंध लागू करती हैं, ताकि प्राकृतिक संसाधनों का संतुलन बना रहे।
मत्स्योद्योग संचालनालय की ओर से जारी निर्देशों में सभी जिला प्रशासन और संबंधित विभागों को नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है। सरकार का मानना है कि प्रजनन काल के दौरान मछलियों को संरक्षण मिलने से भविष्य में मत्स्य उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी और जलीय पारिस्थितिकी तंत्र भी मजबूत होगा।