Gaudham-Yojana: आवारा पशुओं की समस्या से निपटने के लिए छत्तीसगढ़ में बनेंगे 1460 गौधाम

Gaon Connection | Mar 14, 2026, 16:01 IST
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छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बिलासपुर में लाखासार से छत्तीसगढ़ गौधाम योजना का उद्घाटन किया। इस योजना के अंतर्गत, मवेशियों को सुरक्षित आश्रय मिलेगा, जिससे न केवल पशु तस्करी पर नियंत्रण पाया जाएगा बल्कि हमारे पारंपरिक कृषि जीवन का भी संरक्षण होगा। हाईकोर्ट के आदेशानुसार शुरू हुई यह पहल सभी जिलों में गौधाम बनाने की प्रक्रिया को बढ़ावा देगी।
आवारा पशुओं की समस्या से निपटने के लिए छत्तीसगढ़ में बनेंगे 1460 गौधाम
आवारा पशुओं की समस्या से निपटने के लिए छत्तीसगढ़ में बनेंगे 1460 गौधाम
गौवंश का मुद्दा छत्तीसगढ़ की राजनीति में पहले भी चर्चा का विषय रहा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बिलासपुर के तखतपुर के लाखासार से छत्तीसगढ़ गौधाम योजना का शुभारंभ किया। यह योजना सड़क पर घूम रहे मवेशियों को आश्रय प्रदान करने और अवैध तस्करी पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से शुरू की गई है। हाईकोर्ट के आदेश पर राज्य शासन ने यह योजना बनाई है, जिसके तहत प्रदेश के सभी जिलों में गौधाम बनाए जाएंगे। इस योजना के माध्यम से चरवाहों और गौसेवकों को मानदेय भी दिया जाएगा।

क्या है गौधाम योजना?

छत्तीसगढ़ सरकार राज्य में गौवंश की देखभाल और संरक्षण के लिए गौधाम योजना लागू कर रही है। इस योजना के तहत हर विकासखंड में 10 गौधाम बनाए जाएँगे। पूरे राज्य में कुल 1460 गौधाम बनाने का लक्ष्य रखा गया है। फिलहाल 36 गौधामों को प्रशासकीय स्वीकृति मिल चुकी है, जबकि 116 गौधामों की स्वीकृति की प्रक्रिया चल रही है। पहले चरण में राज्य में 152 गौधाम स्थापित किए जा रहे हैं।

- इस योजना के तहत गौधाम में काम करने वाले चरवाहों को हर महीने 10,916 रुपये और गौसेवकों को 13,126 रुपये मानदेय दिया जाएगा। इसके अलावा पशुओं के चारे के लिए भी सरकार की ओर से रोजाना तय राशि दी जाएगी।

- सरकार ने बेहतर काम करने वाले गौधामों को प्रोत्साहित करने के लिए अलग व्यवस्था भी की है। उत्कृष्ट गौधाम में रहने वाले प्रत्येक पशु के लिए पहले साल 10 रुपये प्रतिदिन, दूसरे साल 20 रुपये, तीसरे साल 30 रुपये और चौथे साल 35 रुपये प्रतिदिन की राशि दी जाएगी। योजना के लिए बजट, नियम और शर्तें भी तय कर दी गई हैं, ताकि इसके संचालन में किसी तरह की परेशानी न हो।

क्यों बनी नई गौधाम योजना?

प्रदेश में नेशनल हाईवे और स्टेट हाईवे पर मवेशियों के जमावड़े से होने वाली दुर्घटनाओं की आशंका को देखते हुए यह योजना शुरू की गई है। लगातार हो रहे हादसों पर हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका के रूप में सुनवाई शुरू की थी। इस दौरान हाईकोर्ट ने आवारा मवेशियों के प्रबंधन को लेकर राज्य शासन के चीफ सेक्रेटरी सहित अफसरों को कड़ी फटकार भी लगाई थी। इसके बाद राज्य सरकार ने प्रदेश के सभी जिलों में गौधाम योजना शुरू करने का फैसला लिया।

कैसे होगा मवेशियों का संरक्षण?

ग्राम लाखासार में पिछले 25 वर्षों से पूर्व सरपंच प्रमोद शर्मा की तरफ से गौशाला का संचालन किया जा रहा है। अब वहाँ पर गौधाम बनाया गया है। इसके शुरू होने से क्षेत्र में मवेशियों के संरक्षण और रख-रखाव की व्यवस्था और मजबूत होने की उम्मीद जताई जा रही है।

  1. इस योजना में अलग-अलग जिलों और ब्लॉकों में गौधाम/गौशाला बनाए जाएंगे।
  2. गौ धाम में आवारा और जब्त किए गए पशुओं को रखा जाएगा।
  3. पशुओं के रहने के लिए सुरक्षित शेड, साफ-सफाई, मेडिकल और पानी की व्यवस्था होगी।
  4. गायों के लिए नियमित चारा, भूसा और हरा चारा उपलब्ध कराया जाएगा।
  5. समय-समय पर टीकाकरण और स्वास्थ्य जाँच होगी।
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