Gen Z के लिए AI ट्रेनिंग से फ्री कोचिंग तक, PM मोदी ने किए दो बड़े ऐलान
Mansi | Aug 15, 2026, 11:33 IST
प्रधानमंत्री ने प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए निःशुल्क ऑनलाइन कोचिंग की शुरुआत की घोषणा की है। यह पहल ग्रामीण और छोटे शहरों के विद्यार्थियों को घर से अध्ययन करने का सुनहरा अवसर प्रदान करेगी। सरकार डिजिटल बुनियादी ढांचे और दक्ष शिक्षकों की सहायता से इस प्रणाली का कार्यान्वयन करेगी। अगले वर्ष में एक करोड़ युवा AI कौशल प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे।
PM मोदी ने युवाओं के लिए मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग और AI ट्रेनिंग का ऐलान किया
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए स्वतंत्रता दिवस पर एक बड़ी घोषणा हुई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले से अपने संबोधन में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग उपलब्ध कराने का ऐलान किया। महंगी कोचिंग और दूसरे शहरों में रहकर पढ़ाई करने का खर्च कई परिवारों के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है। ऐसे में ऑनलाइन माध्यम से पढ़ाई की सुविधा मिलने पर गाँव और छोटे शहरों के छात्रों को घर से ही तैयारी करने का मौका मिल सकता है। सरकार इसके लिए देश के डिजिटल सार्वजनिक ढाँचे और अनुभवी शिक्षकों की मदद लेने की बात कह रही है।
युवाओं को नई तकनीक से जोड़ने पर भी ज़ोर दिया गया है। सरकार का लक्ष्य अगले एक साल में एक करोड़ युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े कौशल का प्रशिक्षण देने का है। इसके साथ ही Census 2027 में युवाओं से सक्रिय भागीदारी की अपील की गई है। जनगणना से जुटाए गए सही आँकड़े गाँवों और शहरों की ज़रूरतों को समझने, सरकारी योजनाओं की बेहतर योजना बनाने और विकास की प्राथमिकताएँ तय करने में मदद करते हैं। ऐसे में युवाओं की भागीदारी इस पूरी प्रक्रिया को मजबूत बना सकती है।
देश में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बड़ी संख्या में छात्र कोचिंग का सहारा लेते हैं। कई बार अच्छी कोचिंग के लिए उन्हें अपने गाँव या छोटे शहर से निकलकर बड़े शहरों का रुख करना पड़ता है। इससे परिवार पर सिर्फ़ कोचिंग फ़ीस का ही नहीं, बल्कि किराए, खाने और आने-जाने का भी अतिरिक्त खर्च पड़ता है। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में इसी परेशानी का ज़िक्र किया। उन्होंने कहा कि कोचिंग की बढ़ती प्रतिस्पर्धा मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए बड़ा आर्थिक बोझ बन गई है। कई माता-पिता को लगता है कि अगर उनका बच्चा कोचिंग नहीं करेगा तो वह प्रतियोगिता में पीछे रह जाएगा। ऐसे में सरकार युवाओं को अलग-अलग प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग देने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
ऑनलाइन कोचिंग की सुविधा ख़ास तौर पर उन छात्रों के लिए उपयोगी हो सकती है, जिन्हें बेहतर तैयारी के लिए अपने घर से दूर जाना पड़ता है। गाँवों और छोटे कस्बों में रहने वाले युवा अगर इंटरनेट और डिजिटल साधनों के ज़रिए गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई से जुड़ते हैं, तो उन्हें बड़े शहरों की कोचिंग पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। सरकार ने इसके लिए देश के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रतिभाशाली शिक्षकों व शिक्षाविदों की क्षमता का इस्तेमाल करने की बात कही है।
प्रधानमंत्री के संबोधन में युवाओं को नई तकनीक के लिए तैयार करने पर भी ख़ास ज़ोर रहा। सरकार अगले एक साल में एक करोड़ युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI से जुड़े कौशल का प्रशिक्षण देने की योजना पर काम कर रही है। AI का इस्तेमाल तेजी से पढ़ाई, खेती, स्वास्थ्य, कारोबार और रोज़गार जैसे कई क्षेत्रों में बढ़ रहा है। ऐसे में युवाओं को इस तकनीक की जानकारी और उससे जुड़े कौशल देना उनके लिए आगे रोज़गार और काम के नए अवसर खोल सकता है।
प्रधानमंत्री ने युवाओं से Census 2027 में सक्रिय भागीदारी करने की भी अपील की। उन्होंने कहा कि जनगणना सिर्फ़ लोगों की संख्या गिनने तक सीमित नहीं है। इससे देश में लोगों की ज़रूरतों और सामाजिक-आर्थिक स्थिति से जुड़े महत्वपूर्ण आँकड़े मिलते हैं, जिनके आधार पर नीतियाँ और विकास योजनाएँ तैयार की जाती हैं। Census 2027 की प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से चल रही है। ऐसे में युवाओं की भागीदारी लोगों तक सही जानकारी पहुँचाने और जनगणना से जुड़ी प्रक्रिया में सहयोग करने में अहम हो सकती है। प्रधानमंत्री ने युवाओं से अपील की कि वे देश के इस महत्वपूर्ण काम के लिए अपना थोड़ा समय ज़रूर दें।
मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग और AI प्रशिक्षण जैसी पहल का फ़ायदा उन युवाओं को मिल सकता है, जो संसाधनों की कमी के कारण बड़े शहरों में जाकर पढ़ाई या महंगी ट्रेनिंग नहीं ले पाते। अगर डिजिटल सुविधाएँ गाँवों तक बेहतर तरीके से पहुँचती हैं, तो घर से पढ़ाई और कौशल प्रशिक्षण के विकल्प मजबूत हो सकते हैं।
युवाओं को नई तकनीक से जोड़ने पर भी ज़ोर दिया गया है। सरकार का लक्ष्य अगले एक साल में एक करोड़ युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े कौशल का प्रशिक्षण देने का है। इसके साथ ही Census 2027 में युवाओं से सक्रिय भागीदारी की अपील की गई है। जनगणना से जुटाए गए सही आँकड़े गाँवों और शहरों की ज़रूरतों को समझने, सरकारी योजनाओं की बेहतर योजना बनाने और विकास की प्राथमिकताएँ तय करने में मदद करते हैं। ऐसे में युवाओं की भागीदारी इस पूरी प्रक्रिया को मजबूत बना सकती है।